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Government of India

वर्ष 2017 के दौरान खान मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियां

                   वर्षांत समीक्षा – 2017 : खान मंत्रालय

                                            खनिज नीलामी नियमों में संशोधन

2015 में खान और खनिज विकास तथा नियमन अधिनियम, 1957 संशोधित किया गया। संशोधन के पश्चात खान मंत्रालय ने नीलामी प्रक्रिया के संदर्भ में खनिज नीलामी नियम, 2015 दिनांक 20 मई, 2015 को अधिसूचित किया।

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देश के खनिज प्रशासन के इतिहास में पहली बार प्रमुख खनिजों (कोयला, पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के अलावा) की नीलामी में छूट की व्यवस्था की गई। 33 ब्लॉक सफलता पूर्वक आवंटित किए गए। नीलामी किए गए खनिजों का मूल्य 169000 करोड़ रुपये है। राजस्व में राज्यों का हिस्सा 128000 करोड़ रुपये है। नीलामी प्रक्रिया से 99000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हुई। हालांकि इस अवधि में नीलामी के 60 प्रयास असफल रहे।

राज्य सरकारों के साथ मिलकर खान मंत्रालय प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण कर रहा है। इस बात पर सहमति बनी कि खनिज नीलामी नियमों की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से संशोधित किया जाना चाहिए और सफल बोली लगाने वालों पर नियंत्रण भी बना रहना चाहिए। तद्नुसार, खनिज नीलामी नियमों को 30 नवम्बर, 2017 को संशोधित किया गया।

हवाई-भूभौतिकीय सर्वेक्षण

भूगर्भीय संभावित क्षेत्र के लिए बहु-संवेदी हवाई-भूभौतिकीय सर्वेक्षण का उद्घाटन 7 अप्रैल, 2017 को किया गया।

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पूरे विश्व में संसाधनों की खोज के लिए हवाई-भूभौतिकीय सर्वेक्षण को सबसे कुशल, व्यापक और कम लागत वाला माना जाता है। 2 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित 4 ब्लाकों में यह परियोजना लागू की गई।

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हवाई माध्यम से एक ही बार में पूरी की जाने वाली यह विश्व की सबसे बड़ी परियोजना है।

राष्ट्रीय खनिज नीति 2008 की समीक्षा के लिए समिति

रिट याचिका (सिविल) संख्या 114 (2014) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2 अगस्त, 2017 को दिए गए निर्णय के आलोक में राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008 की समीक्षा के लिए अपर सचिव (खान) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया।

खानों की स्टार रेटिंग  

  • सतत विकास फ्रेमवर्क के तहत खान मंत्रालय ने खानों की स्टार रेटिंग की पद्धति विकसित की है।
  • खान मंत्रालय ने सतत विकास फ्रेमवर्क के तहत खान गतिविधियों के लिए समावेशी विकास सिद्धांत अपनाया है। उससे वर्तमान और भविष्य के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरण हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
  • 2 स्तरों वाली पद्धति विकसित की गई है। इसके तहत खान संचालकों को स्वमूल्यांकन टैम्प्लेट में सूचनाएं देनी होंगी और भारत खान ब्यूरो इसकी वैधता की जांच करेगा।
  • स्टार रेटिंग के लिए मूल्यांकन टैम्प्लेट (प्रमुख खनिजों के लिए) को दिनांक 23 मई, 2016 को अधिसूचित किया गया।
  • खनन पट्टे के प्रदर्शन के आधार पर 1 से 5 स्टार रेटिंग की व्यवस्था की गई है। ऊंची रेटिंग वाले खान संचालकों को सतत खनन अभ्यासों को शीघ्र अपनाना होगा।
  • 4 स्टार प्राप्त करने के लिए एमसीडीआर में स्टार रेटिंग को वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसके लिए समय सीमा 2 वर्ष है।
  • उपायों के मूल्यांकन के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है। इसे 18 अगस्त, 2016 को लांच किया गया। खान क्षेत्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • कम महत्वपूर्ण खनिजों की स्टार रेटिंग के लिए भी टैम्प्लेट तैयार किया जा रहा है।

खनन निगरानी प्रणाली (एमएसएस)

खनन निगरानी प्रणाली (एमएसएस) एक सेटेलाइट आधारित निगरानी व्यवस्था है, जिससे रिमोट संवेदी खोज तकनीक के जरिये अवैध खनन को रोका जा सकता है।

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  • खान मंत्रालय और भारतीय खान ब्यूरो ने एमएसएस विकसित किया है। इस विकसित करने में भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग संस्थान, ज्योइन्फोरमेटिक्स, गांधी नगर तथा इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सहायता प्रदान की है।
  • प्रणाली इस आधारभूत तथ्य पर कार्य करता है कि अधिकांश खनन क्षेत्रों में निरंतरता देखी गई है। इनकी उपलब्धता केवल पट्टे वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी इसके उपलब्ध होने की पूरी संभावना रहती है। वर्तमान के खनन क्षेत्रों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में एमएसएस निगरानी करता है। यदि कोई विसंगति पाई जाती है तो इसे ट्रिगर के रूप में चिन्हित (फ्लैग ऑफ) किया जाता है।

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  • एमएसएस एक पारदर्शी और पूर्वाग्रह मुक्त प्रणाली है। यह तेजी से प्रतिक्रिया देती है और अनुपूरक कार्यों के संदर्भ में इसकी क्षमता प्रभावशाली है। अवैध खनन की रोकथाम के लिए ‘आकाश में एक नेत्र’ के प्रयास बहुत सफल रहे हैं।
  •  एमएसएस के लिए एक मोबाइल एप्प 24 जनवरी, 2017 को गांधी नगर में लांच किया गया। इस एप्प के माध्यम से नागरिक अवैध खनन की सूचना साझा कर सकते हैं।
  • राज्य सरकारों के 296 ट्रिगरों (3994.87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र) के निरीक्षण के पश्चात 48 अवैध खनन का पता लगाया गया।

भारत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई)

वार्षिक कार्यक्रम 2017-18 के अंतर्गत जीएसआई ने 6927.5 वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट थीमैटिक मैपिंग (1:25000 माप) का कार्य (नवम्बर, 2017 तक) पूरा किया है। लक्ष्य 14000 वर्ग किलोमीटर था।gsi2.jpg

  • वार्षिक कार्यक्रम 2017-18 के अंतर्गत जीएसआई ने 57264 वर्ग किलोमीटर का राष्ट्रीय ज्योकैमिकल मैपिंग (1:50000 माप) का कार्य (नवम्बर, 2017 तक) पूरा किया है। लक्ष्य 137000 वर्ग किलोमीटर था।
  • वार्षिक कार्यक्रम 2017-18 के अंतर्गत जीएसआई ने 45947 वर्ग किलोमीटर का राष्ट्रीय ज्योकैमिकल मैपिंग (1:50000 माप) का कार्य (नवम्बर, 2017 तक) पूरा किया है। लक्ष्य 100000 वर्ग किलोमीटर था।
  • राष्ट्रीय कार्यक्रम 2017-18 के तहत जीएसआई ने 25000 किलोमीटर के लक्ष्य के अंतर्गत 2693 लाइन किलोमीटर का हेलीबोर्न सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया है।
  • वार्षिक कार्यक्रम 2017-18 के अंतर्गत जीएसआई ने 3741 वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्राथमिक समुद्री खनिज खोज का कार्य (नवम्बर, 2017 तक) पूरा किया है। लक्ष्य 30000 वर्ग किलोमीटर था।
  • 2017-18 के दौरान जीएसआई ने राष्ट्रीय भूस्खलन संवेदन मैपिंग के 37 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके तहत जीएसआई ने 45000 वर्ग किलोमीटर लक्ष्य के अंतर्गत 25776 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का मैपिंग किया (नवम्बर, 2017 तक)।
  • जीएसआई ने खनिज खोज रिपोर्ट का डिजिटलीकरण किया है और इन रिपोर्टों (संख्या 6090) को ओसीबीआईएस पोर्टल पर अपलोड किया है।
  • वर्ष 2017 के दौरान जीएसआई ने प्राकृतिक खनिज संसाधनों में वृद्धि की सूचना भारतीय खान ब्यूरो को दी है, जो इस प्रकार है : तांबा – 24.94 मिलियन टन, लौहा – 206.23 मिलियन टन, बाक्साइड – 4.5 मिलियन टन, चूना पत्थर – 1238.61 मिलियन टन, प्लेटिनम संवर्ग के तत्व – 0.402 मिलियन टन, सोना – 1.67 मिलियन टन, पोटास – 9.66 मिलियन टन, एंडलूसाईट – 45.87 मिलियन टन और कोयला – 1822.44 मिलियन टन।
  • भारत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान (जीएसआईटीआई) और आईआईटी हैदराबाद ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत 1 अप्रैल, 2018 से प्रारंभ होने वाले शैक्षणिक सत्र में जीएसआईटीआई शैक्षिक और अनुसंधान कार्यक्रमों के संदर्भ में पीएचडी की डिग्री देगा।
  • जीएसआई ने सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित एक प्रणाली लागू किया है। इसका नाम ऑनलाइन कोर बिजनेस इंट्रीग्रेटेड सिस्टम (ओसीबीआईएस) है। यह सभी मिशनों और सहायक प्रणालियों का डाटा प्रबंधन करेगा। ओसीबीआईएस जीएसआई की सूचना प्रौद्योगिकी क्षमता को बढ़ाएगा। इसके माध्यम से जीएसआई बाहरी हितधारकों, खान मंत्रालय, राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर के पृथ्वी विज्ञान संगठन/ विभाग, उद्योग जगत और नागरिकों की सूचनाएं आदान-प्रदान करने में सक्षम होगा।

राष्ट्रीय एलमुनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को) 

प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

वर्ष 2016-17 के दौरान बाक्साइड खानों और एलुमिना रिफाइनरी का उत्पादन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर रहा।

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बाक्साइड परिवहन 68.25 लाख एमटी (क्षमता का 100 प्रतिशत) रहा, जबकि एलुमिना हाइड्रेड का उत्पादन 21 लाख एमटी (क्षमता का 100 प्रतिशत) दर्ज किया गया।

स्वच्छ आईकोनिक सिटी

नाल्को ने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के सौंदर्यकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। श्री जगन्नाथ मंदिर में रौशनी का कार्य पूरा कर लिया गया है।

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वीआईपी रोड़ स्थित दोनों दीवारों  में जगन्नाथ संस्कृति पर आधारित पेंटिंग लगाए गए हैं। पुरी स्थित गांधी पार्क के पुनरूद्धार और सौंदर्यकरण का कार्य भी किया जा रहा है।

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वर्ष 2017 के दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियां

            वर्षांत समीक्षा-2017 : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय

                 2017 महत्वाकांक्षी शुरूआतों और इंजीनियरिंग चमत्‍कार का वर्ष

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कार्यों की विशेषताएं

सूची

  •  प्रस्‍तावना
  • राष्‍ट्रीय राजमार्गों का निर्माण
  • सड़क सुरक्षा
  •  हरित पहलें
  •  ई-पहलें
  •  अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारियां
  •  अन्‍य

 

 प्रस्‍तावना

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए वर्ष 2017 प्रमुख वर्ष रहा है। जहां 2014 से 2016 तक की अवधि का उपयोग सुधार लाने और दिशा बदलने के उद्देश्‍य से किया गया था। वहीं 2017 में एकीकरण, समापन और राजमार्ग क्षेत्र के लिए नए रोड़ मैप शुरू किये गए थे।

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क्षेत्र के तेजी से होते विकास को ध्‍यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 में राजमार्ग ढांचागत विकास क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि इसके लागत और समय में 1.5 बिलियन रूपये की कमी आई है और प्रतिदिन अतिरिक्‍त सड़क निर्माण सहित राजमार्ग परियोजनाओं के आवंटन और निर्माण कार्य सबसे अधिक हुआ है। इसमें बताया गया है कि मूल्‍य और संख्‍या की दृष्टि से लंबित परियोजनाएं कम हुई हैं। 16 नवंबर, 2017 को भारत की संप्रभु (साव्रिन) रेटिंग बीएए3 सकारात्‍मक से ऊपर बीएए2 स्थिर करने के बाद रेटिंग जारी करने वाली मूडीज निवेशक सेवा ने भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की रेटिंग में सुधार कर इसे बीएए3 सकारात्‍मक से बीएए2 स्थिर स्‍तर की श्रेणी रखा।

2017 में कई प्रमुख कार्य हुए। यह वर्ष इंजीनियरिंग चमत्‍कार का रहा और असम में धोला सादिया पुल और जम्‍मू-कश्‍मीर में चेनानी नाशरी टनल दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए खोले गए जिससे उस क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्‍त हुआ। इस वर्ष में ही महत्‍वपूर्ण ढांचागत कमियों को दूर कर देशभर में सड़क परिवहन की दक्षता बढ़ाने के लिए देश के सबसे बड़े राजमार्ग विकास कार्यक्रम भारतमाला परियोजना का शुभारंभ हुआ। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी हमने पाया कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्‍या में कमी आई।

बहु-आयामी परिवहन विकास के क्षेत्र में प्रगति के कारण वर्ष 2017 को देश की परिवहन योजनाओं के लिए क्रांतिकारी समय के रूप में देखा जा सकता है। केंद्रीय बजट 2017-18 में संपूर्ण परिवहन क्षेत्र के लिये व्‍यापक बजट के वास्‍ते आधार तय किया गया था। मंत्रालय ने मई 2017 में भारत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्‍टिक्‍स सम्‍मेलन आयोजित कर इस विचार को और आगे बढ़ाया तथा रेलवे, सड़क, जलमार्ग और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में निवेश में अधिक तालमेल के साथ बहुआयामी परिवहन योजना को सक्रियता से बढ़ावा दिया।

 2017 में मंत्रालय और इसके परियोजना कार्यान्वित करने वाले संगठनों ने पिछले वर्ष के अच्‍छे कार्यों को ओर आगे बढ़ाते हुए देशभर में राष्‍ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क को फैलाया, इन राजमार्गों को यात्रियों के लिये सुरक्षित बनाने के लिये कई कदम उठाये और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के प्रयास किए गए। इस वर्ष के दौरान मंत्रालय द्वारा किए गए महत्‍वपूर्ण कार्य निम्‍नलिखित हैं:

 राष्‍ट्रीय राजमार्गों का निर्माण     

आवंटन/निर्माण आंकड़े

मांग, भूमि की उपलब्‍धता और अनुबंधों के प्रबंधन का परिणाम पर आवंटन और निर्माण गतिविधि निर्भर होती है। मार्च 2017 में सबसे अधिक 15948 किलोमीटर के सड़क निर्माण के लिए आवंटन और 8231 किलोमीटर निर्माण किया गया। इस वर्ष के दौरान राष्‍ट्रीय राजमार्ग निर्माण की विस्‍तृत जानकारी निम्‍नलिखित तालिका में दी गई हैं: –

वर्ष आवंटन (किलोमीटर) निर्माण (किलोमीटर)
2014-15 7972 4410
2015-16 10098 6061
2016-17 15948 8231
टिप्‍पणी: 2017-18 का कार्य प्रगति पर है और भारतमाला परियोजना और उसके स्‍वरूपों के संपन्‍न होने के साथ ही आवंटन और निर्माण गतिविधियां समन्वित दिशा में केंद्रित है।

 नए कार्यक्रम, परियोजनाएं और संरचनाएं

  भारतमाला परियोजना:पहला चरण

यह राजमार्ग क्षेत्र के लिए नया महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्‍य महत्‍वपूर्ण ढांचागत कमियों को दूर कर देशभर में सड़क परिवहन यातायात की दक्षता को बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के‍ तहत विशेष ध्‍यान आर्थिक गतिविधि के क्षेत्रों, धार्मिक और पर्यटक स्‍थलों के हित, सीमा क्षेत्रों, पिछड़े तथा जनजातीय क्षेत्रों, तटीय इलाकों और पड़ोसी देशों के साथ व्‍यापारिक मार्गों को जोड़ने की आवश्‍यकता को पूरा करने पर दिया गया है। बहुआयामी समेकन इस कार्यक्रम का महत्‍वपूर्ण केंद्रबिंदु है। राष्‍ट्रीय गलियारा की क्षमता बढ़ाने के लिए कुल लगभग 53,000 किलोमीटर के राष्‍ट्रीय राजमार्गों को चिन्हित किया गया है जिसमें से 24,800 किलोमीटर का कार्य पहले चरण में किया जाएगा। यह कार्य 5 वर्ष की अवधि में यानि 2017-18 से 2021-22 तक चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जाएगा।

इनमें 5000 किलोमीटर के राष्‍ट्रीय गलियारे, 9000 किलोमीटर के आर्थिक गलियारे, 6000 किलोमीटर के फीडर कॉरीडोर और इंटर कॉरीडोर, 2000 किलोमीटर की सीमा सड़क, 2000 किलोमीटर की तटीय सड़क और बंदरगाह संपर्क सड़क और 800 किलोमीटर के ग्रीन फील्‍ड एक्‍सप्रेसवे शामिल हैं। भारतमाला के पहले चरण के लिए कुल लगभग 5,35000 करोड़ रूपये के कोष का प्रावधान है। भारतमाला परियोजना देश के आर्थिक विकास के लिए प्रमुख संचालक है। अनुमान है कि इस कार्यक्रम के पहले चरण के तहत कार्यदिवस में 35 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।

  चेनानी नाशरी सुरंग 

जम्‍मू और कश्‍मीर में उधमपुर तथा रामबन के बीच दो ट्यूब वाली सभी मौसम के अनुकूल 9 किलोमीटर लंबी सुरंग सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ पहल का आदर्श उदाहरण है। यह सुरंग न केवल देश की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है बल्कि एशिया की सबसे लंबी दोनों दिशाओं में परिवहन की राजमार्ग सुरंग है। हिमालय के सबसे कठिन क्षेत्रों में 1200 मीटर की ऊंचाई पर बनी इस सुरंग के 41 किलोमीटर लंबी सड़क के बाईपास होने से जम्‍मू और श्रीनगर के बीच की यात्रा का समय 2 घंटे कम हो गया है।


इस मार्ग पर किसी भी मौसम में यात्रा की जा सकती है,जहां पहले अक्‍सर भूस्‍खलन, बर्फ, संकरे मोड़ और वाहनों के खराब होने तथा दुर्घटना के कारण ट्रेफिक जाम की समस्‍या रहती थी। इस सुरंग का निर्माण लगभग 3,720 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है और यह जम्‍मू-श्रीनगर राष्‍ट्रीय राजमार्ग के चार लेन की 286 किलोमीटर लंबी परियोजना का हिस्‍सा है।

धोला सादिया पुल

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 मई, 2017 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे 9.15 किलोमीटर धोला सादिया पुल का उद्घाटन किया था। इस पुल से ऊपरी असम और अरूणाचल प्रदेश के उत्‍तरी भाग के बीच 24 घंटे सातों दिन संपर्क सुनिश्चित हुआ है। इससे पहले यहां नौकाओं के जरिए ही केवल दिन में ही यात्रा की जाती थी और यह मार्ग भी बाढ़ के दौरान बंद हो जाता था।

इससे दोनों राज्‍यों के बीच दूरी और यात्रा का समय  काफी कम हो गया है। असम में एनएच-37 पर रूपाई से अरूणाचल प्रदेश में एनएच-52 पर मेका/रोइंग के बीच की दूरी 165 किलोमीटर कम हुई है। दोनों स्‍थानों के बीच की यात्रा का समय 6 घंटे के स्‍थान पर 1 घंटे का हो गया है यानि कुल 5 घंटे का समय बचता है।

भरूच में नर्मदा नदी पर एक्‍स्‍ट्रा-डोज्ड ब्रिज

9 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री द्वारा भरूच में नर्मदा नदी पर चार लेन के नए एक्‍स्‍ट्रा-डोज्‍ड ब्रिज का उद्घाटन किया गया था। इससे एनएच-8 के वडोदरा, सूरत खंड पर यात्रा करने वाले लोगों को काफी राहत मिली है।

1.4 किलोमीटर के ‘एक्‍स्‍ट्रा-डोज्‍ड’ केबल पर आधारित यह पुल देश में सबसे लंबा और हुगली में निवेदिता सेतु के बाद देश का दूसरा ऐसा पुल है।

 कोटा में चंबल नदी पर पुल

29 अगस्‍त, 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोटा में चंबल नदी पर 6 लेन के केबल आधारित पुल का उद्घाटन किया था।

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2778 करोड़ रूपये की लागत से बने इस पुल से पूर्व-पश्चिम कॉरीडोर का निर्माण कार्य संपन्‍न  हो गया है।

कार्यान्वित किए जा रहे महत्‍वपूर्ण कार्यक्रमों/परियोजनाओं की स्थिति/प्रगति

 

चारधाम महामार्ग विकास परियोजना

इस परियोजना का उद्देश्‍य उत्‍तराखंड के प्रमुख चारधामों यानि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ तक सुगम पहुंच विकसित करना। ये चारों धाम प्रमुख धार्मिक केंद्र है। इस परियोजना के तहत अनुमानित लगभग 1200 करोड़ रूपये की लागत से दो लेन की 889 किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया जाएगा।

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अब तक 24 कार्य दिवसों के लिए 395 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए आवंटन किया गया है। 340 किलोमीटर के सड़क निर्माण के लिए 22 कार्य दिवस का आवंटित किया गया है। इस परियोजना को मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है।

ईस्‍टर्न पेरीफेरल एक्‍सप्रेसवे-वेस्‍टर्न पेरीफेरल एक्‍सप्रेसवे     

एनएच-1 (कुंडली के नजदीक) से शुरू होकर एनएच-2 (पलवल के नजदीक) समाप्‍त होने वाले ईस्‍टर्न पेरीफेरल (पूर्वी परिधीय) एक्‍सप्रेसवे (ईपीई) और वेस्‍टर्न पेरीफेरल (पश्चिमी परिधीय) एक्‍सप्रेसवे (डब्‍ल्‍यूपीई) की दिल्‍ली के आसपास की पेरीफेरल एक्‍सप्रेसवे परियोजना का उद्देश्‍य दिल्‍ली को बाईपास कर यहां की भीड़भाड़ को कम करना और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण के स्‍तर को कम करना है। ईपीई भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा जबकि डब्‍ल्‍यूपीई हरियाणा सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है। इनमें से प्रत्‍येक एक्‍सप्रेसवे 135 किलोमीटर लंबा है और ये दिल्‍ली के लिए 270 किलोमीटर के बाहरी मुद्रिका सड़क से मिलती हैं। ये पेरीफेरल एक्‍सप्रेसवे पहुंच नियंत्रित 6 लेन की सड़कें होंगी। 6 पैकेज में किया जा रहा कार्य मार्च 2018 से पहले संपन्‍न हो जाएगा।

 दिल्‍ली मेरठ एक्‍स्‍प्रेसवे

दिल्‍ली मेरठ एक्‍स्‍प्रेसवे (डीएमई) का उद्देश्‍य दोनों शहरों के बीच त्‍वरित संपर्क उपलब्‍ध कराना है। डीएमई दिल्‍ली के निजामुद्दीन पुल से शुरू होकर मौजूदा एनएच-24 से होकर डासना तक है। डीएमई का एक भाग एनएच-24 पर डासना से हापुड़ तक जायेगा जबकि डासना से मेरठ तक हरित पट्टी की योजना है।

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14 लेन के 8.7 किलोमीटर का निर्माण कार्य इसकी निर्धारित समापन अवधी 30 महीने की तुलना में लगभग 15 महीने के रिकॉर्ड समय में ही पूरा किया जा रहा है। निजामुद्दीन पुल से उत्‍तर प्रदेश सीमा तक की दूरी में 14 लेन के प्रावधान के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के कई उपाय किये गये हैं। इनमें राजमार्ग के दोनों ओर 2.5 मीटर चौड़ा साइकिल ट्रैक, यमुना के पुल पर बगीचा, सौर बिजली प्रणाली और ड्रीप सिंचाई के जरिये पौधों को पानी देना शामिल हैं।

वडोदरा-मुंबई एक्‍स्‍प्रेसवे

473किलोमीटर का वडोदरा-मुंबई एक्‍स्‍प्रेसवे अहमदाबाद-वडोदरा एक्‍स्‍प्रेसवे को मुंबई-पुणे एक्‍स्‍प्रेसवे से जोड़ेगा और इससे लगभग 650 किलोमीटर तक अहमदाबाद और पुणे के बीच एक्‍स्‍प्रेसवे संपर्क उपलब्‍ध होगा।

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यह परियोजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी। पहले और दूसरे चरण के लिये भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी आदि ली जा चुकी हैं। प्रथम चरण के पहले पैकेज के लिये निविदा बोलियां भी आमंत्रित की गई हैं।

बंगलोर-चेन्‍नई एक्‍स्‍प्रेसवे (262 किलोमीटर)

बंगलोर-चेन्‍नई एक्‍स्‍प्रेसवे हरित पट्टी सड़क मार्ग है जो बंद टोल प्रणाली द्वारा संचालित होगा। बंगलोर-चेन्‍नई को जोड़ती हुई दो सड़कें हैं, जिनमें से एक होसकोट (बंगलोर)- आंध्र प्रदेश से होकर चेन्‍नई और दूसरी इलेक्‍ट्रॉनिक शहर (बंगलोर) से होकर होसूर (तमिलनाडु) और फिर चेन्‍नई तक है। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और निर्माण पूर्व अन्‍य गतिविधियों पर कार्य चल रहा है।

  बायेट द्वारका –ओखा पुल  

मंत्रालय ने ओखा के मैदान क्षेत्र को गुजरात के तटीय बायेट-द्वारका द्वीप से जोड़ने के लिए चार लेन के महत्‍वपूर्ण पुल का निर्माण शुरू किया है। इस पुल की लंबाई 2.32 किलोमीटर होगी।

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यह परियोजना 1 जनवरी, 2018 को 689.47 करेाड़ रूपये की लागत से आवंटित की गई थी। यह 500 मीटर का देश का सबसे लंबा केबल आधारित पुल होगा। यह परियोजना 3 महीनों में पूरी की जाएगी।

 भारतमाला परियोजना के पहले चरण के तहत नए एक्‍सप्रेसवे कीयोजना

(i) दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे

(ii) दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे

(iii) वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे

(iv) हैदराबाद- विजयवाड़ा- अमरावती (एचवीए) एक्सप्रेसवे

(v) नागपुर-हैदराबाद-बैंगलोर (एनबीएच) एक्सप्रेसवे

(vi) कानपुर लखनऊ (केएल) एक्सप्रेसवे

(vii) अमरावती में रिंग रोड/एक्सप्रेसवे

 भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) 

मंत्रालय ने पुलों और राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर बने निर्माण जैसी बनी सभी संरचनाओं की सुविधा के लिए भारतीय पुल 3-5-300x240.jpgप्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) की नई पहल की है। सलाहकारों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और राष्‍ट्रीय राजमार्गों के मौजूदा पुलों की स्थ्‍िाति का आकंलन भी कर लिया गया है। कुल 147 पुलों के तुरंत जीर्णोंद्धार या नए बनाने के लिए चिन्हित किया गया है।

 सेतु भारतम

सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने सेतु भारतम योजना के तहत आरओबी/ आरयूबी द्वारा राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लेवल क्रॉसिंग को बदलने की योजना बनाई है।s2016030477983.jpg

इस कार्यक्रम के तहत एनएचडीपी जैसे अन्‍य कार्यक्रमों के बाहर के लेवल क्रॉसिंग पर 20800 करोड़ रूपये अनुमानित लागत से 208 आरओबी/आरयूबी का निर्माण किया जाएगा।

  राष्‍ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए वित्‍तीय मॉडल और अन्‍य नीतियां

 लंबित पड़ी परियोजनाओं को शुरू करने के उपाय

मंत्रालय ने आवंटन और नई परियोजनाओं के साथ चल रही परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्‍यान केंद्रित किया है। 1,00000 करोड़ रूपये के अनुमानित निवेश की कुल 73 परियोजनाओं (8187 किलोमीटर) को बंद पड़ी या लंबित परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया गया है। देरी के कारणों का पता लगाया गया है और इसके निराकरण के लिए नीति बनाई गई है। इनमें (क) एक बार कोष देने की योजना (ओटीएफआईएस) जिसमें एनएचएआई द्वारा ठेकेदार//रियायत पाने वाले को कार्यकारी पूंजी ऋण के रूप में वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है, (ख) तर्कसंगत मुआवजा जिसमें बीओटी (वार्षिकी) परियोजनाओं में रियायत पाने वाले को देरी की वजह से होने वाले वार्षिक भत्‍ते के बराबर एक बार मुआवजा देना (ग) रियायत अवधि का विस्‍तार शामिल हैं।

 टोल संचालित हस्‍तांतरण (टीओटी)  

मंत्रालय टोल संचालित हस्‍तांतरण (टीओटी) योजना के जरिए सार्वजनिक कोष से अपनी सड़क संपत्तियों का निर्माण कर रहा है। इस योजना के तहत 30 वर्ष की रियायती अवधि के लिए राष्‍ट्रीय राजमार्गों के लिए बोलियां लगाई जा रही है। 9 राष्‍ट्रीय राजमार्गों के लिए पहली बोली आमंत्रित की गई है जिसे 9 जनवरी, 2018 तक प्राप्‍त की जाएगी।

मसाला बांड्स 

एनएचएआई ने कोष बढ़ाने के लिए मई 2017 में लंदन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में मसाला बांड्स जारी किए। काफी निवेशकों ने इन बांडों के प्रति रूचि प्रदर्शित की।

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एनएचएआई के मसाला बांड को वर्ष 2017 के सर्वोत्‍तम बांड के रूप में दर्ज किया गया है।

बहुआयामी परिवहन प्रणाली की योजना

3 से 5 मई, 2017 तक नई दिल्‍ली में भारत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्‍स सम्‍मेलन का आयोजना किया गया था। इसमें भारत और विदेश  के लगभग 3000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था जिनमें केंद्र और राज्‍य सरकारों के संगठन तथा विश्‍व बैंक और एशिया विकास बैंक (एडीबी) जैसे  अंतर्राष्‍ट्रीय संगठन शामिल थे।

सम्‍मेलन के अंत में लगभग 2,00000 करोड़ रूपये के 34 एमओयू किए गए।

 विकेंद्रीयकरण और प्रशासनिक उपाय

  • एनएचएआई बोर्ड को परियोजनाओं विशेष रूप से ईसीपी और सभी पीपीपी (बीओटी) परियोजनाओं के लिए मंजूरी देने के अधिकार बढ़ाये गए। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
  •  विभिन्‍न प्रक्रियाओं को व्‍यवस्थित करने के उद्देश्‍य से राज्‍य पीडब्‍ल्‍यूडी और मंत्रालय के कुछ फील्‍ड अधिकारियों के जरिए राष्‍ट्रीय राजमार्गों की परियोजनाओं की कार्यान्‍वयन की मंजूरी और आवंटन के अधिकार देना।

   सड़क सुरक्षा

सड़क दुर्घटनाओं व मृतकों की संख्या में कमी:

मंत्रालय सड़क हादसों में कमी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए बहु-आयामी प्रयास की आवश्यकता है जैसे वाहन सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना, सड़क संरचना को बेहतर बनाना, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, कार्यान्वयन को मजबूत करना तथा आकस्मिक आघात देखभाल कार्यक्रम को सुसंगत बनाना।

मंत्रालय के ठोस प्रयासों से सड़क हादसों की संख्या में कमी आई है। भारत में सड़क दुर्घटनाएं- 2016 रिपोर्ट के अनुसार 2016 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 4.1 प्रतिशत की कमी आई है। सितंबर, 2017 तक सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 5.2 प्रतिशत तथा मृतकों की संख्या में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। असम, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त सभी राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में 2 से 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

 दुर्घटना रिपोर्ट का नया प्रारूप:

एक मजबूत सड़क सुरक्षा कार्रवाई योजना के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस की आवश्यकता है। इसलिए रिपोर्ट करने के वर्तमान स्वरूप को विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर संशोधित किया गया है। इस विशेषज्ञ समिति में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, विश्व स्वास्थ्य संगठन, पुलिस और परिवहन विभागों तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दुर्घटना रिपोर्ट के नये प्रारूप को सभी राज्यों ने अपनाया है। नया प्रारूप आने वाले वर्षों में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण जोखिम वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।

 ब्लैक स्पॉटों का सुधार

मंत्रालय ने अब तक 789 दुर्घटना जोखिम वाले ब्‍लैक स्‍पॉटों की पहचान की है। इनमें से 189 ब्‍लैक स्‍पॉट का सुधार किया जा चुका है और 256 ब्‍लैक स्‍पॉटों के सुधार के लिए निविदा प्रक्रिया विभिन्‍न चरणों में है।

वाहन चालकों का प्रशिक्षण

मंत्रालय राज्‍यों, वाहन निर्माताओं और स्‍वयंसेवी संगठनों के साथ वाहन चालकों के प्रशिक्षण के लिए कार्य कर रहा है। विभिन्‍न राज्‍यों में वाहन चालन प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्‍थानों की स्‍थापना की गई है जो मॉडल केन्‍द्र के रूप में कार्य करेंगे। मंत्रालय की योजना देश के सभी जिलों में वाहन चालक प्रशिक्षण केन्‍द्र खोलने की है।

 वाहनों की योग्‍यता जांच के लिए मॉडल स्‍वचालित केन्‍द्र

मंत्रालय ने व्‍यावसायिक वाहनों की जांच तथा प्रमाणन के लिए 20 केन्‍द्रों की मंजूरी दी है। यह केन्‍द्र स्‍वचालित प्रक्रिया के तहत कार्य करेंगे। ऐसे 6 केन्‍द्र अभी संचालन में हैं।

वाहनों की सुरक्षा के लिए नए कदम

i.     दुपहिया वाहन : दुर्घटनाओं के बड़े हिस्‍से का कारण दुपहिया वाहन है। इसकी मुख्‍य वजह दुपहिया वाहनों का फिसलना है। दुपहिया चालकों के अमूल्‍य जीवन को सुरक्षित रखने के लिए 1 अप्रैल 2019 से सभी दुपहिया वाहनों में एंटी लॉक ब्रेकिंग प्रणाली (एबीएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे दुपहिया चालकों की सुरक्षा बेहतर होगी।

ii.     कारसभी यात्री कारों में सुरक्षा और स्थिरता बेहतर करने के लिए एबीएस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। कार निर्माताओं को कार में अतिरिक्‍त सुरक्षा प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है जो 1 जुलाई 2019 से प्रभावी होगी। इसके अंतर्गत एयर बैग, गति चेतावनी (ऑडियो अलर्ट), सीट बैल्‍ट (ऑडियो अलर्ट) शामिल हैं।

निशुल्‍क नेत्र जांच शिविर

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई ने पूरे देश में नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया है। 2 अक्‍टूबर 2017 को नागपुर बाईपास के पंजरी टोल प्‍लाजा में ट्रक चालकों, क्लिनरों और सहायकों के बीच चश्‍मों का वितरण किया गया। राष्‍ट्रीय राजगार्मों पर 50 नेत्र जांच शिविर लगाये गये। 5000 से अधिक वाहन चालकों ने नेत्र जांच के लिए पंजीकरण कराया और 3000 से अधिक चश्‍मे वितरित किये गये।

 यात्री की सुरक्षा और संरक्षा

यात्रियों विशेषकर महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा व संरक्षा के लिए सभी व्‍यावसायिक बसों और टेक्सियों में जीपीएस उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

मोटर वाहन संशोधन बिल 2017

मंत्रालय ने सड़क हादसों की संख्‍या में कमी लाने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया था। मंत्रीसमूह की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय ने 9 अगस्‍त 2016 को लोक सभा में मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2016 प्रस्‍तुत किया।  अधिनियम में अधिक जुर्माने, लाइसेंस और योग्‍यता प्रमाण पत्र को बेहतर बनाने, मदद करने वालों को सुरक्षा प्रदान करने आदि का प्रावधान है। अधिनियम में दुर्घटना के पहले 1 घंटे (गोल्‍डन ऑवर) के दौरान दुर्घटना ग्रस्‍त व्‍यक्ति के इलाज का प्रावधान है, जो अमूल्‍य जीवन को बचाने में मदद करेगा।

 हरित पहलें

 एनएचएआई में हरित राजमार्ग विभाग

राष्‍ट्रीय राजमार्गों को हरित, स्‍वच्‍छ और प्रदूषण मुक्‍त बनाने के लिए एनएचएआई ने एक हरित राजमार्ग विभाग का गठन किया है। पिछले वर्ष राजमार्गों  के किनारे 2.5 लाख पेड लगाये गये।

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राजमार्गों के निर्माण और सूखा प्रभावित इलाकों में जलाशयों के निर्माण को परस्‍पर जोड़ना

राजमार्गों के निर्माण के लिए मिट्टी का क्रय जमीन मालिकों से किया जाता है। देश के कई इलाके सूखा प्रभावित क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए जलाशयों, चैक डैमों, तालाबों आदि का निर्माण एक पारंपरिक पद्धति है। मंत्रालय ने राजमार्ग निर्माण में लगी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे सूखा प्रभावित इलाकों की पहचान करें और संबंधित जिला अधिकारी / जलसंरक्षण विभाग से ऐसे गांवों की सूची प्राप्‍त करें जहां तालाब, जलाशय, चैक डैम का निर्माण किया जाना है। इसमें पुराने जलाशयों से गाद निकालने का काम भी शामिल है। इस व्‍यवस्‍था से जलाशयों के निर्माण / पुनरूद्धार में मदद मिलेगी और एजेंसियों को निशुल्‍क मि‍ट्टी प्राप्‍त होगी।

पुल सह बैराज

मंत्रालय ने राजमार्गों पर पुल सह बैराज बनाने के लिए राज्‍य लोक निर्माण विभागों से प्रस्‍ताव आमंत्रित किये हैं। इससे दो लाभ होंगे, पहला जलाशय को पार करने  के लिए मार्ग का निर्माण होगा और दूसरा ऊपरी / निम्‍न जलप्रवाह पर बैराज बनने से यह जलाशय के रूप में कार्य करेगा। इससे विभिन्‍न उदेश्‍यों के लिए जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

स्‍वच्‍छता पखवाडा

स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत 16 से 31 जुलाई 2017 तक स्‍वच्‍छता पखवाडा मनाया गया। इसके अंतर्गत शौचालयों का निर्माण किया गया, राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर अस्‍थायी शौचालय और पेय जल व्‍यवस्‍था की गई और 371 टॉल प्‍लाजा पर कूडेदान लगाये गये।

वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए उठाये गये कदम

i.  वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए ट्रेक्‍टरों और विनिर्माण मशीन वाहनों में सल्‍फर की कम मात्रा वाले ईंधन के इस्‍तेमाल के लिए उत्सर्जन नियम बनाये गये हैं जो 1 अक्‍टूबर 2020 से प्रभावी होंगे।

ii.  मंत्रालय ने वाहनों में वैकल्पिक ईंधन के प्रयोग की पहल की है। बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बसों, टैक्सियों और ई-रिक्‍शा के लिए नागपुर में विद्युत वाहन परियोजना लॉच की गई है।

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iii.  पैरों से चलाये जाने वाले रिक्‍शे के स्‍थान पर ई-रिक्‍शा का उपयोग बेहतर है क्‍योंकि यह सस्‍ता व पर्यावरण अनुकूल है। इसे परमिट लेने की आवश्‍यकता से छूट दी गई है। मैट्रो यात्रियों को अंतिम सिरे तक कनेक्टिवि‍टी प्रदान करने के लिए हरियाणा के गुरू ग्राम में 1000 ई-रिक्‍शा लॉच किये गये।

 ई- पहलें

परियोजना निगरानी सूचना प्रणाली (पीएमआईएस)

सभी परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने, रिपोर्ट बनाने और महत्‍वपूर्ण दस्‍तावेजों को अपलोड करने के लिए एक प्रभावी परियोजना निगरानी सूचना प्रणाली (पीएमआईएस) लागू की गई है।

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इनाम – प्रो + लॉच किया गया

इनाम प्रो का उन्‍नत रूप इनाम – प्रो + 1 जून 2017 को लॉच किया गया। पिछले 2 वर्षों में 700 विनिर्माण कंपनियां इसमें पंजीकृत हुई हैं। 37 सीमेंट कंपनियां पंजीकृत हैं। इससे मूल्‍य की तुलना करना, माल की उपलब्‍धता आदि की जानकारी प्राप्त करना सुविधाजनक हो गया है। इनाम – प्रो + की सहायता से प्रस्‍तावों की तैयारी करने में समय और श्रम की बचत होगी तथा कार्य कुशलता तथा पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

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इस पोर्टल के माध्‍यम से एक उपयोगकर्ता क्रय आदेश दे सकता है तथा मूल्‍यों की जांच और निगरानी कर सकता है।

 भूमि राशि, भूमि अधिग्रहण के लिए वेब यूटीलिटी

संपूर्ण ई-गवर्नेंस और विलम्‍ब खत्‍म करने के लिए मंत्रालय ने गजट अधिसूचना सहित जमीन अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए एक वेब यूटीलिटी विकसित किया है। इस वेब यूटीलिटी को जमीन अधिग्रहण से संबंधित गजट अधिसूचना के ई-प्रकाशन के लिए शहरी विकास मंत्रालय के ई-गजट प्‍लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। प्रभावित और रूचि रखने वाले पक्षों को सिस्‍टम एक्‍सेस करने लायक बनाया जाएगा ताकि प्रभावित और रूचि व्‍यक्‍त करने वाले पक्ष अधिग्रहित जमीन की स्थिति देख सके। विभिन्‍न राज्‍यों में सीएएलए को प्रभावित/रूचि व्‍यक्‍त करने वालों के खातों में मुआवजे की रकम जमा करने के लिए सहमत किया जा रहा है।

 ई-टोलिंग

(i) हाईब्रिड ईटीसी प्रणाली लागू करना

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का अग्रणी कार्यक्रम इलेक्‍ट्रॉनिक टोल कलेक्‍शन (ईटीसी) प्रणाली संपूर्ण भारत में लागू की गई है ताकि बाधाएं दूर की जा सके और निर्बाध आवाजाही तथा पैसिव रेडियो फिक्‍वेंसी आइडेटिफिकेशन (आरएफआईडी) टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए अधिसूचित दूरों के अनुसार यूजर फीस सुनिश्चित किया जा सके। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ईटीसी लागू करने की एजेंसी के रूप में बनाई गई है। राष्‍ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) केन्‍द्रीय क्लियरिंग हाऊस (सीसीएच) के रूप में काम कर रहा है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों सहित 11 बैंकों को उपायोगकर्ताओं को फास्‍ट टैग जा‍री करने के काम में लगाया गया है। चालकों को फास्‍ट टैग के उपयोग के बारे में संवेदी बनाने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 7.5 प्रतिशत का कैशबैक ऑफर दिया जा रहा है। यूजर फीस भुगतान के लिए अन्‍य इलेक्‍ट्रॉनिक उपाए किए गए हैं। इनमें पीओएस मशीनें शामिल हैं ताकि क्रेडिट/डेबिट कार्ड के जरिए और प्रीपेड पेमेंट इंस्‍टुमेंट से यूजर फीस संग्रह किया जा सके।

1-12-2017 तक चालकों द्वारा कुल 7.7 लाख फास्‍ट टैग इकाइयों का उपयोग किया गया है। फास्‍ट टैग से वसूली गई यूजर फीस में काफी वृद्धि हुई है। जनवरी 2017 में 11.2 प्रतिशत गहराई के साथ 179.1 करोड़ से बढ़कर गहराई 2017 में 18.5 प्रतिशत गहराई के साथ 285.3 करोड़ रुपये हो गई।

अन्‍य पहलें

(a) फास्‍ट टैग उपयोगकर्ताओं को दी जा रही सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए फीस प्‍लाजा की सभी लेनों को हाईब्रिड लेनों में बदला जा रहा है और दोनों तरफ फास्‍ट टैग उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से समर्पित लेन होगी। यह काम 31-3-2018 तक पूरा होगा।

(b) 1 दिसम्‍बर 2017 के बाद से बिके एम और एन श्रेणी के सभी नए वाहनों पर वाहन निर्माता या अधिकृत डीलर द्वारा फास्‍ट टैग चिपकाया जाएगा ताकि इसकी गहराई बढ़ाई जा सके और चालकों में फास्‍ट टैग का उपयोग बढ़े।

परिवहन एमएमपी : एक सफल और महत्‍वाकांक्षी ई-गवर्नेंस परियोजना

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चलाई गई परिवहन मिशन मोड परियोजना ने सफलतापूर्वक आरटीओ कार्यों को स्‍वचालित कर दिया है, एक राष्‍ट्र व्‍यापी परिवाहन बेस बनाया है तथा नागरिक और व्‍यापार केन्द्रित अनेक एप्‍लीकेशन लांच किए हैं। इससे डिजिटल भारत कार्यक्रम के अंतर्गत ई-गवर्नेंस कार्यक्रम में योगदान होगा। इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं निम्‍नलिखित हैं:

v  परिवहन मिशन मोड परियोजना के अंतर्गत दो अग्रणी एप्‍लीकेशन- वाहन तथा सारथी बनाए गए हैं। वाहन एप्‍लीकेशन वाहनों के पंजीकरण, टैक्‍सेशन, परमिट, फिटनेस और संबंधित सेवाओं के लिए है जबकि सारथी एप्‍लीकेशन ड्राइविंग लाइसेंस, लर्नर लाइसेंस, ड्राइविंग स्‍कूलों तथा संबंधित गतिविधियों के लिए है।

v  राज्‍य विशेष नियमों, टैक्‍स ढांचे के साथ 33 राज्‍यों में 1000 से अधिक आरटीओ में लागू।

v  प्रमुख यूजर-आरटीओ, सरकार, पुलिस, बैंक, बीमा, नागरिक, वाहन निर्माता, डीलर।

v  राष्‍ट्रीय रजिस्‍टर में 19 करोड़ से अधिक वाहन और 10 करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस का रिकॉर्ड।

v  सरकारी ऐजेंसियों, सुरक्षा बलों, बैं‍कों तथा बीमा को पोर्टल/एपीआई आधारित डाटा एक्‍सेस प्रदान करना।

v  पोर्टल/एसएमएस/मोबाइल एप के जरिए नागरिकों को वाहन और लाइसेंस खोज विकल्‍प।

v  राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तरों पर अनेक जी-बी तथा जी-सी एप्‍लीकेशन लागू।

v  ऑनलाइन राष्‍ट्रीय परमिट पोर्टल के माध्‍यम से सामान ढोने वाले वाहनों को 50 लाख से अधिक राष्‍ट्रीय परमिट जारी।

v  निर्माताओं के लिए आदर्श प्रमाणीकरण और इंवेंट्री प्रबंधन के लिए होमोलोगेशन (स्‍वीकृति) पोर्टल।

v  राज्‍यों द्वारा ऑनलाइन 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्‍स संग्रह।

नई पहलें

v  वर्तमान वितरण की जगह केन्‍द्रीयकृत सारथी संस्‍करण 4  (ऑनलाइन सेवाओं से पूरी तरह एकीकृत) लांच।

v  एनआईसी क्‍लाउड के अंतर्गत बहु तैनाती, उच्‍च सुरक्षा, उपलब्‍धता तथा डाटा अखण्‍डता।

v  नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाना, आरटीओ आने-जाने में कमी/समाप्ति, पारदर्शिता बढ़ाना।

v  15 राज्‍यों में 600 से अधिक आरटीओ नई प्रणाली के अंतर्गत। शेष राज्‍य के आरटीओ शीघ्र ही नई प्रणाली अपनाएंगे।

v  विविध पेमेंट गेटवे से एकीकृत, आईआरडीए, एनसीआरबी, सीएससी, एसएमएस, ओपन एपीआई।

v  बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा ईकेवाईसी के लिए आधार के साथ एकीकृत। डिजि लॉकर के साथ एकीकरण।

v   डैशबोर्ड, स्‍मार्ट कार्ड, डाक्‍यूमेंट अपलोड, ऑनलाइन शेड्यूलिंग, कनफिगूरेबल वर्कफ्लो जैसी विशेषताएं।

v  वाहन निर्माता की इंवेंट्री से जुड़ा ऑनलाइन डीलर प्‍वाइंट एप्‍लीकेशन।

v  ई-नीलामी तथा ई-निविदा के साथ ऑनलाइन फैंसी नंबर आवेदन।

v  लाइसेसिंग, टैक्‍स भुगतान, लेन-देन से संबंधित सम्‍पूर्ण ऑलाइन सेवाएं।

v  अग्रिम सुरक्षा विकल्‍प के साथ लर्नर लाइसेंस के लिए प्रणाली आधारित बहुभाषी ज्ञान परीक्षा।

v  मोबाइल एप, ई-चालान तथा एम-परिवहन व्‍यापक प्रत्‍यावर्तन समाधान के लिए विकसित।

v  नवीनतम विशेषताओं तथा राज्‍य विशेष विकल्‍पों के साथ सहज लागत प्रभावी तथा व्‍यावहारिक समाधान।

v  परिवहन तथा ट्रैफिक पुलिस द्वारा विविध राज्‍यों में ई-चालान लांच किया जा रहा है।

v  एम परिवहन एप नागरिकों की सूचना और व्‍यापक सेवाओं के लिए।

v  प्रमुख विशेषताओं में ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाण पत्र, परमिट जैसे वर्चुअल दस्‍तावेज अधिकृत सॉफ्ट कॉपी के रूप में।

v  साधारण दस्‍तावेज/कॉर्ड के स्‍थान पर वर्चुअल डीएल/आरसी जिस पर प्रमाणीकरण के लिए क्‍यूआर कोड दर्ज।

v  नागरिकों की सुविधा के लिए परिवहन क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार का विजन।

अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारी

भारत और नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन

भारत और नेपाल का बीच अगस्त 2017 में 1,58.65 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत भारत-नेपाल सीमा पर मेची नदी के ऊपर एक नए पुल के निर्माण के खर्चे, कार्यक्रम और सुरक्षा मुद्दों पर एक कार्यान्वयन व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी । एशियाई विकास बैंक से ऋण के माध्यम से भारत सरकार इसे वित्त पोषित करेगी। 1500 मीटर लंबा नया पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 327बी पानी टंकी बाईपास (भारत) ककारविट्टा (नेपाल) का हिस्सा है जिसमें 6-लेन वाली 825 मीटर लंबी सड़क भी शामिल है। मेची पुल एशियाई राजमार्ग संख्या 02 का भारत में आखिरी बिंदु है जोकि नेपाल की ओर जाता है और नेपाल को महत्वपूर्ण संपर्क उपलब्ध कराता है।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के समझौता ज्ञापन

सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2017 में भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर अबुधाबी के राजकुमार के भारत दौरे के दौरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। समझौते में भारत और यूएई के बीच आपसी सहयोग और आदान प्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास करना है ताकि ढांचा विकास और लॉजिस्टिक कुशलता के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिले। दोनो पक्षों के बीच समझौते के अनुसार एक संयुक्त कार्यदल का गठन कर दिया गया है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच मोटर वाहन समझौता

भारत और अफगानिस्तान के बीच यात्री, निजी और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के नियमन के लिए सितंबर 2017 में एक समझौता हुआ ताकि सड़क मार्ग के जरिए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा दिया सके। साथ ही सीमा पार सड़क परिवहन के जरिए भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को प्रोत्साहित किया जा सके।

आईएमटी फ्रेंडशिप मोटर रैली-II, 2017

भारत-म्यामार-थाइलैंड फ्रेडशिप मोटर रैली-II 2017 का गुवाहटी से बैंकॉक के बीच आयोजन हुआ। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस रैली का आयोजन कलिंगा मोटर स्पोर्ट्स क्लब भुवनेश्वर और महिंद्रा एडवेंचर मुंबई के सहयोग से किया।

 अन्य

सड़क के किनारे सुविधाएं

भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सुविधाओं में वृद्दि के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने इसके लिए 183 स्थानों पर भूमि का अधिग्रहण भी कर लिया है और निजी क्षेत्र को भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है।

लाल बत्ती

देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आपात सेवाओ और राहत सेवाओं आदि से संबद्ध को छोड़कर सभी प्रकार के वाहनों के ऊपर सभी लाल बत्तियों को हटाने का आदेश अधिसूचित कर दिया।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को जांचने के उपाय के लिए पहल

निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली के चारों ओर राजमार्ग परियोजनाओं पर काम करने वाले परियोजना निदेशकों, ठेकेदारों और क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत सभी निर्माण स्थलों और शिविरों में पानी के छिड़काव, कचरे को ढकना, डंपरों को कवर करना, साइटों पर पड़ी हुई मिट्टी को ढकना जैसे उपाय किए गए है।  संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रदूषण नियंत्रण उपायों का पालन हो रहा है।

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वर्ष 2017 के दौरान पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियां

                    वर्षांत समीक्षा-2017 पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

समुद्र विकास विभाग(डीओडी) का गठन जुलाई 1981 में प्रधानमंत्री के सीधे नियंत्रण वाले कैबिनेट सचिवालय के एक प्रभाग के रूप में किया गया, जो मार्च 1982 में एक पृथक विभाग के रूप में अस्तित्‍व में आया। पूर्ववर्ती समुद्र विकास विभाग ने देश में समुद्र विकास के कार्यक्रमों के आयोजन, संयोजन और प्रोत्‍साहन के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य किया। फरवरी 2006 में सरकार ने विभाग को समुद्र विकास मंत्रालय के रूप में अधिसूचित किया।

राष्‍ट्रपति कार्यालय की अधिसूचना दिनांक 12 जुलाई, 2006 के अन्‍तर्गत पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय का गठन हुआ। इस मंत्रालय के प्रशासन के अन्‍तर्गत भारतीय मौसम विज्ञान विभाग(आईएमडी), भारतीय उष्‍णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्‍थान(आईआईटीएम) तथा राष्‍ट्रीय मध्‍यम क्षेत्र मौसम पूर्वानुमान केन्‍द्र(एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ) लाये गए। अंतरिक्ष आयोग और परमाणु ऊर्जा आयोग के समान पृथ्‍वी आयोग का भी गठन किया गया।

अहमदाबाद में वायु गुणवत्‍ता और मौसम निगरानी स्‍टेशन

केन्‍द्रीय विज्ञान और तकनीकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 12 मई, 2017 को अहमदाबाद में वायु की गुणवत्‍ता और मौसम पूर्वानुमान व अनुसंधान(एसएएफएआर-सफर) आधारित एकीकृत चेतावनी प्रणाली राष्‍ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही अहमदाबाद नगर निगम द्वारा लॉंच की गई अहमदाबाद एआईआर(वायु से संबंधित जानकारी तथा प्रतिक्रिया) कार्यक्रम को सफर के साथ जोड़ा गया।

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ओपन सी केज क्‍लचर:

केन्‍द्रीय विज्ञान व तकनीकी और पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍यमंत्री श्री वाई एस चौधरी ने 8 अप्रैल, 2017 को नेल्‍लौर में समुद्री फिनफिश हेचरी और कठोर जल शोधन तकनीक के लिए परीक्षण केन्‍द्र की आधारशिला रखी। मंत्रालय की स्‍वायत्‍त संस्‍था राष्‍ट्रीय समुद्र प्रोद्योगिकी संस्‍थान इन सुविधाओं को और विकसित करेगी।

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पुदुचेरी समुद्र तट की पुन:स्‍थापना:

पुदुचेरी और निकटवर्ती तमिलनाडु के समुद्र तट का प्राकृतिक आपदाओं तथा मानव की गतिविधियों के कारण अत्‍यधिक क्षरण हुआ है। पुदुचेरी सरकार ने समुद्री दीवार व खुले क्षेत्र जैसे अल्‍पावधि उपाय किए, परंतु यह समस्‍या उत्‍तर की ओर बढ़ कर अधिक तीव्र हो गई। सेटेलाइट के आंकड़ों के आधार पर समुद्र तट प्रबंधन योजना तैयार की गई। इसके अंतर्गत दो प्रमुख मौसमों(दक्षिण-पश्चिमी तथा उत्‍तर-पूर्वी मानसून) को आधार बनाया गया। इस योजना के अन्‍तर्गत पुदुचेरी सरकार ने 500 मीटर लम्‍बे समुद्र तट पर 50,000 घनमीटर रेत का इस्‍तेमाल किया। इससे पुदुचेरी लाइटहाउस के निकट 60 मीटर तटीय की क्षेत्र की प्राप्ति हुई।

 

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               लागू होने से पहले                                          लागू होने के बाद

मानसून मिशन योजना:

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय ने 2012 में राष्‍ट्रीय मानसून मिशन(एनएमएम) लॉंच किया। इसका उद्देश्‍य विभिन्‍न समयावधियों में मानसून वर्षा की पूर्वानुमान प्रणाली को विकसित करना था। इसने अपना पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसके अन्‍तर्गत भविष्‍यवाणी प्रणाली को उच्‍च क्षमता से जोड़ा गया तथा मौसम पूर्वानुमान के लिए उच्‍च क्षमता वाले वायु मंडलीय मॉडल की स्‍थापना की गई।

पहली बार भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भारत में 2017 मॉनसून वर्षा के संचालन संबंधी मौसमी पूर्वानुमान के लिए मानसून मिशन मॉडल का उपयोग किया।

मंत्रालय ने तीन वर्षों के लिए(2017-2020) मॉनसून मिशन चरण-2 कार्यक्रम लॉंच किया है। इसके अंतर्गत सामान्‍य से कम/अधिक वाले पूर्वानुमानों पर जोर दिया जाएगा तथा अनुप्रयोगों आधारित मानसून पूर्वानुमान विकसित किये जाएंगे।

महाराष्‍ट्र के कोयना अंतरप्‍लेट भूकम्‍पीय क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से गहरी ड्रिलिंग:

कोयना पॉयलट बोरहोल में तीन किलोमीटर अंदर तक वैज्ञानिक ड्रिलिंग की गई और भौगोलिक आंकड़े प्राप्‍त करने का कार्य पूरा किया गया। यह बोरहोल देश के चट्टानी संरचना के संदर्भ में सबसे गहरा है। 1.25 किमी से 1.75 किलोमीटर तक दक्‍कन बेसॉल्‍ट तथा ग्रेनाइट की चट्टानों के नमूने एकत्र किए गए। 5 मीटर के अंतराल पर बेसॉल्‍ट के टुकड़ों का संग्रहण किया गया, जबकि 3 मीटर के अंतराल पर आंतरिक चट्टान के टुकड़ों का संग्रहण किया गया। ड्रिलिंग स्‍थल पर 3 प्रयोगशालाएं कार्यरत थीं।

(1) भूवैज्ञानिक प्रयोगशाला, (2) गाद मिट्टी संग्रहण प्रयोगशाला, (3) गैस और द्रव्‍य नमूना प्रयोगशाला।

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कोच्चि में सीयूएसएटी तथा डोपलर मौसम राडार पर एसटी राडार का उद्घाटन:

डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने 11 जुलाई, 2017 को कोचीन विश्‍वविद्यालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग(सीयूएसएटी) के वायुमंडलीय राडार अनुसंधान केन्‍द्र पर समतापमंडल-क्षोभमंडल राडार सुविधा राष्‍ट्र को स‍मर्पित किया। समतापमंडल-क्षोभमंडल वायु प्रालेख के लिए 205 मीटर हर्ट्ज पर संचालित यह दुनिया का पहला राडार है। यह 20 किलोमीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर वायुमंडलीय वायु स्थितियों की निगरानी करेगा। इन अनुसंधान का अनुप्रयोग मौसम विज्ञान, बादल भौतिकी, आंधी, आकाशीय बिजली और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किया जाएगा।

डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने 12 जुलाई, 2017 को स्‍वदेशी तकनीक से निर्मित अत्‍याधुनिक डॉपलर मौसम राडार का उद्घाटन किया। यह कोच्चि शहर के 500 किलोमीटर की परिधि में चक्रवात की घटनाओं का सटीक पूर्वानुमान करने में सक्षम होगा। डॉपलर एस बैंड इसरो और भारत इलेक्‍ट्रोनिक्‍स के सहयोग से निर्मित किया गया है।

जल का अलवणीकरण:

      मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान(एनआईओटी) के सहयोग से एक स्‍वदेशी तकनीक विकसित किया है, जो समुद्र के पानी को पीने योग्‍य बनाएगा। वर्तमान में अलवणीकरण के कवरती, अगत्‍ती और मिनीकॉय में 3 संयंत्र कार्यरत हैं। प्रत्येक संयंत्र प्रतिदिन एक लाख लीटर पेयजल का उत्‍पादन कर रहा है।

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इन संयंत्रों को स्‍थानीय द्वीप के निवासी संचालित करते हैं। एनआईओटी लक्षद्वीप समूहों में छह अन्‍य संयंत्र स्‍थापित करने की प्रक्रिया में है। लक्षद्वीप प्रशासन की सहायता से संचालित होने वाले इन संयंत्रों में से प्रत्‍येक की क्षमता 1.5 लाख लीटर प्रतिदिन होगी। दिसम्‍बर, 2018 तक दो संयंत्र चालू हो जाएंगे।

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Achievements of Ministry of AYUSH during 2017

Year End Review- Ministry of AYUSH

All India Institute of Ayurveda Inaugurated by the Prime Minister at New Delhi 

NAM Extended for another Three Years with an Outlay of Rs. 2400 crore

First ever International Conference and Exhibition on AYUSH organised 

The Ministry of AYUSH continued to work tirelessly in 2017 to propagate, publicise and popularise the alternate system of medicine with an aim of minimizing the gap between demand and supply of medical facilities in the country.  During the year 2017 the Prime Minister, Shri Narendra Modi dedicated the All India Institute of Ayurveda to the Nation, Union Cabinet has approved three years extension of National AYUSH Mission(NAM), Memorandums of Understanding (MoUs) for international cooperation in the field of AYUSH were signed with many countries, grand celebration of International day of Yoga and National Ayurveda Day and organization of international conferences are some of the most credible accomplishments of the Ministry.

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National AYUSH Mission (NAM)

The Union Cabinet has approved the continuation of National AYUSH Mission (NAM) as a Centrally Sponsored Scheme from 1st April, 2017 to 31st March, 2020 with financial outlay of Rs.2400.00 Crore. The Mission was launched on September 2014 for promotion of AYUSH healthcare in the country.

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Under Mainstreaming of AYUSH component, 8994 PHCs, 2871 CHCs and 506 District Hospitals have been co-located with AYUSH facilities. Under NAM, Ministry  intends to set up fifty bedded hospitals in all the districts in next 10 years. So far 66 fifty bedded integrated AYUSH hospitals and 992 yoga wellness centres have been assisted. An amount of Rs Rs. 490 Crores for the year 2017 18 has been released to various States/UTs under NAM.

National Ayurveda Day Celebration

The Prime Minister, Shri Narendra Modi dedicated the All India Institute of Ayurveda, to the Nation on 2ndNational Ayurveda Day on 17th October, 2017. The first ever All India Institute of Ayurveda (AIIA) is set up along the lines of AIIMS.

Ministry celebrated 2nd National Ayurveda Day with the following events:-

 

 

  • Organized Conference on 16th October, 2017 at India Habitat Centre, New Delhi to bring all Stake holders of Ayurveda Sector and create a platform for constructive discussion on the road map to triple the Industry’s potential in just five year time.
  • Organized the Ayurveda Conclave Vision 2022- Taking of Ayurveda Sector from $2.5 Billion to $ 8 Billion Industry.
  • All India Institute of Ayurveda (AIIA), SaritaVihar, New Delhi dedicated to the Nation by the Hon’ble Prime Minister on 17th October, 2017.

Financial assistance has been provided for 23 Health Melas and 10 Seminars/Workshops

International Day of Yoga

The Third International Day of Yoga was celebrated with great enthusiasm across the country with mass yoga demonstrations at National and International level in various places. The main event of Mass Yoga Demonstration was organized at Ramabai Ambedkar Ground, Lucknow on 21st June, 2017 where the Prime Minister Shri Narendra Modi, participated in the mass Yoga demonstration event.

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To commemorate the celebration of 3rd International Day of Yoga (IDY), the Ministry of AYUSH organized an “International Conference on Yoga for Wellness” at New Delhi during 10-11 October 2017.

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The Conference was inaugurated by the Vice President of India, Shri M. Venkaiah Naidu. Nearly 600 Indian and foreign delegates including 80Yoga experts/ enthusiasts from 44 countries attended the Conference.

International AROGYA 2017

Ministry of AYUSH in collaboration with Department of Commerce, Ministry of Commerce and Industry; Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI) and Pharmexcil organized the ‘International AROGYA 2017’ – First Edition of International Exhibition and Conference on AYUSH and Wellness on the theme ‘Enhancing the export potential of AYUSH’ during 4-7 Dec. 2017.

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The event was attended by International Ayurveda Experts/ Academicians/ Scientists/ Regulators/ Manufacturers. During the International Conference and Regulators Meet, important topics relating to standardization and quality control in AYUSH sector; enhancing the export potential of AYUSH and business opportunities; and integrative healthcare, etc. were extensively deliberated.

BIMSTEC Task Force on Traditional Medicine

1st Meeting of BIMSTEC Task Force on Traditional Medicine in India was organised by the Ministry of AYUSH during 24-25 October, 2017 at New Delhi.

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Wherein delegations from the People’s Republic of Bangladesh, the Kingdom of Bhutan, the Republic of India, the Republic of the Union of Myanmar, the Federal Democratic Republic of Nepal, the Democratic Socialist Republic of Sri Lanka and the Kingdom of Thailand along with the BIMSTEC Secretariat participated.

International Cooperation

Memorandums of Understanding (MoUs)

Federal level MoU signed with 11 countries and Institute level MoUs signed with 24 Countries so far. 28 AYUSH Information Cells have been set up in 25 countries so far.

Three MoUs were signed by the Central Council for Research In Homoeopathy, an autonomous body under Ministry of AYUSH with:

  • Scientific Society for Homoeopathy (WissHom), Germany for cooperation in the field of research and education in Homoeopathic Medicine
  • Federal University of Rio De Janerio- UFRJ for cooperation in the field of Research and Education.
  • Institute for the History of Medicine, Robert Bosch Foundation, Stuttgart, Germany for cooperation in the field of development of museum on AYUSH system and   archives on homoeopathy.

The Joint Declaration of Intent (JDI) between the Federal Ministry of Health of the Federal Republic of Germany and the Ministry of AYUSH of the Republic of India regarding cooperation in the sector of Alternative Medicine was signed during 4th Indo-German Intergovernmental Consultations (IGC) at Berlin on 1st June 2017.

The High Commission of India in Singapore organized a Symposium cum Seminar on the theme “Preventive Health Care and Immunity Betterment – The Ayurvedic Way” as a part of celebration of 3rd International Day of Yoga on 21st June 2017 in Singapore in collaboration with Ayurvedic Practitioners Association of Singapore (APAS).

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Morarji Desai National Institute of Yoga (MDNIY) and Institute of Post Graduate Teaching & Research In Ayurveda (IPGTRA) have been redesignated as WHO Collaborative Centres in Traditional Medicine under WHO’s reference number WHO CC No. IND-118 and WHO CC No. IND-117.

An MOU has been signed between CCRAS & University of Debrecen, Hungry on 01st October, 2017 for establishment of European Institute of Ayurvedic Sciences (EAIS).

A Homoeopathy Chair has been deputed at the Yerevan State Medical University, Armenia consequent to signing of MoU between CCRH and Yerevan State Medical University, Armenia for setting up of AYUSH Academic Chair.

National Medicinal Plants Board (NMPB)

NMPB in collaboration with Federation on Medicinal and Aromatic Plants Stakeholders (FEDMAPS), New Delhi had organized an International Symposium on “National Policy Drafting of Medicinal and Aromatic Plants of India” on 19th & 20th January, 2017.

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The purpose of said event was to draft the National Policy Document of Medicinal and Aromatic Plants (MAPs) of India. The review meeting was conducted on 22nd November 2017 and finalization of draft National Policy on Medicinal Plants is in the process.

Achievements under Central Sector Scheme for Conservation, Development and Sustainable Management of Medicinal Plants during 2017-18 till December 2017 are supported 2845.07 hectares under Resource Augmentation of Medicinal Plants, Supported 1000 hectares of area for five Medicinal Plants Conservation and Development Areas (MPCDAs), Supported 43 Joint Forest Management Committees (JFMCs) in States, for livelihood augmentation, through value addition activities and supported projects for setting up of Herbal Gardens, School Herbal Gardens and Home Herbal Gardens.

In collaboration with Federation of Medicinal and Aromatic Plants Stakeholders (EFDMAPS), New Delhi, NMPB is sourcing the monthly Mandi price of 100 high demanded medicinal plants from 25 major herbal mandies of India. These monthly prices will be published in ‘e-charak’ portal and website of NMPB for all the stakeholders.

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Preventive study of Dengue and Chikungunya during 2017 (Ongoing)

Protocol for the study titled ‘Effectiveness of Eupatorium perfoliatum vis-à-vis health awareness in preventing dengue & chikungunya fever during outbreak – an open cluster level study.’ was approved by different committees of the Council and study was initiated on 1st July 2017. This is an open cluster level study. The study participants are enrolled from the slum areas with high mosquito exposure but apparently healthy. The study shall be conducted at JJ colony of Mayapuri, Piragadi, Zakira, Chunna Bhatti, Keshav Vihar and Madhav Vihar at New Delhi. Enrolled individuals received Eupatorium perfoliatum 30 once in a week for 10 weeks. Total 70,000 participants enrolled and under follow up study is ongoing.

Central Council for Research in Siddha (CCRS) has a collaborative research project underway on standard care in Dengue with Maulana Azad Medical College, New Delhi. It is a “Multi-centre open labelled non-randomised parallel group Phase III clinical trial to compare the effectiveness of Siddha, Ayurveda and Homeopathy standard care in Dengue infection/post infective Dengue arthralgia”.

Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy

Publication and revision of Ayurvedic, Siddha, Unani and Homoeopathic Formularies/ Pharmacopoeia/ Codex and of such addenda or supplementary compendia

Three Pharmacopoeial publications namely Ayurvedic Pharmacopoeia of India Part-I, Volume IX, Ayurvedic Pharmacopoeia of India Part – II, Volume IV and Unani Pharmacopoeia of India Part – II, Volume III were released at the hands of Sh. Shripad Naik, Honourable Minister of State I/c, Min. of AYUSH, during Silver Jubilee celebration & Inauguration of 21st Convocation of CRAV and National Seminar on “Evidence Based Ayurvedic Approach to Diagnosis, Prevention and Management of Diabetes and Its Complications” held on 29th May, 2017.

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Development of pharmacopoeial standards

The APC was reconstituted for the period of three years consequent upon expiry of tenure of previous committee. Work regarding development of pharmacopoeial standards for 30 single drugs and formulations each alongwith hydro-alcoholic and water extracts of 5 drugs each has been allotted in project mode. Progress of the work is being closely monitored. Apart from it, drafting of Veterinary Formulary and revision of Ayurvedic Pharmacopoeia of India Part I, Vol. I and Ayurvedic Formulary of India, Part-I & II are also going on.

The SPC was reconstituted for the period of three years consequent upon expiry of tenure of previous committee. Work regarding development of pharmacopoeial standards for 20 single drugs and formulations each has been allotted in project mode. Apart from it, manuscripts of two new publications namely Siddha Pharmacopoeia of India Part I, Vol. III and Siddha Formulary of India (SFI), Part III (Tamil) alongwith revised editions of SFI Part I (Tamil), SFI Part I (English) and SFI Part II (English) are being worked out.

The UPC was reconstituted for the period of three years consequent upon expiry of tenure of previous committee. Revision of National Formulary of Unani Medicine (NFUM), Part I to VI and Unani Pharmacopoeia of India, Part I, Vol. I-VI is under process.

The tenure of HPC was extended for a period of one year suppressing expiry of the incumbent committee. Work regarding development of pharmacopoeial standards for 10 single drugs has been allotted in project mode. Progress of the work is being closely monitored. Apart from it, revision of Homoeopathic Pharmacopoeia of India Vol. I-IX is also going on.

Achievements under Extra Mural Research (EMR) Scheme during the year 2017-18

 New projects clearly/conditionally approved by PAC – 12

 Grant in-Aid approved for ongoing projects – 23

 Projects completed – 11

 Research papers published in reputed journals – 2

AYUSH Education Reforms

In order to raise the levels of the AYUSH education, Ministry is planning a country-wide collective of AYUSH students which will serve as a platform for students for organizing various activities.

National Eligibility Entrance Test (NEET) for all AYUSH Educational Institutions for admission of undergraduate Course through designated Authority. For all system of AYUSH, minimum 50% marks should be obtained by the candidates to be eligible for admission in Under Graduate Course.

National Eligibility Entrance Test (NEET) for all AYUSH Educational Institutions for admission of Post graduate Course / Exit Exam through designated Authority. For all system of AYUSH, minimum 50% marks should be obtained by the candidates to qualify the test. By assessing the percentage of qualifying students in PG NEET / Exit examination of a particular AYSUH Institution, the due benefits should be given to that particular college and the same will be incorporated in MSR of both ASU & H system.  Colleges shall be exempted from obtaining permission from Central Government for one year, if 70% of the students of the previous batch qualify the PG-NEET / Exit exam.

AYUSH National Teachers Eligibility Test shall be conducted for appointment of all teachers in AYUSH Institutions, and a unique verification code for such teachers shall be allotted by CCH / CCIM before their appointment.

The attendance of Teaching Staffs in all AYUSH Medical Colleges shall be through geo location based system, which shall be made accessible by the relevant Council (CCIM / CCH) as well as the Ministry.

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वर्ष 2017 के दौरान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियां

                                       वर्षांत समीक्षा-2017: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग

वर्ष 2017 के दौरान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की गतिविधियों के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैः

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए, 2013) लागू

  • लगातार जारी प्रयासों के परिणामस्वरूप, एनएफएसए कानून, 2013 सभी 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में व्यापक स्तर पर लागू।national-food-security-act-1.jpg

यह अधिनियम देशभर में करीब 80.72 करोड़ लोगों को मोटा अनाज/गेहूं/चावल आदि अत्यधिक सब्सिडी आधारित दरों पर क्रमशः 1/2/3 रुपये प्रति किलोग्राम में मुहैया कराकर लाभान्वित कर रहा है।

  • जुलाई 2016 तक वैध एनएफएसए के तहत निर्दिष्ट खाद्यान्नों की कीमत – चावल 3 रुपये प्रति किग्रा, गेहूं 2 रुपये  प्रति किग्रा और मोटा अनाज 1 रुपये प्रति किग्रा को जून 2018 तक जारी रखा गया है।
  • वित्त वर्ष 2017-18 (13-12-2017 तक) के दौरान खाद्यान्नों के अंतर-राज्य आवागमन पर किए गए व्यय और उचित दर दुकानों के डीलरों के मार्जिन को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को केन्द्रीय सहायता के रूप में 2959.22 करोड़ रुपये जारी किए गए। एनएफएसए के अंतर्गत इस तरह की व्यवस्था पहली बार की गई है। पूर्ववर्ती लक्षित सार्वजिनक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत या तो राज्य सरकारों को इस व्यय को उठाना पड़ता था अथवा इसे लाभार्थियों (एएवाई लाभार्थियों को छोड़कर) से वसूलने की ज़रूरत पड़ती थी।

टीपीडीए परिचालन का एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण

  • राशन कार्ड/लाभार्थी रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप, वर्ष 2013 से 2017 (नवंबर 2017 तक) तक आधार लिंकिंग के कारण जाली कार्डों का समापन, हस्तांतरण/पलायन/मृत्यु, लाभार्थी की आर्थिक स्थिति में बदलाव और एनएफएसए के कार्यान्वयन के दौरान, कुल 2.75 करोड़ राशन कार्ड राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा नष्ट/रद्द किए जा चुके हैं। इसके आधार पर सरकार करीब 17,500 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की खाद्य सब्सिडी को उचित व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करने में सफल रही है।
  • लक्षित सार्वजिनक वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण और उसमें पारदर्शिता लाने के लिए विभाग टीपीडीएस परिचालन के एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण योजना को करीब 884 करोड़ रुपये की लागत से राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ लागत साझा करने के आधार पर कार्यान्वित कर रहा है। यह योजना राशन कार्डों एवं लाभार्थियों के रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण, आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन का कंप्यूटरीकरण, पारदर्शिता पोर्टल और शिकायत निपटान प्रणाली के गठन आदि की सुविधा प्रदान करती है।
  • योजना के तहत प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैः
क्रम सं. योजनागत गतिविधि उपलब्धियां
1 राशन कार्ड/लाभार्थी डाटा का डिजिटलीकरण सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में पूर्ण
2 खाद्यान्न का ऑनलाइन आवंटन 30 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में शुरू
3 आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन का डिजिटलीकरण 20 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में पूर्ण और बाकी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में कार्य प्रगति में है
4 पारदर्शिता पोर्टल सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में गठित
5 शिकायत निवारण सुविधा सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में टोल फ्री हेल्पलाइन/ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा उपलब्ध

 

जाली/अयोग्य लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें निरस्त करने तथा उचित व्यक्ति तक खाद्यान्न सब्सिडी पहुंचाने की व्यवस्था को सक्षम बनाने के लिए राज्य/केन्द्र शासिसत प्रदेशों द्वारा लाभार्थियों की आधार संख्या को उनके राशन कार्ड के साथ जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में कुल राशन कार्ड के 81.35 फीसदी कार्डों को आधार कार्ड के साथ जोड़ा जा चुका है।

  • योजना के एक अंग के रूप में, खाद्यान्न आवंटन के लिए उचित दर दुकानों पर कुल बिक्री के लेनदेन का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने और प्रमाणीकरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ईपीओएस) उपकरण को लगाया जा रहा है। आज की तारीख तक, 23 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की कुल 5.27 लाख उचित दर दुकानों में से 2.83 लाख एफपीएस पर ईपीओएस उपकरण लगाया जा चुका है।

डीबीटी के हाइब्रिड मॉडल का शुभारंभः

झारखंड के रांची जिले के नगरी ब्लॉक में अक्टूबर 2017 से “पहल” योजना की तर्ज पर डीबीटी की एक पायटल योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत, योग्य एनएफएसए लाभार्थियों को महीने की शुरुआत में अग्रिम धनराशि के रूप में सब्सिडी राशि का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाता है। सब्सिडी की राशि बैंक खाते में आने पर लाभार्थी अपने अधिकार के अनुसार पॉइंट ऑफ सेल उपकरण पर ऑथेंटिकेशन के बाद नाममात्र की लागत पर उचित दर दुकान से खाद्यान्न की खरीद कर सकता है। केन्द्रीय इश्यु दर लाभार्थी द्वारा दी जाती है। यह मॉडल एमएसपी दरों पर किसानों से खरीद की प्रक्रिया को लगातार समर्थन देता है।

राशन कार्डों की अंतः राज्य पोर्टेबिलिटीः

पीडीएस लाभार्थियों को अपने अधिकृत अनाज को राज्य में ईपीओएस उपकरण वाली किसी भी उचित दर दुकान से लेने में सक्षम बनाने की सुविधा आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ (750 एफपीएस) और तेलंगाना (2273 एफपीएस) पर शुरू की जा चुकी है।

पीडीएस का एकीकृत प्रबंधन (आईएम-पीडीएस)

पीडीएस परिचालन की राष्ट्रीय स्तर पर पोर्टेबिलिटी, केन्द्रीय डाटा भंडार और केन्द्रीय निगरानी प्रणाली को कार्यान्वित करने की दिशा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली नेटवर्क स्थापित करने के लिए वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 में एक नई केन्द्रीय स्तर की योजना को कार्यान्वयन किए जाने के लिए मज़ूरी दी जा चुकी है।

ईपीओएस लेनदेन पोर्टल का शुभारंभः

लाभार्थियों को सब्सिडी आधारित खाद्यान्न वितरित करने के लिए ईपीओएस के जरिए इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन प्रदर्शित करने की दिशा में “अन्नवितरण पोर्टल (www.annavitran.nic.in)” लागू किया गया।

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यह पोर्टल जिला स्तर पर आवंटित और वितरित खाद्यान्न के अलावा लाभार्थियों के आधार ऑथेंटिकेशन की वृहद तस्वीर भी दर्शाता है।

किसानों को समर्थन

2016-17 केएमएस के दौरान 381.07 लाख मीट्रिक टन धान (चावल के मामले में) की रिकॉर्ड मात्रा खरीदी गई। 2015-16 केएमएस के दौरान यह 342.18 मीट्रिक टन थी। आरएमएस 2017-18 के दौरान 308.24 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जोकि पिछले पांच वर्षों के दौरान सबसे अधिक है। 2016-17 में यह 229.61 लाख मीट्रिक टन था।

खाद्य प्रबंधन में सुधार

  • केएमएस 2017-18 से, खरीदे गए धान की पैकेजिंग के लिए उपयोग शुल्क पर सभी राज्यों और एफसीआई से परामर्श के साथ नए दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। ऐसा अनुमान है कि उपर्युक्त योजना से प्रत्येक सीज़न में करीब 600 करोड़ रुपये तक बचाया जा सकता है।

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  • एफसीआई द्वारा एक वर्ष में लगभग 40 मिलियन टन खाद्यान्न को देशभर से अपने गोदामों तक लाया जाता है। खाद्यान्न की आवाजाही रेल, रोड, समुद्र, तट और नदी व्यवस्था के माध्यम से की जाती है। वर्ष 2016-17 में, 13 कंटेनर आधारित खाद्यान्न की आवाजाही हुई, जिससे करीब 44 लाख रुपये के मालभाड़े की बचत हुई। 2017-18 के दौरान, एफसीआई ने 58 कंटेनर रेक्स (15.10.2017 तक) को स्थानांतरित किया है, जिससे लगभग 159 लाख रुपये के माल भाड़े की बचत हुई है।

भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए)

  • डब्ल्यूडीआरए के साथ भंडारण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल किया गया है। नए नियम डब्ल्यूडीआरए के साथ भंडारण के तौर पर जुड़ने वालों की संख्या में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित करेंगे। यह बातचीत योग्य भंडारण रसीद (एनडब्ल्यूआर) प्रणाली को मज़बूत करेगा। इस वर्ष के दौरान अब तक करीब 90.35 करोड़ ऋण की सुविधा एनडब्ल्यूआर के तहत ली जा चुकी है।

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  • भंडारण की पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव लाने और पेपर आधारित एनडब्ल्यूआर की जगह ईएनडब्ल्यूआर जारी करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बातचीत आधारित भंडारण रसीद (ईएनडब्ल्यूआर) प्रणाली और डब्ल्यूडीआरए पोर्टल शुरू किया गया। यह अधिक विश्वसनीय वित्तीय उपकरण साबित होगा।

चीनी क्षेत्र

  • पिछले पांच सालों के दौरान चीनी स्टॉक की निरंतर अधिकता के कारण 15-04-2015 तक 2014-15 के लिए गन्ना मूल्य बकाया संपूर्ण भारत के स्तर पर 21837 करोड़ रूपए पर पहुंच गया। गन्ने की कीमतों के बकाये को निपटाने के क्रम में, केन्द्र सरकार ने 4305 करोड़ रुपये का सॉफ्ट ऋण मुहैया कराना, कच्ची चीनी निर्यात प्रोत्साहन योजना के जरिए 425 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करना, 539 करोड़ रुपये की उत्पादन सब्सिडी देना और 2015-16 सीज़न के लिए किसानों को गन्ने की फसल की बकाया राशि का समय पर भुगतान आदि कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन उपायों के परिणामस्वरूप, 2014-15 सीज़न के लिए किसानों के बकाया का 99.33 फीसदी भुगतान और 2015-16 के लिए किसानों के बकाया का 99.77 (उचित और लाभकारी मूल्य आधार पर) फीसदी भुगतान किया जा चुका है। चीनी सीज़न 2016-17 के संबंध में उचित और लाभकारी मूल्य आधार पर गन्ने का करीब 99.47 फीसदी बकाया भी निपटाया जा चुका है।

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  • चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने और चुनिंदा क्षेत्रों में ही चीनी आयात की अनुमति देने सहित विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप देशभर में इस वर्ष गन्ने का कम उत्पादन होने के बावजूद चीनी की कीमतें स्थिर बनी रहीं। इन नीतियों ने न केवल स्थिर कीमतें सुनिश्चित की बल्कि घरेलू उत्पादन में भी बाधा नहीं डाली। इसके साथ ही इन नीतियों ने समय पर किसान के बकाया का भुगतान करने में सरकारों को सक्षम बनाया

केन्द्रीय पूल स्टॉक से खाद्यान्नों का निर्यात

भारत सरकार ने वर्ष 2017 के दौरान निम्नलिखित देशों को मानवतावादी खाद्य सहायता के रूप में अनाज प्रदान कियाः

क्रम. सं. देश मात्रा (मीट्रिक टन में)
1 श्रीलंका 100
2 जिम्बावे 500
3 लेसोथो 500
4 नामिबिआ 1000

इसके अलावा 1.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान को दानस्वरूप देने को भी मंजूरी दे दी गई है और एफसीआई के स्टॉक से इसकी आपूर्ति का कार्य प्रगति में है।

                                                                       *********

 

Achievements of Ministry of Road Transport & Highways during 2017

Year End Review 2017 - Ministry of Road Transport & Highways

2017: A Year of Ambitious Roll-Outs and Engineering Marvels

Highlights of the activities of the Ministry of Road Transport & Highways

INDEX

  • INTRODUCTION
  • CONSTRUCTION OF NATIONAL HIGHWAYS
  • ROAD SAFETY
  • GREEN INITIATIVES
  • E- INITIATIVES
  • INTERNATIONAL PARTNERSHIPS
  • OTHERS

INTRODUCTION

2017 has been a major milestone year for the Ministry of Road Transport & Highways. While the period since 2014 to 2016 was utilised for the purposes of reform and course correction, 2017 witnessed consolidation, culmination and the rollout of a new road-map for the Highways sector.

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Keeping the rapid developments in the sector in mind, RBI appreciated the highway infrastructure development sector in their Annual Report 2016-17, noting that there is a decline in cost and time overruns to the tune of Rs. 1.5 Billion and an all-time rise in award and construction of highways projects including a peak of daily additions to the roads constructed. Further, it pointed out that stalled projects had declined, both in terms of value and numbers.

Another creditworthy development was that following the upgrade of India’s sovereign rating from Baa3 positive to Baa2 stable on 16th November 2017, Moody’s Investors Service upgraded the issuer ratings of National Highways Authority of India to Baa2 from Baa3 and revised the outlook to stable from positive.

2017 witnessed several highlights. This was the year when engineering marvels like the Dhola Sadiya bridge in Assam and Chenani Nashri tunnel in Jammu and Kashmir were opened up to connect far-off areas and pave the way for their socio-economic development.

This was also the year that saw the launch of Bharatmala Pariyojana, India’s largest ever highways development programme that promises to optimize the efficiency of road traffic movement across the country by bridging critical infrastructure gaps.

In the area of road safety too, we witnessed a slight decrease in the number of road accidents.

Year 2017 can also be seen as a major turning point for transport planning in the country, with the idea of multi-modal transport development gaining ground. The Union Budget 2017-18 set the ground for this with a comprehensive budget for the transport sector as a whole. MoRTH took the idea further by organising the India Integrated Transport and Logistics Summit, organized in May 2017 and by actively promoting multi-modal transport planning with greater synergy in  investments in railways, roads, waterways and civil aviation.

The Ministry and its project executing organizations have carried forward the good work of the previous years in 2017, expanding the national highways network in the country, taking various steps to make these highways safer for the commuter and making best efforts to minimize adverse impacts on the environment.

CONSTRUCTION OF NATIONAL HIGHWAYS

Award / Construction Statistics:

Award and construction activity is a direct consequence of demand, land availability and management of contracts. March 2017 witnessed the highest awards at 15948 kilometres and construction at 8231 kilometres. The table below details the trends of NH construction over the years:

Year Award (kms) Construction (kms)
2014-15 7972 4410
2015-16 10098 6061
2016-17 15948 8231

Note: 2017-18 is work in progress and with the finalisation of the Bharatmala Pariyojana and its contours, the activity of award and construction has been focused in concerted directions

New Programmes, Projects and Structures

  • Bharatmala Pariyojana: Phase-I

This is a new umbrella program for the highways sector that aims to optimize the efficiency of road traffic movement across the country by bridging critical infrastructure gaps. Special attention has been paid to fulfilling the connectivity needs of areas of economic activity, places of religious and tourist interest, border areas, backward and tribal areas, coastal areas and trade routes with neighbouring countries under the programme.

Multi-modal integration is one of the key focuses of this programme. A total of around 53,000 kms of NHs have been identified to improve National Corridor efficiency, of which 24,800 kms are to be taken up in Phase-I, which will be implemented over a period of five years i.e. 2017-18 to 2021-22 in a phased manner. This includes 5,000 kms of the National Corridors, 9000 kms of Economic Corridors, 6000 km of Feeder Corridors and lnter-Corridors, 2000 kms of Border Roads, 2,000 kms of Coastal Roads and Port Connectivity Roads and 800 kms of Green-field Expressways. Total likely fund provision for Bharatmala Phase-I is Rs. 5,35,000 cr. Bharatmala will be a major driver for economic growth in the country. lt is estimated that more than 35 crore man-days of employment shall be generated under Phase-l of the programme.

  • Chenani- Nashri Tunnel

An ideal example of the government’s ‘Make in India’ and ‘Skill India’ initiative, the 9 km long, twin-tube, all-weather tunnel between Udhampur and Ramban in Jammu & Kashmir is not only India’s longest highway tunnel but also Asia’s longest bi-directional highway tunnel.

Built at an elevation of 1200 metres on one of the  most difficult Himalayan terrains, the tunnel  cuts the travel time between Jammu and Srinagar by two hours, bypassing about 41 kms of road length. It will also ensure an all-weather passage on a route that often sees heavy traffic jams and disruptions due to landslides, snow, sharp curves, breakdown of vehicles and accidents. The tunnel has been constructed at a cost of about Rs 3720 crores and is a part of the 286-km-long project for four-laning of the Jammu-Srinagar National Highway.

  • Dhola Sadiya Bridge

The Hon’ble Prime Minister, Shri Narendra Modi, inaugurated India’s longest bridge- the 9.15 km long Dhola-Sadiya Bridge over River Brahmaputra in Assam on 26th May 2017.

The bridge has ensured 24×7 connectivity between upper Assam and Eastern part of Arunachal Pradesh, marking a major transformation from the ferry-based, day-only connectivity that collapsed during floods. It has considerably reduced the distance and travel time between the two states. The distance between Rupai on NH- 37 in Assam to Meka/Roing on NH-52 in Arunachal Pradesh has been cut down by 165 KM. The travel time between the two places has come down from six hours to just one hour – a total five hour reduction.

  • Extra-dosed Bridge across River Narmada at Bharuch

A new four lane, Extra-dosed Bridge across river Narmada at Bharuch, inaugurated by the Prime Minister on 9th of March 2017, has brought major relief for people travelling on the Vadodara- Surat section of NH-8.

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The 1.4 km ‘Extradosed’ cable stayed bridge is the longest in India and the second such bridge in the country after Nivedita Setu over Hooghly.

  • Bridge over River Chambal at Kota

A 6-lane Cable Stayed Bridge across river Chambal at Kota was inaugurated by the Prime Minister Shri Narendra Modi on 29th August 2017.

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Built at a cost of Rs. 278 Crores, this bridge marks the completion of the East-West corridor.

Status/ Progress of important programmes/ projects under implementation:

  • Chardham Mahamarg Vikas Pariyojna

The projects envisages development of easy access to the four prominent Dhams, namely, Gangotri, Yamunotri, Kedranath and Badrinath, situated in the state of Uttrakhand. These four Dhams are prominent pilgrimage centres.

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The project entails development of 889 km of roads with configuration of two-lane with paved shoulders at an estimated cost of about Rs. 12,000 crore. So far, 24 works have been sanctioned traversing a length of 395 kilometres. 22 works covering a length of 340 kilometre have been awarded. The projects are being taken up on EPC mode amd the program is targeted for completion by March, 2020

  • Eastern Peripheral Expressway– Western Peripheral Expressway

The project of Peripheral Expressways around Delhi, comprising Eastern Peripheral Expressway (EPE) and Western Peripheral Expressway (WPE) emanating from NH-1 (near Kundli) and terminating at NH-2 (near Palwal), bypassing Delhi aims to decongest Delhi and reduce pollution levels in the NCR. While the EPE is being developed by the NHAI, the WPE is being developed by the State of Haryana. Each of these Expressways is 135 km long, leading to an outer-outer ring road of 270 kms for Delhi. These Peripheral Expressways are to be access controlled six-lane roads. The work, being executed in six packages, is due for completion before March 2018.

  • Delhi-Meerut Expressway

The Delhi-Meerut Expressway aims to provide a fast link between the two citiesThe alignment of DME starts from Nizammudin Bridge from Delhi and follows existing NH 24 upto Dasna. While one leg of DME will continue from Dasna on NH 24 to Hapur, a Greenfield alignment has been planned from Dasna to Meerut.

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The 8.7 km, 14-lane highway is being completed in a record time of about 15 months as against the originbal scheduled completion period of 30 months. This first stretch from Nizamudin Bridge to UP Border is provisioned with with 14 lanes, and has several features that would help reduce pollution. These include a 2.5 metre wide cycle track on either side of the highway, a vertical garden on the Yamuna Bridge, solar lighting system and watering of plants through drip irrigation only.

  • Vadodara-Mumbai Expressway

The 473 km expressway will link Ahmedabad-Vadodara Expressway to Mumbai-Pune Expressway thus providing Expressway connectivity from Ahmedabad to Pune for a length of about 650 Km.

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The project will be taken up in three phases. Land acquisition, environment clearance etc are at advanced stage of approval for Phase I and II. Bids have also been invited for the First package of of phase -1.

  • Bangalore-Chennai Expressway (262 km)

Bangalore-Chennai Expressway is a green-field alignment and will be operated with a closed toll system. There are two existing roads connecting Bangalore-Chennai, one is via Hoskote (Bangalore)-AP then to Chennai & second is via Electronic City (Bangalore) Hosur (Tamil Nadu) and then to Chennai. The alignment of proposed expressway is passing in between these two stretches. The processes of land acquisition, environment and other pre-cnstruction activities are under progress.

  • Byet Dwarka – Okha Bridge

The Ministry has taken up constuction of a signature 4-lane Bridge to connect the mainland at Okha to Byet-Dwarka Island off the Gujarat Coast with this signature Bridge spanning a length of 2.32 kms.

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The Project has been awarded on 01.01.2018 at a cost of Rs. 689.47 crores. This will be the longest span cable stayed bridge in India with the main span of 500 mtrs. The project is scheduled to be completed in 30 months time.

  • New Expressways planned under under Bharatmala Pariyojana Phase-I         
    • Delhi-Jaipur Expressway
    • Delhi-Amritsar-Katra Expressway
    • Vadodra-Mumbia Expressway
    • Hyderabad- Vijayawada- Amravathi (HVA) Expressway
    • Nagpur-Hyderabad-Bangalore (NBH) Expressway
    • Kanpur Lucknow (KL) Expressway
    • Ring road/ Expressway at Amravathi
  • Indian Bridge Management System (IBMS)

The Ministry took-up a new initiative, known as Indian Bridge Management System3-5-300x240.jpg (IBMS), to inventorise all structures  e.g. Bridges and culverts constructed on the National highways. The consultants have completed their report and also undertaken the condition assessment of all the existing bridges on National Highways. As such, inventory for more than 1,62,000 bridges and culverts has been completed. A total of 147 Bridges have been identified as distressed structures which call for immediate restoration/ replacements. A time-bound action plan to undertake repairs and restoration or construction of new bridges in place of the decadent structures has been put in place.

  • Setu Bharatam

In order to ensure safe and smooth flow of traffic, Ministry has envisaged a plan for replacement of Level Crossings on National Highways by ROBs/ RUBs under a scheme known as Setu Bharatam.

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Under this programme, construction of 208 RoBs/ RuBs on Level Crossings (which are not falling under any other programme like NHDP etc.) at an estimated cost of Rs. 20,800 crore is envisaged. Out of these 208 ROBs, Detailed Project Reports for 127 ROBs have been received in the Ministry, out of which 78 ROBs with an estimated cost of Rs. 6428.57 crore have been sanctioned till 31.03.2017, of which 35 works have been awarded so far.  09 ROBs with an estimated cost of Rs. 576.58 crore have been sanctioned till date during FY 2017-18.

Funding Models and other policies to facilitate construction of National Highways:

  • Measures to revive Languishing stalled projects

The Ministry has focused on completion of on-going projects along with sanction and award of new projects. A total of 73 projects (8,187 km) worth an estimated investment of Rs.1,00,000 crore were identified as Languishing Projects. The reasons for delay were identified and policy interventions undertaken to address the same. This, inter alia, includes (a) One Time Fund Infusion Scheme (OTFIS) whereby financial assistance is provided by NHAI to the contractor/ concessionaire in the form of a  working capital loan, (b) Rationalized Compensation whereby a one-time compensation, equivalent to annuities that were missed on account of delay in completion of the project , is provided to the concessionaire in the case of BOT (Annuity) projects; (c) Extension of concession period, (d) Substitution of concessionaire & Termination. As on date, the entire portfolio of languishing projects that have been taken up for revival/ completion is as per table below:-

Description of Projects Number of Projects Length in Kms
Projects where issues have been resolved through regular monitoring 15 2054.94
Projects terminated and re-packaged and re-bid. 48 5090.68
Projects revived after policy interventions 10 1041.00
Total 73 8186.62 or 8187
  • Toll- Operate-Transfer (TOT)

The Ministry is monetizing its road assets constructed with public funds through Toll-Operate-Transfer (ToT) scheme. The scheme envisages bidding of bundled national highways for a concession period of 30 years. The bids for the first bundle of 9 NHs have been invited and are scheduled to be received on 09.01.2018.

  • Masala Bonds

Targeting mobilization of funds, NHAI launched an issue of Masala Bonds at the London Stock Exchange in May 2017.

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The Masala Bond saw an overwhelming response from a wide spectrum of investors. The initial benchmark issue of Rs 1500 crore was upsized to Rs 3000 crore. Asia contributed 60 percent and Europe 40 percent of subscription. 61 percent of the amount is from fund managers or insurance funds, 18 percent from banks and 14 percent from private banks. NHAI’s Masala Bonds have been rated the best for the year 2017.

  • Planning for Multi Modal Transport Systems

An India Integrated Transport and Logistics Summit was organized in New Delhi from 3rd to 5th May 2017. It was attended by around 3000 delegates from India and abroad which included central and state government organizations, international organizations like World Bank and ADB, global transport and supply chain experts and representatives of private companies.

Thirty-four MoUs amounting to about Rs 2 lakh crores were signed at the end of the Summit. Carrying the initiative further, the Ministry is actively engaged with a few states for establishment of Multi-modal Logistics Parks in this direction.

Further, it has been decided to develop state-of-the-art Inter-modal stations at Varanasi and Nagpur as the two pilots. A Committee has been constituted for review, monitoring and implementation of these Inter-modal Stations at these locations under the Chairmanship of respective Divisional Commissioners with the charter to facilitate DPR preparation etc.

  • Decentralisation & Administrative Measures
    • Enhanced powers for approval of projects have been delegated to the NHAI Board specifically in the case of EPC projects and all PPP (BOT) projects where no VGF is involved. This will fast track the decision making process.
    • Powers for appraisal and sanction of NH projects implemented through the state PWDs have been enhanced and certain field offices of MoRTH are now headed by the CE-ROs with a view to further streamlining various  processes. This is expected to increase efficiency and speedier decision making.
    • Within the Bharatmala Parijoyna 10% of the funds will be ear-marked under the Grand Challenge mechanism for the State Governments where sufficient and timely land is made available. This will fast track the projects.

ROAD SAFETY

  • Decrease in road accidents and fatalities

India is committed to bring down fatalities from road accidents. This requires a multi-pronged approach for strengthening automobile safety standards, improving road infrastructure, generating awareness programmes, strengthening enforcements and streamlining the trauma care assistance programme.

The Ministry’s concerted efforts at bringing down the number of road accidents has started showing results. As per the report Road Accidents in India-2016, there has been a decrease in road accidents by 4.1% in 2016. The data for first three quarters indicates that this trend continues. The number of accidents up to September, 2017 saw a reduction of 5.2% over the figures for the corresponding period in 2016. The fatalities have shown a decrease of 4.4% during this period. Except the States of Assam, Bihar, Orissa and Uttar Pradesh, all the States have witnessed a decrease in road accident fatalities ranging between 2-10 % during this period.

  • New Accident Reporting Format

A strong Road safety action plan requires a credible database. The current format of reporting was, therefore, revised on the basis of the recommendations of an expert committee comprising of experts from IIT Delhi, IIT Kharagpur, WHO, senior officers from the Police and Transport Departments of States and the Ministry of Health & Family Welfare. The new format of accident reporting has been adopted by all the States and will help in focussing at the key risk areas to strengthen road safety in coming years.

  • Rectification of Black Spots

The Ministry has so far identified 789 road accident black spots in various States of which 138  are on State roads. 189 spots have already been rectified and sanctions for rectification of 256 spots accorded till date which are in different stages of bidding/ progress. 2 Nos. of road safety improvement works on National Highways at selected critical locations at a cost of Rs 30 crore have also been sanctioned under road safety annual plan during 2017-18 which are also under bidding/ progress. Apart from carrying out road safety audits as part of all EPC/ BOT projects, standalone road safety audit has also been initiated on National Highways. Ministry had also has sanctioned installation of crash barriers on national highways in hilly terrain at accident prone locations in different hill states in a length of 137 km at a cost of Rs  85 Crore.

  • Training of Drivers

Ministry has been working in association with States, Vehicle manufacturers and NGOs for strengthening the driving training. Institutes of Driving Training and Research (IDTRs) have been established in a few states which act as model Driving Training Centres with state of art infrastructure. Ministry has also launched a scheme for creating driving training centres in all the districts of the country in due course and also supports refresher training programmes for heavy commercial vehicles drivers.

  • Model Automated Centres for checking fitness of vehicles

Ministry has sanctioned 20 Inspection and certification Centres for testing the fitness of the commercial vehicles though an automated system. Six centres are already operational. These centres will provide for objective evaluation of road worthiness of the heavy commercial vehicles. Based on the encouraging experience, it is now proposed to extend this scheme to all the states during next year.

  • New steps for safety of vehicles
    • Two Wheelers: Two Wheelers account for a major share of accidents and consequent fatalities. A frequent reason is skidding of vehicles. To save the precious lives of two-wheeler users, all the two wheelers have been mandated to be fitted with Anti-Lock braking System (ABS) w.e.f. 1stApril, 2019. This is expected to significantly improve the on-road safety of two-wheelers. Apart from this, all the two-wheelers have also been mandated to have a day light running system to improve the conspicuity of the two wheelers. Helmet is provided as a compulsory accessory at the time of sale of all new two wheelers. This has helped improve helmet compliance amongst two-wheeler riders.
    • Motor Cars  All the passenger cars are also mandated to be fitted with ABS to improve their safety and stability. One of the highlights of the year is the mandate for car manufacturers to fit additional safety features on cars to be manufactured from 1st July, 2019. These include compulsory air-bags, speed warning audio alert, seat belt audio alerts and reverse sensors.
    • Heavy Vehicles: All heavy vehicles have been mandated to have ABS fitted on them. The bus body code has been implemented which would help improve the passenger safety as well as ensure minimum level of comfort. The truck body code has also been notified.
  • Free Eye Check-up Campaign

The Minister of Road Transport and Highways and the NHAI launched a countrywide Free Eye Check-up  Campaign and distribution of spectacles for truck drivers, cleaners and helpers on 2nd October, 2017 at Panjari Toll Plaza, Nagpur Bypass, Nagpur, in Maharashtra. 50 free eye check-ups camps were also set up on identified National Highways till 6th October, 2017. More than 5,000 drivers registered for the eye check-up and more than 3,000 spectacles were distributed to those with impaired vision free of any charge.

  • Passenger Safety and Security

To enhance the passenger safety and specially the safety and security of women and children in transit, all the passenger buses and taxis have been mandated to be fitted with GPS devices to enable real time tracking and intervention in times of crisis.

  • Motor Vehicle (Amendment) Bill, 2017 

The Ministry constituted a Group of Ministers across states to deliberate upon and propose strategies for reducing road fatalities and to suggest actionable measures for implementation.  On the basis of recommendations of the GoM, MoRTH introduced the Motor Vehicle (Amendment) Bill 2016 in Parliament (Lok Sabha) on 9th August, 2016. The Bill addresses road safety issues by providing for stiffer penalties, permitting electronic enforcement, improving fitness certification and licensing regime, statutory provisions for protection of good Samaritans and recognition of IT enabled enforcement systems.  The Bill also paves way for reforms in public transport which in turn will help in improving road safety. The Bill contains provisions for treatment of accident victims during golden hour which will help in saving precious lives. The Bill also aims to simplify processes for the citizens dealing with transport departments and usher in an era of transport reforms in the country. The Bill has been passed by the Lok Sabha and has been referred to the Select Committee of Rajya Sabha.

GREEN INITIATIVES

  • Green Highways Division in NHAI

NHAI has set up a Green Highways Division and has planted over 2.5 lakh trees planted last year in order to make National Highways green, clean and pollution free.

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  • Linking of Construction of Highways with digging of Water Bodies in drought affected areas        

The requirement of earth work for the development of National Highway network for embankments is met by the contractors/ concessionaires through buying the earth from landowners or procuring the same through mining of minor minerals as per the provisions laid down by the concerned State Governments. Keeping in view that many parts of the country face drought conditions and restoration of ponds, check dams, water tanks offers an age-old system of water conservation/ ground water recharging, instructions have been issued by the Ministry to the agencies responsible for construction of National Highways to advise their contractors/ construction agencies through their field officers to approach the concerned District Collectors/ Sub-collectors/ Water Conservation Departments to obtain a list of any such villages/ rural areas where de-siltation/ revival of existing ponds/ water bodies or digging of areas for creation of new water bodies are required and procure the requisite soil for road embankments by digging/ de-silting the existing village ponds/ water bodies, subject to such soil being found suitable for the embankment purposes. This arrangement would help in restoration of such dried-up water bodies without any charge and the contractors will be able to source the requisite soil without any payment.

  • Bridge cum Barrage

The Ministry has sought proposals from state PWDs for making bridge-cum-barrage on NHs so as to serve the dual purpose of crossing the water body and storing water on the upstream/ down stream side to serve as water reservoirs/ ground water recharging bodies. This will help better and optimum utilization of water for various purposes.

  • Swachhta Pakhwada

Swachhta Pakhwada was observed from 16th to 31st July, 2017 under the Swachh Bharat Mission (SBM). The main focus was to accelerate the pace of on-going Swachh Bharat Mission activities of construction of toilets and provision of litter-bins at 371 NHAI Toll Plazas, and additional activities including provision of temporary toilets and drinking water facilities at toll plazas, cleaning of roads and drains, proper management of road construction sites, removing litter etc.

  • Measures undertaken to combat vehicular pollution
    • Ministry has taken a landmark step towards reducing the vehicular pollution. Emission norms for Tractors and Construction Equipment vehicles have been notified for low Sulphur fuel, to be implemented from 01st October, 2020.
    • Ministry has also taken initiatives to promote alternate fuels in vehicles. The Electric vehicles are being given a big push by the Ministry. India’s first multi modal Electric Vehicle passenger transport project was launched in Nagpur with integrated solution of buses, taxis and E-Rickshaws.s2016012275924-e1453467976952.jpg
    • The E-Rickshaw, which has proved to be an effective substitute for manual Rickshaws, has emerged as a cost effective, environment friendly solution for improving last mile connectivity. These have been exempted from the requirement of obtaining permits. This has created a game changing scenario for promoting E-rickshaws. During the year to promote last mile connectivity for metro passengers, 1000 number of E-Rickshaws were launched at Gurugram, Haryana.

E- INITIATIVES

  • Project Monitoring Information System(PMIS)

A very effective Project Monitoring Information System (PMIS) has been introduced for tracking the status of all projects, preparation of reports and online upload of important project documents like DPRs and contract documents, etc.

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NHAI launches new website and PMIS Mobile App
  • INAM-Pro+ launched

INAM-Pro+, an upgraded version of INAM-Pro, was launched on 01 June 2017. More than 700 construction companies have used INAM-Pro during the last two years.

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With 37 Cement companies registered on it, the portal facilitated comparison of price, availability of materials etc. and made it convenient for prospective buyers to procure cement at reasonable rates in a transparent manner.

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INAM-Pro*, with enhanced features will reduce the time and efforts in preparation of proposals and bid submissions, and help increase efficiency and transparency in procurement of construction materials as a user can now place orders, obtain price quotes and track them in swift manner on this portal.

  • Bhoomi Rashi,  a web Utility for land acquisition

ln its attempt to move towards total e-governance and avoid delays, this Ministry has developed a Web Utility for land acquisition related processes including gazette notification. The web utility would be linked with the e-gazette platform of the Ministry of Urban Development, for e-publication of land acquisition related Gazette Notifications. The affected/ interested parties would also be given an access to the system so as to track the status of their acquired land and the CALA(s) in different states are being taken on board to deposit the compensation amount in the respective accounts of affected/ interested person

  • E-TOLLING
    • Implementation of Hybrid ETC system : Electronic toll collection (ETC) system, the flagship initiative of MoRT&H, has been implemented on pan-India basis in order to remove bottlenecks and ensure seamless movement of traffic and collection of user fee as per the notified rates, using passive Radio Frequency Identification (RFID) technology.  Indian Highways Management Company Limited (IHMCL), a Company registered under the Companies Act, has been incorporated for working as implementing agency for ETC with National Payment Corporation of India (NPCI) functioning as the Central Clearing House (CCH). 11 banks (including Public and Private sector banks) have been engaged as issuer Banks in order to issue FASTag to road users. A cashback of 7.5% is being offered for the FY 2017-18 in order to incentivize road users for usage of FASTag. In addition to FASTag, several other electronic means have also been employed to enable road users for payment of user fees such as use of PoS machines for collection of fees through Credit/ Debit cards, use of Pre-paid payment instruments etc.

  • As on 1-12-2017, a total of 7.7 lakh FASTag units are being used by road users. User fees collected through FASTag has also seen significant growth in terms of user fees collected and the penetration has increased from 179.1 Cr with 11.2% penetration in January 2017 to 285.3Cr with 18.5% penetration in the month of November 2017.
  • Other Initiatives
    • In order to further augment the services provided to FASTag users, all the lanes at the fee plazas are being converted to Hybrid lanes with one dedicated lane on either side, exclusively for FASTag users. This is to be completed by 31.03.2018.
    • All new vehicles of class M and N being sold after 1-Dec-2017 will be affixed with FASTag by the vehicle manufacturer or the authorized dealer, in order to enhance the penetration and usage of FASTg among road users.
  • Transport MMP: A successful and ambitious e-Governance Project : Transport Mission Mode Project, driven by Ministry of Road Transport & Highways,  has successfully automated RTO operations, set up a consolidated nation-wise transport database and has launched a host of citizen and trade-centric applications – contributing greatly towards the e-Governance initiative of the country under Digital India Program.
    • The salient aspects of this project are as under:
      • Two Flagship Applications under Transport MMP – Vahan and Sarathi Vahan deals with Vehicle Registration, Taxation, Permit, Fitness and associated services while Sarathi is related to Driving License, Learner License, Driving Schools and related activities
      • Implemented in 1000+ RTOs across 33 States/UTs – with state-specific rules, tax structures
      • Key users – RTOs, Govt, Police, Banks, Insurance, Citizens, Vehicle Manufacturers, Dealers
      • Country-wide data consolidated in National Register – updated through periodic replication
      • More than 19 crore Vehicle, 10 crore Driving License Records in the National Register
      • Portal/ API based Data access provided to Govt. Agencies, Security forces, Banks & Insurance
      • Vehicle and License search option to Citizen through Portal/ SMS/ Mobile app
      • Host of online G-B and G-C applications implemented at national and state levels
      • More than 50 Lakh National Permits issued to Goods Vehicles through Online National Permit Portal
      • Homologation (Approval) Portal for Model Certification and Inventory Management for Manufacturers
      • More than Rs. 10000 crores taxes collected by States online.
  • New Initiatives
    • Centralized, web-enabled Vahan and Sarathi version 4 (fully integrated online services) launched to replace current distributions
    • Multi-tenant deployment under NIC Cloud; High security, availability and data integrity
    • To enhance quality of citizen facilities, reduce/eliminate RTO visits, increase transparency
    • More than 600 RTOs across 15 states already migrated to the new system; rest to follow soon.
    • Integration with multiple Payment Gateways, IRDA, NCRB, CSC, SMS, Open API
    • Integration with Aadhaar for biometric authentication and eKYC; Integration with Digilocker
    • Features dashboards, smart card, document upload, online scheduling, configurable workflow
    • Online Dealer Point Application with integration with Vehicle Manufacturers’ inventory
    • Online Fancy Number application with e-auction and e-bidding facility
    • Complete range of online services related to Licensing, Tax Payment, transaction requests
    • System-based, Multi-lingual knowledge test for Learner License with advanced security options
    • Mobile app e-Challan and m-Parivahan– developed for comprehensive enforcement solution
    • Convenient, cost-effective, and practical solution with latest features and state-specific options
    • E-Challan being launched in multiple states by both Transport Enforcement and Traffic Police
    • mParivahan App – for information and comprehensive services to citizen
    • Major feature will be virtual documents like Driving Licence, Registration Certificate, Permits etc – as authorized soft copy
    • Virtual DL/RC can replace physical document/card with encrypted QR Code for authentication
    • Vision to bring transformational improvements in Transport Sector to facilitate citizens

INTERNATIONAL PARTNERSHIPS

  • MoU between India and Nepal

A MoU between India and Nepal for laying down implementation arrangement on cost sharing, schedules and safeguard issues for construction of a new Bridge over River Mechi at Indo-Nepal Border at an estimated cost of Rs.158.65 crores has been signed in August 2017. This will be funded by Government of India through an ADB loan. The new bridge is part of up-gradation of the Kakarvitta (Nepal) to Panitanki Bypass (India) on NH 327B, covering a length of 1500 mtrs. including a 6-lane approach road of 825 mtrs. Mechi Bridge is the end-point of Asian Highway 02 in India leading to Nepal and provides critical connectivity to Nepal.

  • MoU between India and United Arab Emirates (UAE)

To foster Bilateral Cooperation in the Road Transport & Highways sector, a MoU was signed in January, 2017 during the visit of Crown Prince of Abu Dhabi to India during the Republic Day Celebrations, 2017. The MoU envisages cooperation, exchange and collaboration between India and UAE for promoting increased investment in infrastructure development and logistics efficiency. A Joint Working Group (JWG) has been formed under the MoU from both the sides.

  • Motor Vehicles Agreement (MVA) between India and Afghanistan

A Motor Vehicles Agreement (MVA) for regulation of passenger, personal and cargo vehicular traffic between India and Afghanistan was signed in September, 2017 for enhanced regional connectivity through road transport and for promoting cross-border road transportation for increased trade with Afghanistan via the land route.

  • IMT Friendship Motor Rally-II, 2017

India-Myanmar-Thailand (IMT) Friendship Motor Rally-II, 2017, supported by MoRTH from Guwahati to Bangkok, was organized jointly by Kalinga Motor Sports Club (KMSC), Bhubaneswar and Mahindra Adventure, Mumbai. The Rally started from Guwahati, India on 24.11.2017 and proceeded through Myanmar to reach at Bangkok, Thailand on 03.12.2017 covering a distance of about 5000 kms to return to Guwahati on 22.12.2017. The essence of the event was to propagate IMT Motor Vehicle Agreement and the Governments initiative along the planned route.

  • Co-operation Framework Agreement between IAHE, India and IFEER, Morocco

A Cooperation Framework Agreement between Indian Academy of Highway Engineers (IAHE), India and Institute of Training in Engines and Road Maintenance (IFEER), Morocco IAHE, Noida has been signed on 14.12.2017 during the visit of Moroccan Delegation led by Mr. Abdelkader Amara, Hon’ble Minister of Equipment, Transport, Logistics and Water of the Kingdom of Morocco to Delhi. The Agreement envisages bilateral cooperation in the field of training in Engines and Road Maintenance of Moroccan Engineers.

OTHERS

  • Wayside Amenities

The National Highways Authority of India has started the process of developing wayside amenities at land acquired at 183 locations along side the national highways and has called for private participation for the same. The amenities will provide rest and refreshment for highway commuters during their journey.  There would be parking for cars, buses and trucks, restaurant/ food court, dhaba, fuel station, minor repair shop, rest rooms for passengers, dormitories for drivers, kiosks for sale of miscellaneous sundry items etc at these sites. The facilities having an area more than 5 acres will be developed under the brand name “HIGHWAY VILLAGE” and facilities on smaller area less than 5 Acres will be developed with brand name “HIGHWAY NEST.

  • Red Beacon Lights

With a view to strengthen healthy democratic values in the country, MORTH notified to do away with beacons of all kinds atop all categories of vehicles in the country except those connected with emergency, operation & relief services, etc .

  • Measures undertaken to Check Air Pollution in Delhi NCR Region

Directions have been issued to Project Directors, Contractors and field level officials working on highway projects around Delhi to take measures to check pollution arising from the construction work. The steps to be taken include sprinkling water at all construction sites and camps, covering of dumpers transporting the construction material/ waste including fly ash in the region, covering of exposed soil at the sites, paving/ greening the earthen shoulders and use of mechanised brooming of these road stretches. PDs have been directed to inspect the construction sites regularly to ensure that all pollution control measures are strctly complied with. Additionally, tight targets have been set for the completion of Eastern and Western Peripheral Expressways around Delhi. Once the two peripheral expressways are ready, vehicles destined for neighbouring states will be able to bypass Delhi and this will reduce vehicular pollution in Delhi to a large extent.

*****

 

Achievements of Ministry of Women & Child Development during 2017

Year End Review- 2017: Ministry of Women & Child Development

Government approves a Rs. 9000 Crore National Nutrition Mission

Pan-India Expansion of Beti Bachao Beti Padhao and Universalization of Scheme for Adolescent Girls

Pradhanmantri Matru Vandana Yojana for pregnant women and lactating mothers launched

117 New One Stop Centres and 10 new Women Helplines become operational in 2017

Maternity Leave extended to a period of 26 weeks

Online complaint mechanism for Sexual Harassment at Workplace ‘She-Box’ established

During the year 2017, the Ministry of Women and Child Development made tremendous strides with approval and launch of several of its big initiatives like National Nutrition Mission , pan-India expansion of Beti Bachao Beti Padhao, launch of Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana,  Universal Scheme for Adolescent Girls, launch of Mahila Shakti Kendra scheme and a large number of measures for promotion of safety of women and children as well as leveraging ICT to ensure transparency, quick delivery of services as well as preventing leakages, among others.

NATIONAL NUTRITION MISSION (NNM)

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Although malnutrition indices have shown a decline as per National Family Health Survey (NFHS) – 4 in 2015-16 over NFHS (3) in 2005-06, the overall malnutrition scenario still continues to look bleak across the country. In NFHS(4), 35.7% children under 5 years of age are underweight and 38.4% are stunted indicating a reduction from the previous NFHS – 3 which reported 42.5% children under 5 years of age as underweight and 48% stunted. Further, 22.9% women (15-49 years of age) have chronic energy deficiency (BMI less than 18.5) which is a decline from the previous NFHS-3 levels which reported 35.5% women having chronic energy deficiency.

 To deal with this problem of malnutrition on a war footing, the Government of India has approved setting-up of the National Nutrition Mission on 30.11.2017 with a three year budget of Rs. 9046.17 Crores commencing from 2017-18. It ensures convergence with various programmes i.e Anganwadi Services, Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana, Scheme for Adolescent Girls of WCD Ministry; Janani Suraksha Yojana (JSY), National Health Mission (NHM) of Ministry of Health & Family Welfare; Swachh Bharat Mission of Ministry of Drinking Water & Sanitation (DW&S); Public Distribution System (PDS) of Ministry of Consumer Affairs, Food & Public Distribution (CAF&PD); Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS) of Ministry of Rural Development (M/o RD); Drinking Water & Toilets with Ministry of Panchayati Raj and Urban Local Bodies through Ministry of Urban Development.

The Goals of NNM are to achieve improvement in nutritional status of Children from 0-6 years, Pregnant Women and Lactating Mothers in a time bound manner during the next three years beginning 2017-18 with fixed targets as under:

  1. S.No
  1. Objective
  1. Target
  1. 1.
  1. Prevent and reduce stunting in children (0-6 years)
  1. By 6% @ 2% p.a
  1. 2.
  1. Prevent and reduce under nutrition (underweight prevalence) in children (0-6 years)
  1. By 6% @ 2% p.a
  1. 3.
  1. Reduce the prevalence of anemia among young Children (6-59 months)
  1. By 9% @ 3% p.a
  1. 4.
  1. Reduce the prevalence of anemia among Women and Adolescent Girls in the age group of 15-49 years
  1. By 9% @ 3% p.a
  1. 5.
  1. Reduce Low Birth Weight (LBW)
  1. By 6% @ 2% p.a

One of the key activities in project is Information and Communication Technology enabled Real Time Monitoring (ICT-RTM) of ICDS. Accordingly, a customized mobile based Common Application software (ICDS-CAS) has been developed. Anganwadi workers feed the information regarding the services delivered, through the mobile devices installed with ICDS-CAS application. Information entered by the AWWs is visible on the dashboard that can be accessed at Block, District, State and Centre Level at www.icds-cas.gov.in.

The Roll-Out of ICT-RTM has been initiated in 6 states viz. Andhra Pradesh, Bihar, Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh and Rajasthan. A total of 70,000+ Smart Phone devices pre-installed with ICDS-CAS Software Application have been provided in these 06 States. 70,299 Anganwadi Workers have been trained in Phase-I in using the mobile application.

Pan-India expansion of Beti Bachao Beti Padhao (BBBP) Scheme after successful implementation in 161 districts

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Beti Bachao Beti Padhao is one the flagship programmes of the Government, launched by the Hon’ble Prime Minister, Sh. Narendra Modi on 22nd January, 2015 at Panipat, Haryana to address the declining Child Sex Ratio (CSR) and address other related issues of disempowerment of women. It is a tri-ministerial, convergent effort of Ministries of Women and Child Development, Health & Family Welfare and Human Resource Development with focus on Awareness and Advocacy Campaign; Multi-sectoral action in select 161 districts (low on CSR); Effective enforcement of Pre-Conception and Pre Natal Diagnostic Techniques (PC&PNDT) Act and enabling girls’ education.

The programme will be completing 3 years shortly. It has been successful in establishing improvement in CSR as a National Agenda. Encouraging trends are visible as per the latest HMIS data of M/o HFW for 161 BBBP districts for the time period between April-March, 2015-16 & 2016-17 indicating that, an improving trend in Sex Ratio at Birth (SRB) is visible in 104 districts, 119 districts have reported progress in first trimester registration against the reported Anti Natal Care registrations and 146 districts have reported improvement in institutional deliveries. In addition, as per Unified District Information System for Education (U-DISE) 2015-16, the girl’s enrolment in secondary education has increased to 80.97% against 76% in 2013-14. Construction of girl’s toilets in every school in selected districts has been achieved.

20_04_2016-beti19.jpgBased on the successful implementation in 161 districts, the Cabinet has approved the expansion of BBBP which would include Multi-sectoral intervention in 244 districts in addition to existing 161 districts, where physical implementation of the scheme will happen under the leadership of Collector/DM/DC. 235 districts are to be covered through Alert District Media, Advocacy and Outreach, thus covering all the 640 districts (as per census 2011) of the Country to have a deeper positive impact on Child Sex Ratio.

The Cabinet has approved the expansion for Pan India Coverage with a proposed outlay of Rs. 1132.5 Crore from 2017-18 to 2019-20, to be funded 100% by the Central Government.

Social Media Presence:

  1. BBBP Facebook Page: https://www.facebook.com/WCD.BetiBachaoBetiPadhao
  2. YouTube channel on BBBP (for films/ audio-video spots):www.youtube.com/user/BetiBachaoBetiPadhao
  3. Vikaspedia: http://vikaspedia.in/social-welfare/women-and-child-development/child-development-1/girl-child-welfare/beti-bachao-beti-padhao
  4. BBBP Mobile Application: https://apps.mgov.gov.in/descp.do?appid=792

Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY)

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The Hon’ble Prime Minister, on 31st December, 2016, had announced Pan-India implementation of Maternity Benefit Programme to eligible pregnant women and lactating mothers. The Programme has since been named as Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY). The eligible beneficiaries would receive cash incentive of Rs 6000/- as per approved norms during pregnancy and after institutional delivery.

The Scheme Implementation Guidelines, the software for roll out of the Scheme i.e. Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana – Common Application Software (PMMVY-CAS) and its User Manual have been launched on 01.09.2017 by the Hon’ble Minister (WCD). So far, Rs. 2016.37 Crores to all 36 States/UTs have been sanctioned under PMMVY during 2017-18 out of which Rs. 1991.72 Crores have been released till 20.12.2017.

Universal Scheme for Adolescent Girls

The Government on 16.11.2017 approved implementation of the Scheme for Adolescent Girls for out of school girls in the age group of 11-14 years to provide them nutrition support and vocational /skill training under non-nutrition.  The scheme  has been extended to additional 303 districts in addition to existing 205 districts across the country in 2017-18  targeting targets  to  provide  nutrition  to  40  lakh  out of school adolescent girls of age 11-14 years  in 2017-18. Against the allocation of Rs. 460 crore for Scheme for Adolescent Girls for 2017-18, Rs. 333.59 crore (as on 20.12.2017) have been released to States/UTs benefitting 81.97 lakh adolescent girls (as reported by States/UTs).

Women Welfare

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2017 saw the launch of Mahila Shakti Kendra scheme to address women’s issues at the village level. Over 300 thousand student volunteers are being sent out in 115 most backward districts under this new scheme. These volunteers, mobilised through local colleges, NCC, NSS, NYK etc., will work with local women to help them access government schemes for their benefit. District Level Centres for Women are also being set up in 640 districts under this scheme, which will provide convergence at the district level for all initiatives related to women. State Resource Centres for Women will be the state-level mechanism to ensure coordination between blocks, districts, state and centre.

The National Policy for Women, 2017 was drafted and is currently under consideration. The Policy has been prepared keeping in view the socio economic changes that have occurred since the last policy of 2001. It has taken into consideration multi-stakeholder feedback. Over 15,000 crowd-sourced ideas have been considered as part of the policy formulation process. The draft Policy addresses the diverse needs of women with regard to health including food security and nutrition; education; economy including agriculture, industry, labour, employment, NRI women, soft power, service sector, science and technology; governance and decision making; violence; creation of an enabling environment among others.

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In a game-changing initiative for working women, Maternity leave has been extended to a period of 26 weeks (~6 months). Passport rules have been amended in favour of single mothers. Now either mother or father’s name can be provided in application form and do not have to provide certificate of marriage/divorce during application.

In the last one year, 117 new One Stop Centres (OSCs) have become operational in addition to previous 51 OSCs. These 168 centres have offered support to over 70,000 women. They offer a single window to a range of services including access to police, medical, legal and psychological support and temporary shelter in 32 States/UTs. A further 150 OSCs are planned to be set up by 2020.

During 2017, 10 new Women Helplines with the uniform code 181 have been started taking total coverage now in 28 States. Over 11 lakh calls of women have been handled in the past one year or so.

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To help women report incidents of Sexual harassment at the workplace, an online complaint mechanism – SHe-Box – has been established. Any female employee in the country, whether employed by the government or private, can file an online complaint of sexual harassment through this portal.

An amendment has been proposed by the Ministry to the Prohibition of Child Marriage Act, 2006 so as to make child marriages henceforth void ab initio or invalid in law. This would be an effective deterrent to the practice. In 2017, the Ministry also took up the issue for dichotomy between IPC Section 375 (rape) and the Protection of Children Against Sexual Offences Act (POCSO), 2012. In accordance with this, a decision by the Hon’ble Supreme Court this year has criminalized sex between a man and his underage wife – a big success for the Ministry. Further, since Panchayats are usually aware of the child marriages occurring in their villages, the Ministry is working to prosecute panchayat members for promoting or permitting solemnization of child marriages.

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The Ministry has conceptualized, after extensive stakeholder consultations, a comprehensive Bill on Trafficking which clearly outlines and differentiates between Regulatory and Rehabilitation aspects. The Bill is under consideration.

A number of projects are being implemented under the Nirbhaya Fund, which is managed by the Ministry for the safety and security of women. Proposals amounting to more than Rs. 2,000 Cr. have been appraised in the last one year. A robust online MIS has been developed to track implementation of all the projects under Nirbhaya.

A focussed project for women’s safety in 8 prominent cities is being prepared under the Nirbhaya Fund, which will cover Delhi, Mumbai, Chennai, Kolkata, Ahmedabad, Bengaluru, Hyderabad and Lucknow.

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A project for Integrated Emergency Response Management under Nirbhaya is run by Railways. CCTVs and monitoring rooms are being installed at 983 major Railway Stations to provide 24×7 security to women passengers at stations and in trains.

Mahila Police Volunteers are being appointed to encourage women to report crime and are serving as role models in their communities. The scheme is currently operational in 5 States.

Central Victim Compensation Fund has been created under Nirbhaya, which is a corpus fund to support States/UTs for their Victim Compensation Scheme. This is helping ensure adequate and timely support for women survivors of crime and violence.

New Taxi Policy Guidelines have been put in place in consultation with the Ministry which have much improved safety measures for women.

To address the issue of easy availability of child sexual abuse material/imagery, an Inter-Ministerial Committee constituted by Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY), with membership of MWCD has issued an advisory to all Internet Service Providers within the country to prevent the distribution and transmission of child sexual abuse material. Efforts are being made to develop of a fast track mechanism (green channel) to complain and enable swift and speedy removal/blockage of online content offensive to women and children.

Public Grievance Cell is also active in the Ministry, which gives women and children citizens a way to send their grievances directly to the government. It has already processed ~18,000 complaints in the one year since its inception.

This year, the Ministry has taken many steps to build the capacities of Elected Women Representatives of Panchayati Raj Institutions so they may exercise their power effectively. These women are being trained through the National Institute of Public Cooperation and Child Development to take up their responsibilities as development planners.

Integrated Child Protection Scheme

The Ministry of Women and Child Development is executing an Integrated Child Protection Scheme for ensuring implementation of the JJ Act. The scheme has been brought under the Umbrella ICDS as its sub-scheme with the nomenclature as Child Protection Services. The erstwhile ICPS got EFC approval for the FFC period 2017-18 & 2019-20. The financial norms under the scheme were enhanced with the following important changes:

  1. The maintenance grant for children of Rs.2000/- has been increased by 8 % annually in homes, open shelter and SAAs.
  2. Increase in programmatic allocation for CIF Head Office & its regional centers, by Rs.9.70 crore for protection services of CHILDLINE.         

Cradle Baby Reception Center

The Ministry has stressed upon the need to place cradles at important locations such as hospitals, PHC, etc. to save the lives of unwanted new born babies and placing them in the adoption net managed by CARA with the intent to rehabilitate them in the familial care.

Celebration of Hausala 2017

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WCD Ministry celebrated the child rights week by hosting an inter-Child Care Institution festival, “Hausla 2017” for the children who reside in child care institutions between 16-20th November 2017. During the week-long celebration Children participated in various events like BalSansad, painting competition, athletics meet, football, chess competition and speech writing. More than 400 children from child care institutions across the country are participated in the event.

Khoya-Paya Portal

Citizen friendly web portal for Khoya Paya for reporting and searching missing children was launched in June, 2015.

Report of Missing & Sighted cases reported on Khoya-Paya Web Portal since 2nd June 2015 to 19thDecember, 2017:

  1. Total Missing/Sighted cases published on the portal:    4976
  2. Total Missing/Sighted cases rejected on the portal:       641
  3. Total Missing/Sighted cases closed on the portal:          4704
  4. POCSO:                                                                                              0
  5. Total hits :                                                                               212004

Railway CHILDLINE

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33 Railway stations which serve as ‘source’ and ‘destination’ centres for child trafficking have been identified & rescue services has been started in collaboration with Ministry of Railways. The initiative is currently operating at 33 railway stations. Proposal for extending the service in 55 more new railway stations have been approved by the Ministry.

Skoch Order of Merit Award to CARINGS

CARINGS has been rated on three parameters namely Early Bird, Jury Evaluation and Popular Vote and has been conferred the SKOCH Order-or-Merit Award during the 50th SKOCH Summit on 20th-21st December 2017.

Swadhar Greh

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Swadhar Greh Scheme  targets the women victims of difficult circumstances and envisages providing shelter, food, clothing and health as well as economic and social security for these women. At present total 561 Swadhar Greh are functioning in the country benefiting 17291 beneficiaries. In addition one Widow Home with the capacity of 1000 inmates fully funded by the Ministry has been constructed at Sunrakh Bangar, Vrindavan, Uttar Pradesh.

Constructionof Anganwadi Centre (AWC) Buildings under MGNREGS in convergence with Anganwadi Services (under Umbrella ICDS Scheme)

Joint guidelines for construction of 2 lakh Anganwadi Centre (AWC) buildings in most backward districts of 11 States (Andhra Pradesh, Assam, Bihar, Chattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha, Rajasthan, Telangana and Uttar Pradesh) by 2019 under MGNREGS in convergence with ICDS Scheme have been jointly issued by Ministry of Rural Development and WCD on 13.08.2015. Taking into consideration the acute shortage of AWC buildings (around 4.5 lakhs) in the country, the convergence scheme for construction of AWC buildings has been extended to all districts across the country and the target for construction of AWCs has been enhanced from 2 lakh to 4 lakh in the four years (by 2019).

Drinking water and sanitation facilities will be provided in these AWCs from the funds available with Panchayati Raj Institutions under 14th Finance Commission.

DBT onboarding of ICDS Scheme

The Ministry has identified two components of ICDS Scheme, viz, (i) payment of honorarium to Anganwadi Worker and Anganwadi Helpers; and (ii) providing supplementary nutrition to pregnant women & lactating mothers and children in the age group of six months to six years, for transfer of benefits/services, using Aadhaar as the primary identifier of beneficiaries and has issued Gazette notification in this regard on 6th February, 2017.This will help speed up delivery of services and prevent leakages.

Supplementary Nutrition (under the ICDS) Rules, 2017

In pursuance of the provisions contained in the National Food Security Act (NFSA), 2013, this Ministry has notified the Supplementary Nutrition (under Integrated Child Development Services Scheme) Rules, 2017 on 20th February 2017 to regulate the entitlement specified under provisions of said Act for every pregnant women and lactating mother till 6 months after child birth, and every child in the age group of 6 months to 6 years (including those suffering from malnutrition) for 300 days in a year, as per the nutritional standards specified in Schedule II of the said Act.

Revision of cost norms for Supplementary Nutrition: The Government has also revised the cost norms for supplementary nutrition with annual indexation under the Anganwadi Services.

Organisation of Women of India Festival 2017 (Dilli Haat, INA)

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To encourage women producers of organic products, a Women of India Festival 2017 from 1st to 15thOctober 2017 at Dilli Haat, INA, New Delhi. Over 530 women farmers and entrepreneurs from 25 States of India and the remotest parts of the country participated in the Festival. Total Sales of all participants during the 15 day festival were to the tune of Rs. 1.84 crores.

Sattvik Food Festival – 23rd to 25th December, 2017 (Ahmedabad) –WCd Ministry setup 50 stalls in the said event thereby providing an opportunity to 100 participants (especially women entrepreneurs and farmers who produce organic products) to exhibit and sell their products thus making another attempt towards financial inclusion of these participants.

Swachh Bharat Mission

The Ministry celebrated the Swachhta Pakhwada between 1st-15th March, 2017 to maintain universal sanitation and hygiene at Anganwadi Centres, all States/UTs were requested to give wide publicity to Government’s “Swachh Bharat Mission” and “Bal Swachhta Mission” by conducting activities on various themes [like Clean Anganwadis; Clean Surroundings e.g. Playgrounds; Clean Self (Personal Hygiene / Child Health), Clean Food, Clean Drinking Water, Clean Toilets] related to cleanliness and sanitation.

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The Ministry also organised “Swachhta Hi Seva” campaign from 15th Sept 2017 to 2nd Oct 2017 as envisaged by Hon’ble Prime Minister.The Ministry carried out activities such as: White-washing the AWCs involving local communities; Cleanliness in and around the AWCs; weeding out of obsolete records and documents; Review of toilets constructed; Involving private sectors under CSR for Swachhta; Swachhta Drive in and around AWCs on the bank of rivers in convergence with ‘Namami Gange’; Construction of toilets in rented AWCs or shifting of such AWCs to the building having toilet facilities, etc. to mention a few.

International Women’s Day Celebration

The International Women’s day was celebrated by the Ministry on 08.03.2017. whereby the Hon’ble President gave Nari Shakti Puraskars to eminent women and institutes, in recognition of their services, towards the cause of women empowerment.

Good Governance

Following the successful implementation of e-Office and Rapid Reporting System, the Ministry has implemented Government e-Marketplace (GeM) which ensures that all public procurements are made through GeM as per provisions of GFR 2017.

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वर्ष 2017 के दौरान पर्यटन मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियां

                       वर्षांत समीक्षा-2017 :पर्यटन मंत्रालय

यात्रा व पर्यटन प्रतिस्‍पर्धा सूचकांक 2017 में भारत 2013 की तुलना में  25 पायदान ऊपर पहुंचा

पर्यटन मंत्रालय ने ‘अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान का शुभारंभ किया

31 राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों में पर्यटन पर्व का आयोजन किया गया

पर्यटन के विकास व प्रोत्‍साहन से संबंधित राष्‍ट्रीय नीतियां व कार्यक्रमों के निर्माण के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी है। इसके लिए मंत्रालय केन्‍द्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों, राज्‍य सरकारों/केन्‍द्रशासित प्रशासनों तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों जैसे विभिन्‍न हितधारकों के साथ विचार विमर्श और सहयोग करता है। भारत सहित अनेक देशों में पर्यटन, आर्थिक विकास का मुख्‍य इंजन है तथा विदेशी मुद्रा कमाने का एक प्रमुख स्रोत है। यह बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने में सक्षम है।

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इनमें विशिष्ट रोजगार से लेकर अकुशल रोजगार तक शामिल हैं। रोजगार के अतिरिक्‍त अवसर सृजित करने में यह क्षेत्र महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। न्‍याय के साथ विकास प्राप्‍त करने में भी यह प्रमुख भूमिका निभा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्‍य भारत में पर्यटन के लिए सुविधाएं बढ़ाना तथा पर्यटन को बढ़ावा देना है। मंत्रालय की कुछ प्रमुख जिम्‍मेदारियां हैं- पर्यटन अवसंरचना का विकास, वीजा प्रक्रिया को सरल बनाना, पर्यटन सेवा प्रदाताओं द्वारा मानदंडों के अनुरूप सेवाएं प्रदान करना आदि।

  • यात्रा व पर्यटन प्रतिस्‍पर्धा सूचकांक 2017(टीटीसीआई) में भारत 2013 की तुलना में  25 पायदान ऊपर पहुंचा(टीटीसीआई)। टीटीसीआई रिपोर्ट 2017 में भारत का स्‍थान 40वां था, जब‍कि 2015 में यह 52वें तथा 2013 में 65वें स्‍थान पर था।

पर्यटन के आंकड़े

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  • पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 90.01 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए। जनवरी-नवम्‍बर 2015 की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2016 के दौरान 9.4 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी के साथ 77.83 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए।

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  • पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 में 58.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.17 लाख विदेशी पर्यटक ई-पर्यटन वीजा पर भारत आए।
  • पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 के दौरान 16.9 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी के साथ 1,60,865 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई।

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  • 2016 के दौरान घरेलू पर्यटकों की संख्‍या 1613.6 मीलियन दर्ज की गई। इसमें 2015 की तुलना में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

पर्यटन अवसंरचना का विकास

  • पर्यटकों को बेहतर पर्यटन अनुभव प्रदान के लिए पर्यटन अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी गई है। स्‍वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत थीम आधारित पर्यटन यात्रा मार्गों को विकसित किया गया है। 2017-18 के दौरान 824.80 करोड़ रुपये की लागत से 11 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना के अंतर्गत 5648.71 करोड़ रुपये की लागत से कुल 67 परियोजनाओं की स्‍वीकृति दी गई है।

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  • राष्‍ट्रीय तीर्थस्‍थल पुन:स्‍थापना और आध्‍यात्मिक, विरासत विकास मिशन(पीआरएएसएचएडी) योजना के अंतर्गत तीर्थस्‍थलों की पहचान करके समग्र विकास करने के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। 2017-18 के दौरान 98.84 करोड़ रुपये की लागत से कुल 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत अब तक 587.29 करोड़ रुपये की लागत से कुल 21 परियोजनाओं को मंजूर किया गया है।

पर्यटन केन्‍द्रों का समग्र विकास

  • पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन केन्‍द्रों पर विश्‍वस्‍तरीय सुविधाएं प्रदान करने के कार्य को प्राथमिकता में रखा है। इसके अन्‍तर्गत अवसंरचना का विकास, जनसुविधाएं, बहुभाषा केन्‍द्र तथा कौशल विकास जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने केन्‍द्र सरकार के अन्‍य मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों और उद्योग जगत के हितधारकों के साथ मिलकर ‘विरासत गोद लें’ नाम से एक कार्यक्रम लॉंच किया है। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और व्‍यक्तिगत स्‍तर पर भी इन स्‍थलों में सुविधाएं विकसित करने का कार्य किया जा सकता है। ऐसा करने वालों को ‘स्‍मारक मित्र’ के नाम से जाना जाएगा।
  • 2017-18 के बजट में यह घोषणा की गई थी कि राज्‍यों के साथ मिलकर विशेष पर्यटन क्षेत्र विकसित किए जायेंगे। राज्‍य सरकारों और निजी क्षेत्रों के साथ विचार-विमर्श करके पर्यटन मंत्रालय ने इस नई योजना के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। विशेष पर्यटन क्षेत्र के निर्माण से उस क्षेत्र का समग्र विकास होगा। जीविका के अवसरों का निर्माण होगा और स्‍थानीय लोगों के जीवन स्‍तर में वृद्धि होगी।

पर्यटन पर्व

  • अक्‍तूबर 2017 को 31 राज्‍यों व केन्‍द्रशासित प्रदेशों में पर्यटन पर्व का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य पर्यटन के लाभों को रेखांकित करना था। इसमें देश की सांस्‍कृतिक विभिन्‍नता को दर्शाया गया। ‘सभी के लिए पर्यटन’ इस कार्यक्रम की मुख्‍य अवधारणा थी। इस कार्यक्रम में सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल, पर्यटन प्रदर्शनी, हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों का प्रदर्शन, योग सत्र, पर्यटन व विरासत भ्रमण, छात्रों के लिए पर्यटन आधारित प्रतियोगिता, जागरूकता कार्यक्रम, सेमीनार और कार्यशालाएं शामिल थीं।

केंद्र, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेल मंत्रियों तथा सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन

  • जनवरी, 2017 में संस्कृति और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के साथ पर्यटन मंत्रालय ने गुजरात सरकार के सहयोग से धोर्दो, कच्छ के रन में केंद्रीय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेल मंत्रियों तथा सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से किया। सम्मेलन की थीम पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेलों को युवा भारत और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ बनाने की दिशा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विषयों के साथ समन्वय स्थापित करना है।

भारत पर्व

  • पर्यटन मंत्रालय को भारत सरकार द्वारा लाल किले पर गणतंत्र दिवस आयोजन एक भाग के रूप में 26 से 31 जनवरी, 2017 तक आयोजित भारत पर्व कार्यक्रम के लिए नोडल मंत्रालय बनाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न भागों से गणतंत्र दिवस परेड, झाकियां, सशस्त्र बल बेंडों द्वारा प्रस्तुति, फुड फेस्टिवल, शिल्प मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाऐंगे।
  • पर्यटन मंत्रालय द्वारा 5-7 दिसम्बर, 2017 तक गोवाहटी, असम में छठा अंतर्राष्ट्रीय हाट (आईटीएम) आयोजित किया गया।dqstoh_ueaaka8t.jpg

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट एक वार्षिक कार्यक्रम है जिसे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पर्यटन संभवनाओं को दर्शाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित किया जाता है। इस हाट में 29 देशों के 76 विदेशी क्रेता प्रतिनिधिमंडल, देश के विभिन्न भागों से पर्यटन क्षेत्र के 50 घरेलू भागीदार और पूर्वोत्तर राज्यों के 86 क्रेताओं ने भाग लिया। पूर्वोत्तर राज्यों के राज्य पर्यटन विभागों द्वारा एक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें संबंधित भागीदार राज्यों के पर्यटन संबंधी उत्पादों को दर्शाने के लिए सुंदर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया।

गोवा में तीन रेलवे स्टेशनों पर पर्यटन संबंधी सुविधाओँ का विकास

  • कोंकण रेलवे की यात्रा सुंदर परिदृश्यों के कारण देश में सबसे यादगार ट्रेन यात्राओं में से एक है। पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन दृष्टिकोण से कोंकण रेलवे के महत्व पर विचार करते हुए गोवा में मडगांव, कारमली और थिविम रेलवे स्टेशनों पर पर्यटन सुविधाओं का विकास करने के लिए 2499.98 लाख रुपये स्वीकृत किए है।

कांच की छत वाले डिब्बे

  • पर्यटन मंत्रालय अपनी रेल पर्यटन नीति के तहत तीन कांच वाले डब्बे बनाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है जिन्हें देश के प्राकृतिक दृश्यों वाले मार्गों पर संचालित किया जाएगा। कांच की छत वाले इन डब्बों में अधिक चौड़े आरामदायक बैठने के स्थान, बड़ी खिड़कियां और एक किनारे पर एक तरफ से दिखाई देने वाली खिड़कियां, कांच की छत, घूमने वाले सीट, स्वचालित सरकने वाले दरवाजे, छोटी पेंट्री और चौड़े दरवाजे लगाए गए हैं। कांच की छत वाले दो डब्बे 2017 में विशाखापत्तनम-अरकू घाटी और दादर से मडगांव मार्ग पर चलाए गए है। तीसरा कांच की छत वाला डब्बा जम्मू और कश्मीर राज्य में काजीगंड-बारामूला मार्ग पर चलने के लिए पुनः ठीक किया जा रहा है।
  • अप्रैल, 2017 में आईडब्लूएआई ने सेना के 8 ट्रकों को रो-रो जहाज के माध्यम से पांडु से डिब्रूगढ पहुँचाया।
  • मई, 2017 में आईडब्लूएआई ने पूर्वोत्तर विभाग की सहायता से एक रोड शो का आयोजन किया। इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मपुत्र नदी में कार्गो द्वारा यात्रियों के परिवहन की क्षमता को दिखाया गया था।
  • जुलाई, 2017 में आईडब्लूएआई ने धुबरी और हत्सिंगीमरी के बीच रो-रो सेवा प्रारम्भ की। इसके लिए रो-रो जहाज एम.वी.गोपीनाथ बोरदोलोई का उपयोग किया गया, जो एक साथ 8 ट्रकों और 100 यात्रियों को ढो सकता है।
  • सितम्बर, 2017 में बंग्लादेश में चूना पत्थर लदे कार्गो को करीम गंज से आसूगंज ले जाया गया।
  • पावर ग्रीड के विशाल ट्रांसफॉर्मर को ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू-2) के मार्ग से ले जाया गया। इसे रेल या सड़क के मार्ग से ले जाना संभव नहीं था।
  • ब्रह्मपुत्र में नदी पर्यटन काफी लोकप्रिय है। दो जहाजों-एमवी महाबहु और एमवी चाराईडिऊ- का सोऊलकूची और मजौली के मध्य संचालन किया जा रहा है। विदेशी और घरेलू पर्यटक इसका आनंद ले रहे है।
  • आईडब्लूएआई दो रो-रो जहाज प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। पहले जहाज की क्षमता 8 ट्रकों सहित 100 यात्रियों को ढोने की होगी जबकि दूसरे जहाज में 12 ट्रक और 100 यात्री ढोए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त आईडब्लूएआई चार अन्य रो-रो जहाज प्राप्त करने की प्रक्रिया में है, जिन्हें ब्रह्मपुत्र में संचालित किया जाएगा।

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Achievements of Ministry of Railways during 2017

Year End Review 2017 - Ministry of Railways

In the current year from 1st April, 2017 to 30th November, 2017 consequential train accidents decreased from 85 to 49 in comparison to the corresponding period of the previous year. 

Track Renewal speeded up- 2148 km old rails have been replaced with new rails upto Nov’17.

Ground-breaking ceremony of the Mumbai-Ahmedabad High Speed Rail Project (MAHSR) by Hon’ble Prime Minister of India and Hon’ble Prime Minister of Japan held in September, 2017.

Introduced First AC EMU consisting of 12-car (12 coaches) fitted with “Indigenous” 3-phase Propulsion system of Ms BHEL on Mumbai Suburban Section.

Mission Retro-Fitment to revamp passenger coaches launched to enhance the passenger experience. It will cover 45,000 Coaches.

14 Rajdhanis and 15 Shatabdi trains were identified to significantly improve passengers experience under “Project Swarn”. 

Host of Passenger Amenities and Digital Initiatives were taken during the year 2017.

All time record commissioning of Electric Traction of 2367 route kilometer was achieved.

Introduced and proliferated Global Positioning System (GPS) based ‘Fog Pass device’ which displays the name and distance of approaching signals and other critical signal landmarks in advance during train operation.

In order to improve the functioning of Railways, substantial financial and administrative powers covering a wide spectrum of working have been delegated by the Railway Board to General Managers (GM),Divisional Railway Managers (DRM) and field officials

PASSENGER AMENITIES, SERVICES

  • From 03rd Nov. 2017, Service started to provide information to passengers through Short Messaging Service (SMS) regarding status of delayed trains. Initially, all Rajdhani, Shatabdi, Tejas & Gatiman Trains covered. From 15th Dec, 2017, all Jan shatabdis, Duranto and Garib Rath trains have also been included. Now this service is available in around 250 trains.
  • Permitted m-Aadhar as one of the prescribed proofs of Identity for Rail Travel Purpose.
  • Extension of Scheme of Alternate Train Accommodation System aka VIKALP for the benefit of Waitlisted Passengers with effect from 1st April, 2017 in all Mail/Express trains.

  • Initiatives for The Senior Citizens -Persons With Disabilities: Indian Railways launched Quota of 2 Berths for Divyangjans & Senior Citizens in AC 3 class. This is in addition to existing quota of 4 berths in SL class.
  • Online booking of Retiring Rooms has been commissioned at 497 railway stations of Indian Railways. With a view to ensure optimal utilization of available accommodation in Retiring Rooms and Dormitory, instructions have been issued to Western Railway for booking of Retiring Room as well as dormitory for minimum duration of 3 hrs except for night booking where the booking will be done mandatorily from 2100 hrs to 0900 hrs. This facility is presently available at Mumbai, Ahmedabad, Vadodara and Surat stations.
  • New Catering Policy in Railways launched. 33% Sub Quota for Women in Allotment of each Category of minor Catering Units at All Category of stations has been provided under this policy. Roped in Self Help Groups To Make Local Cuisines Available Through E-Catering Services of its PSU IRCTC.
  • Initiated programme for 100% LED lighting at stations leading to improved illumination and passenger safety. Completed more than 3500 stations so far with a target to cover all Railway stations by March 2018.
  • Provision of mobile/laptop charging points at all railway platforms.
  • Provision of insect catchers at railway stations.
  • A new mobile app IRCTC Rail Connect launched. Aadhar linked user IDs have been allowed to book 12 e-tickets in one month as against 6 tickets for non Aadhar user IDs.
  • A new Integrated Mobile App ‘Rail SAARTHI’ launched which provides various services viz. Rail e-ticket booking, unreserved ticketing, complaint management, Clean my Coach, passenger enquiry etc.
  • Payment of ticket using UPI/BHIM App has been implemented at reservation counters as well as on e-ticketing website.

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  • Project Swarn – 14 Rajdhanis and 15 Shatabdi trains were identified to significantly improve passengers experience under “Project Swarn”.  To achieve the objectives under this Project, ‘staff behaviour’ was identified as an important parameter. The frontline staff of these premier trains was trained in various aspects such as catering, linen management and cleanliness.

HIGH SPEED RAILWAY/ MOBILITY

  • A road map developed to increase speed of trains by overcoming the existing impediments on Principal routes of the railways on Golden Quadrilateral(GQ) along with diagonals (Delhi – Mumbai, Delhi – Howrah, Howrah- Chennai, Chennai – Mumbai, Delhi – Chennai and Howrah – Mumbai) due to fixed infrastructure, movable infrastructure, and operational practices.

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  • Projects for two routes viz. New Delhi- Mumbai Central (including Vadodara- Ahmedabad) and New Delhi- Howrah (including Kanpur- Lucknow) for raising of speed to 160/200kmph have been included in WP 2017-18 at Rs. 18,000 crores approximately. Speed Enhancement project entails works such as through fencing, removal of level crossings, train protection warning system (TPWS), mobile train radio communication (MTRC), automated and mechanized diagnostic systems etc. which will considerably enhance safety and reliability. The main outcome of the implementation of the projects is increase in the maximum speed of the trains to 160/200 kmph. This will reduce the travel time of premium Rajdhani type trains to 12 hours as against the present travel time of 17 hours for Howrah Rajdhani and 15 hours 35 minutes for Mumbai Rajdhani.
  • Replacement of loco hauled commuter trains with MEMU/DEMU trains: MEMU trains have a potential for average speed increment of up to 20kmph in comparison to loco driven passenger trains.
  • Ground-breaking ceremony of the Mumbai-Ahmedabad High Speed Rail Project (MAHSR) by Hon’ble Prime Minister of India and Hon’ble Prime Minister of Japan was held in September, 2017. Managing Director and other Directors in the National High Speed Rail Corporation Limited (NHSRCL), constituted for implementation of the MAHSR project, have been appointed.

Following Semi High Speed Studies are underway:

  • Delhi-Chandigarh (244 km): Final report of feasibility cum implementation study of New Delhi-Chandigarh Corridor for raising the speed of passenger trains to 200 kmph by SNCF/France has been received. Report under scrutiny.
  • Nagpur – Secunderabad (575 km): A Protocol under co-operation MoU has been signed between Ministry of Railways and Russian Railways for carrying out feasibility cum implementation study. Work started in June 2016 and progressing as per schedule.
  • Chennai- Kazipet by German Railways- Joint declaration of intent has been signed between both the parties on 10/10/17 for raising the speed of passenger trains to 200kmph on the existing route on 50:50 cost sharing basis. The feasibility study shall be carried out after signing a separate agreement, which is under finalization.
  • Feasibility study for High Speed Rail on Mysuru-Bengaluru-Chennai through Government to Government (G2G) with the Government of Germany has commenced.

SAFETY

  • In the current year from 1st April, 2017 to 30th November, 2017 consequential train accidents decreased from 85 to 49 in comparison to the corresponding period of the previous year.
  • During the year from January to December 2017 to give thrust to safety related issues, Safety drives were launched on all zonal railways with a view to prevent accidents.
  • Emphasis on night inspections and ambush checks regularly by officers and supervisors, review of fracture prone locations, frequent and intensive footplate inspection, etc.
  • Focus on monitoring practices associated with booking, counselling, training, PME, performance evaluation etc. of crew in view of SPAD by Loco Pilots.
  • A special safety drive regarding – “Working on running lines” and “Safety at work sites” for a period of fifteen days to check incidences of uncoupling in passenger train (Locomotive Getting Separated from Formation).
  • Gate Mitras were deployed at all unmanned level crossings (UMLCs) on Broad Gauge instead of only identified UMLCs in order to enhance safety.
  • Under Rashtriya Rail Sanraksha Kosh (RRSK) a provision of `20,000 crore has been made in 2017-18 out of ‘RRSK’ to fund essential works for ensuring safety.

High Level Safety Review Committee (HLSRC): A High Level Safety Review Committee under the Chairmanship of Dr. Anil Kakodkar, former Chairman, Atomic Energy Commission was constituted on 16.09.2011 to go into all technical and technology related aspects in connection with safe running of train services in the country. The Committee submitted its Report on 17.02.2012.  All the 106 recommendations of the Committee have since been deliberated upon and 87 recommendations have been found fully/partially acceptable and 19 have not been found acceptable to the Ministry of Railways.

  • Of the accepted recommendations, 65 have been fully/partially implemented. The remaining recommendations are at various stages of implementation.
  • Target of Eliminating All Unmanned Level Crossing preponed to 2018. Till the time this is achieved, in the interim period, Indian Railways decided to deploy Gate Mitras. Gate Mitra is an initiative where a person will be deployed at a UMLC, and would alert road users about approaching trains. All UMLCs on Broad Gauge as on November 2017 were provided with Gate Mitras.
  • Track Renewal speeded up: 2148 km old rails have been replaced with new rails upto Nov’17.Progress during corresponding period last year was 1624 km between April to Nov’16.
  • Self-Propelled Ultrasonic Rail Testing (SPURTZ Car) is under procurement and trial of Ultrasonic Broken Rail Detection System is underway. Train Protection and Warning System (TPWS) is under implementation on Suburban/High- density Routes.
  • Decided to switch over to 100 % manufacture of Linke Hofmann Busch (LHB) coaches as these have numerous advantages over ICF coaches including higher speed and safety especially during derailment and collisions. Completely switch over to LHB coaches production from 2018-19.

SYSTEM IMPROVEMENT AND INNOVATION

  • Comprehensively revised categories of various Railway Stations. In new scheme of station categorization, even the small stations, because of footfall criteria, to get the higher level of passenger amenities leading to better passenger satisfaction.

  • Introduced and proliferated Global Positioning System (GPS) based ‘Fog Pass device’ which displays the name and distance of approaching signals and other critical signal landmarks in advance during train operationAt present total 7263 Fog Pass Devices have been procured and being used in NR, NER, NCR, ECR, NFR& NWR which are the most fog affected Railways.
  • Major Transparency measures by RDSO:
    • “New Online Vendor Registration System” has been launched by RDSO with effect from 8th Nov 2017– With the new online system implemented by RDSO since 8th Nov 2017, the Vendor can now deposit registration fee, submit documents, download technical drawings & specifications and interact with RDSO online.
    • All RDSO controlled items have now been listed on RDSO website with specific timelines for Vendor Registration process for each individual item. RDSO will endeavour to complete the registration process for which the vendor applies within defined timelines.
    • Innovation Challenge: An Innovation Challenge has been conducted to invite ideas and to augment the pace of Indian Railways operational improvements through innovative methods. Innovation Challenges attracted a huge response and a total of 4683 entries were received.  RDSO has been entrusted the task of conducting the screening and evaluation process.  The Innovation Challenge has been conducted in the following 06 areas:
      • Accessibility to trains from low level platforms
      • Increasing capacity of coaches
      • Digital capabilities at stations.
      • Design of Wagons for efficient loading and transportation of new commodities.
      • New Idea/ Suggestion to improve the working of Indian Railways.
      • Increasing Non-fare revenue of Indian Railways.

TRANSPARENCY

  • Online Tracking of Contractor’s Bill enabled on single website – IT enabled real-time Web based system has been developed for tracking bill payments. This system enables the registered vendor/contractor to track status of bills from the time they are submitted to the Railways till the final payment is made.
  • Implementation of 100% Digitization of Receipt Note.
  • Digital finalization of tenders – Total 54700 tender cases finalized this year digitally through Indian Railway E-Procurement portal www.ireps.gov.in.
  • More than 1000 e-Reverse Auction tenders opened on Indian Railways web portal during last 1 year.

NEW TRAINS

  • India’s First Tejas Express Between Mumbai and Karmali inaugurated.

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  • More Than Three Decade Old Demand for an “Express” Train for People of Kirandul in Dantewada District of Chhattisgarh fulfilled. Extended Train No. 08152 Visakhapatnam – Jagdalpur Upto Kirandul.
  • Prime Minister of India & Prime Minister of Bangladesh Jointly along with Chief Minister, West Bengal Flagged off New Cross-Border Train between India & Bangladesh, “Kolkata-Khulna Bandhan Express” from Kolkata.

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  • Introduced First AC EMU consisting of 12-car (12 coaches) fitted with “Indigenous” 3-phase Propulsion system of Ms BHEL on Mumbai Suburban Section.

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  • Vistadome Tourist Coach with glass walls launched at Vishakhapatnam to run between  Visakhaptnam and Araku Valley. The Vistadome coach has features like glass roof, LED lights, rotable seats, GPS based info system etc will offer to tourists to enjoy scenic beauty not only at destination but also along the journey.
  • Introduced Train No.22165/22166 Bhopal-Singrauli  Express (Bi-Weekly)
  • Introduced Train No 22167/22168 Singrauli-H. Nizamuddin Express(Weekly)
  • Introduced Train No 18109/18110 Jammu Tawi-Rourkela Express (Daily) Upto Sambalpur:
  •  Introduced Train No 22913/22914 Bandra(T)-Patna Humsafar Express (Weekly)
  •  Introduced Train No 22921/22922 Bandra(T)-Gorakhpur Antyodaya Express (Weekly)
  • Introduced Train No 22434/ 22433 Anand Vihar (T) To Ghazipur (Bi-weekly) via Kanpur, Allahabad:
  • Introduced New DEMU Service between Baiyappanahalli-Whitefild-Baiyappanahalli.
  • Introduced Train No 22163/64 Bhopal- Khajuraho Mahamana Intercity Express (Daily),
  • Introduced Train No 22833/34 Bhubaneswar- Krishnarajapuram Humsafar Express  (Weekly)
  • Introduced Train No 17323/17324 Hubballi – Varanasi – Hubballi Express (Weekly)
  • Introduced Train No 17325/17326 Hubballi – Mysuru – Hubballi Express (Daily)
  • Introduced Train No 16791/16792 from Punalur to Palakkad.
  •  Introduced Train No 22992/22991 Veraval – Bandra Terminus Super Fast Express
  • Introduced Train No 22994/22993 Mahuva – Bandra Terminus Super Fast Express
  • Introduced Train No 19030/19029 Mahuva – Bandra Terminus Super Fast Express
  • Introduced Train No 58653/58654 Ranchi-Barkichanpi Passenger upto Tori
  • Introduced Train No Train No 14715/14716 Sri Ganganagar – Tiruchirappalli Humsafar Express (Weekly) (via Krishnarajapuram, Pune, Ahmedabad) the fourth Humsafar clan of trains

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  • Introduced Train No Train No 22877/22878 Ernakulam – Howrah Antyodaya Express (Weekly) (via Salem, Katpadi, Visakhapatnam) first Antyodaya clan of trains.
  • Extended Train No. 19653/19654 Ajmer Ratlam Express Extended up to Indore.
  • Extended Frequency of Train No.22419/22420 Ghazipur City-Anand Vihar (T) Suhail Dev Express from tri-weekly to four days a week.
  • Extended Frequency of Train No.19041/19042 Bandra (T)-Ghazipur City Express (weekly to bi-weekly).
  • Extension of Train No.58429/58430/58431/58432 (Khurda Road- Bolagarh) passenger trains extended upto Nayagarh Town.

INFRASTRUCTURE

  • The first Phase of the Station Redevelopment Program comprising 23 major Railway Stations of Indian Railways was launched.
  • Mission Retro-Fitment to revamp passenger coaches launched to enhance the passenger experience. It will cover 45,000 Coaches.

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  • Significant Step taken towards Providing Rail Connectivity for Chardham Pilgrimage in the State of Uttarakhand through commencement of final location Survey.
  • Record Commissioning of sections on Electric Traction: During the calendar year 2017, all time record commissioning of Electric Traction of 2367 route kilometer was achieved. A target for electrification of 4,000 route kilometer has been set for achievement during financial year 2017-18.
  • Major Strategic Decisions to speed up 100% Electrification work-
    • For Rail Electrification projects, Provision of “Deemed approval” has been made for various drawings/schematic/plan wherever approving authorities do not take decision within specified timelines.
    • In future, doubling, new line and gauge conversion projects for the sections shall be simultaneously assessed with electrification.
    • To avoid multiplicity of agencies involved in execution, it has been decided that “Henceforth, where electrification and doubling works have been sanctioned both works should be executed by the same agency.
    • It has been decided to go for large size contracts on EPC mode on case to case basis, preferably adopting EPC (turnkey) based contracting system or large composite item rate contract in package size of 300/500/1000/1500RKMs.
  • Opening of Major Routes On Electric Traction: During the calendar year 2017, commissioning of missing links have resulted in better linkages and seamless connectivity on following routes:
    • Commissioning of Andal-Sitarampur section,
    • Commissioning of Indore-Mhow section.
    • Commissioning of Singapur Road – Lanjigarh – Titlagarh section
    • Commissioning of Lapanga – Sambalpur section.
    • Commissioning of Una Himachal – Amb Andura section.
    • Commissioning of Lalitpur – Udaipura section.
    • Commissioning of Walgaon – Narkher section.
    • Commissioning of Manpur-Tilaiya-Bakhtiyarpur section.
    • Commissioning of Ramanagaram-Mysore section.
  • Energy Management: Dedicated transmission line network of railway-8000 Km network planned. Existing transmission line network from Dadri-Kanpur extended up to Allahabad. Work in progress for Allahabad-Mughalsarai transmission line network.
  • Electric Locomotive Factory at Madhepura in Bihar (Make in India project)- First phase of construction of factory has been completed. First prototype locomotive under assembly at the factory and expected to be rolled out by Feb.’18 as per time line. Manufacturing of High Horse Power Freight locomotives (9000 hp) for hauling longer and heavier trains with improved mobility. Manufacturing of High Horse Power Passenger locomotives (9000 hp) for improving average speed of coaching trains in this Locomotive Factory at Madhepura.
  • Technological Interventions for Crew Comfort inside locomotives:
    • Water Closets in Locomotives
    • Cab air conditioners
    • Improved Cab Ergonomics and layout
  • Distributed Power Wireless Control System (DPWCS) for hauling longer and heavier freight trains with two or more locos in between train configuration.
  • Technological Interventions for Safety – Crew Voice and Video recording system.
  • New Era of Green Technology (HOG power supply) with use of Hotel load converter on electric locomotives in WAP-7 locomotives and in WAP-5 locomotives. Provision of Hotel load converter on locomotives, eliminates the use of diesel generator cars, thereby replacing power cars by passenger carrying coaches.

DIGITAL INDIA INITIATIVES

  • For incentivizing people to opt digital transactions, IR has  withdrawn service charge from booking of e-tickets, offered free insurance of Rs 10 lakhs on e-tickets and 0.5% discount on Season Tickets purchased through digital means etc.
  • Around 9,500 POS machines have been installed at various ticket booking counters to accept payment from Debit/Credit cards.  No MDR is charge for booking through Debit cards at ticketig counters.
  • The facility of payment through UPI/BHIM has been provided at PRS counters.
  • Rail Cloud Project launched – To achieve the goal of single digital platform for Indian Railways.

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  • Railsaver App developed and its utilization popularized with the railways.
  • Implementation of e-office in the Railway Board.
  • Implementation of on-line submission and assessment of Annual Performance Appraisal Report (APAR) through SPARROW for officers of Indian Railways.
  • Digitization of old Annual Performance Appraisal Reports (APARs) of Group-A Officers of Indian Railways.
  • Launching complimentary Wi-Fi facility at National Rail Museum (NRM), New Delhi, first museum in India to have such facility.
  • Agreement with M/s Google Cultural Institute (GCI) for digitization of Railway Heritage and bringing them online for universal access and creating awareness among future generations.
  • In collaboration with Google Cultural Institute , launched an innovative programme for dissemination of India’s rich cultural heritage to railway passengers through video screens at Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus, Mumbai.
  • In collaboration with ISRO, expediting use of space technology on Indian Railways for various projects like Real Time Train Information System, Advance Warning System at Unmanned Level Crossing Gates
  • In order to promote digital payments, preference in Upgradation to those passengers who have booked ticket through digital mode of payment has been implemented.

FREIGHT

  • Liberalised Automatic Freight Rebate Scheme in Empty flow Directions has been issued w.e.f.01.01.2017 by modifying earlier TEFD Scheme.
  • Policy on Long Term Tariff Contract with key freight customers has been issued on 30.3.2017. Total 24 proposals were received and out of them, 21 proposals / agreements have been signed. The major companies who have entered into contact with Zonal Railways under this scheme included TATA Steel, Ultra-tech Cement, India Cement, Jindal Steel and Power, J.K. Cement, Ambuja, ACC etc.
  • Double stack dwarf container introduced as a new delivery model to increase Loadability and attract new traffic under wire.  New tariff policy granting 17% rebate to Double Stack Dwarf Container trains has also been issued on 14.07.2017.
  • Right Powering of freight trains: To provide high speed to freight trains and ensure swift movement of goods, New policy introduced for right powering arrangement for freight trains with a horse power to trailing load ratio of 1.5-2.0 for improving average speeds.
  • Mission Hundred’ – Commissioning of PFTs/Sidings- 45 terminals have been commissioned during 2016-17. Out of the remaining 55 terminals, so far 13 terminals have been commissioned in 2017-2018.

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FINANCE

  • Inaugurated the following policy initiatives for non fare revenue viz., Policy Initiatives of Increasing Non Fare Revenue like Out of Home Advertisement,  Content on demand, Branding of Trains, Non-fare Revenue Policy, ATM Policy and  Initiatives promoting ease of ticketing through digital transactions (for reserved as well as unreserved passengers)
  • Savings of Rs. 512 Cr.(approx.) has been achieved since July’17 by adopting best procurement policies/practices like Design modification, change in specification, challenging consumption, Long Term Contracting, Reverse Auction, improving vendor base etc.

 MAKE IN INDIA INITIATIVES

  • Policy on Public Procurement (Preference to Make in India) dated 15-06-2017 implemented.
  • Policy for providing Preference to Domestically Manufactured Iron & Steel Products (DMI&SP) implemented.

  • Policy for preference to Domestically Manufactured Electronic Goods issued by The Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) in October, 2017.
  • Relaxation from condition of prior turnover and prior experience for Startups and Medium Small Enterprises.
  • Vendor meets organized on PAN-India basis at 12 prominent locations across the country in association with MSME & SIDBI during October & November 2017 with special emphasis on development of indigenous firms.

SECURITY

  • Seats earmarked for Security Personnel of escorting teams in the trains. Berth no.63 in S1 Coach of the train earmarked for Security Personnel so they can be located easily in case of need.
  • Railway Protection Force decided to extend Child Rescue Campaign in 47 additional Railway Stations taking total to 82 Railway Stations. The campaign had been successfully implemented in 35 existing Railway Stations. RPF rescued around 21,000 children in last three years.

GREEN INITIATIVES

  • Dedicated Green Corridor in Bhagalpur- Banka section (Bihar) of Malda Division.
  • Dedicated Green Corridor-Madhupur-Giridih section of  Asansol Division.

  • 500 Kwp Solar Roof Top System commissioned at Mysuru Work Shop.
  • Indian Railways Organization for Alternate Fuel (IROAF) sets gold standards by winning Golden Peacock Award for Eco Innovation for the year 2017 for introducing eco friendly and cost saving Dual Fuel 1400 HP Diesel engines on DEMU trains.
  • First DEMU Train with Solar powered Coaches inducted into service of the Nation.

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  • New Water Management Policy with respect to consumption and utilization in Railways was released.
  • GreenCo Certificates developed by CII given to Three Units of Indian Railways viz. Diesel Locomotive Works (Varanasi), Perambur Carriage Works (Chennai), Lalaguda Carriage Workshop (Hyderabad)
  • Various new initiatives taken for improving energy efficiency- Replacement of all electrical equipments at railway stations and service buildings with energy efficient BEE star rated equipments under ESCO model, 100% LED lighting at all the railway stations, service buildings, workshops, Sheds and other installations etc. With this, savings of Rs. 125 Cr. achieved this year by saving about 7% energy.
  • Building Management Information System (BMIS) implemented at Rail Bhawan including LED lights which shall save about Rs.30 lacs per annum in the energy bill.
  • Policy for use of energy efficient equipments by all vendors issued to the railways.
  • More than 60 MW of solar & wind power plants have already been installed covering 270 stations & 120 administrative buildings & hospitals and further orders for about 150 MW have been  placed for solar plants on roof tops of Railway Buildings.

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HUMAN RESOURCE

  • Project Saksham Launched : The decision of imparting a week-long training in skills and domain knowledge to all the employees of Indian Railways had been taken. The focus of all such training is to ‘make a difference’ to the job performance.
  • Station Directors in large Stations have been now given the powers of the Branch Officers in the divisions to enable them to take decisions for smooth operations.
  • Employee Charter was released. An employees’ charter is notified for ensuring time bound redressal of railways employees’ issues related to dues, entitlements and grievances.
  • NIVARAN- Portal for Grievance Redressal of Railway Employees was launched.
  • Cashless treatment Scheme in Emergency (CTSE) Scheme was launched for Railway Employees.
  • DRMs /Chief Workshop Managers (CWMs) have been given powers to re-engage retired railway employees up to 62 years of age against vacancies.
  • NRTU is being established at Vadodara, Gujrat to give impetus to research and training in rail transport.

REFORMS

  • In order to improve the functioning of Railways, substantial financial and administrative powers covering a wide spectrum of working have been delegated by the Railway Board to General Managers (GM),Divisional Railway Managers (DRM) and field officials.
  • Number of posts of Additional Divisional Railway Managers (ADRMs) in all the railway division offices for better supervision.
  • A Five Member Committee of senior officials of Railway Board to suggest measures for making substantial improvement in work sites safety over all Indian Railways network.

SPORTS

  • Ministry of Railways felicitated Indian Railways Women Cricketers of Indian Women Cricket Team for their outstanding performance in Women World Cup 2017. It is a moment of great pride for Indian Railways that of the squad of 15 players of Indian Women Cricket Team, 10 Women Cricketers were from Indian Railways.

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  • Mirabai Chanu, Indian Railways Sportsperson, became the first Indian in over two decades to claim a gold medal at the World Weightlifting Championship in Anaheim, USA.

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MOUs

  • MoU signed between Rail Land Development Authority (RLDA) & IRCON International Limited for Redevelopment of Delhi Safdarjung Railway Station.
  • Memorandum of Understanding (MoU) / Memorandum of cooperation (MoC) with Foreign Ministries/Railways for Technical Cooperation in Railway Sector.
  • MoU with UNESCO, New Delhi for preparation of Comprehensive Conservation Management Plan (CCMP) of Darjeeling Himalayan Railway (DHR), UNESCO World Heritage Site. This will boost conservation of DHR and promote hill railway tourism.
  • MoU between Rail Land Development Authority (RLDA), an institution under Ministry of Railways and National Building Construction Corporation (NBCC), a PSU of Ministry of Urban Development regarding redevelopment of identified railway stations.
  • MoU with Taiwan for bilateral cooperation in promoting rail heritage on both sides.

MISCELLANEOUS

  • Century old Steam Loco EIR-21 (year built 1855) has been revived and steamed at Chennai.
  • NG Steam Loco ZB-66 has been revived and steamed up at Kalka Shimla Section after a gap of several decades.
  • Neki ki Rail”  a seminar for improving the Railway’s social footprint and impacting society in a positive manner Organised by Ministry of Railways at National Rail Museum.

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  • Notification for setting up of Rail Development Authority (RDA) issued in May, 2017. In order to operationalise the Authority, process for appointment of Chairman and Members of the RDA has been initiated.
  • Promotion of Tribal /local Art at Stations: To showcase tribal/local art at stations,  select tourist stations at 24 locations were identified and Zonal Railways concerned were requested for aesthetic up gradation of these stations with local/tribal art.

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  • The ‘Fairy Queen, the oldest surviving functional steam engine in the world commenced its journey from National Capital Delhi to Rewari, Haryana after a gap of 5 years. This train, which is a great attraction among steam engine lovers across the globe, will run between Delhi Cantt. Station and Rewari

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