वर्षांत समीक्षा- नीति आयोग

पहल एवं कार्यक्रमः

  1. महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्राप्त परिणामों के आधार पर प्रदेशों के प्रदर्शन का आकलन एवं उनका अंकन

नीति आयोग ने योजनाओं के परिणामों पर ज़ोर देते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, जल एवं संधारणीय विकास लक्ष्य (एसडीजी) जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में वार्षिक बढ़ोतरी संबंधी नतीजों के मापन के लिये अपने सूचीपत्रों को अंतिम रूप दे दिया है ।

अस्पतालों के प्रदर्शन की निगरानी एवं आकलन के लिये प्राप्त परिणामों पर विशेष ध्यान देते हुए ज़िला अस्पताल सूचकांक का विकास किया गया था । विश्व स्वास्थ्य दिवस 2016 पर एक निर्देश पुस्तिका जारी की गई थी । वर्तमान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से कार्यान्वयन का चरण जारी है एवं भारतीय सांख्यिकी संस्थान आंकड़ों के विश्लेषण में सहायता कर रहा है ।

फरवरी 2018 में नीति आयोग ने ‘स्वस्थ प्रदेश, प्रगतिशील भारत’ नाम से रिपोर्ट तैयार की थी जिसे ‘स्वास्थ्य सूचकांक’ के नाम से भी जाना जाता है । जून 2018 में समग्र जल प्रबंधन सूचकांक भी जारी किया गया था । संबधित क्षेत्रों में प्रदेशों के प्रदर्शन की प्रगति का आकलन करने के लिये ‘स्कूली शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक (एसइक्यूआई)’, ‘भारत संधारणीय विकास लक्ष्य सूचकांक’ एवं ‘डिजिटल रूपांतरण सूचकांक (डीटीआई)’ का कार्य जारी है ।

(ii) मानव पूंजी रूपांतरण के लिए स्थायी कार्यक्रम (साथ)

‘साथ’ कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र संकेतकों में सुधार एवं तकनीकी मदद प्रदान करने के लिये तीन वर्ष तक प्रदेशों का साथ देकर दो महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों – शिक्षा एवं स्वास्थ्य में रूपांतरण की शुरुआत करने के लिये है । इस कार्यक्रम की शुरुआत राज्यों के चयन से एक अनोखे चैलेंड मेथड के माध्यम से हुई थी । राज्यों के रूपांतरण के लिये रोडमैप को प्रारंभ किये गए प्रत्येक कार्यक्रम के लिये त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित कर अंतिम रूप दिया जा चुका है ।

विद्यालयों को मज़बूती देने एवं समेकन के लिये एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसके अंतर्गत संसाधनों एवं क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल के लिये 26,000 विद्यालयों का एकीकरण किया गया है । अपनी स्वास्थ्य रक्षा प्रदान करने की क्षमता एवं महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिये उत्तर प्रदेश, असम एवं कर्नाटक का चयन किया गया । शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश, ओडीशा एवं झारखंड का चयन किया गया ।

(iii) एक भारत श्रेष्ठ भारत

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एक भारत श्रेष्ठ भारत (इबीएसबी) की संकल्पना सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं शिक्षा के माध्यम से दीर्घकालीन अंतर्राज्यीय सम्पर्क के ज़रिये देश को एकसूत्र में पिरोने, सुदृढ़ बनाने एवं जीवन के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता लाने के लिये तैयार की गई थी । इस बारे में छह समरूप राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के मध्य समझौता-पत्रक पर हस्ताक्षर किये गए। उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कार्यक्रम को जारी रखा ।

अधिक समेकन के लिये आमतौर पर भारत भर में इस्तेमाल में लिये जाने वाले संवाद-विषयक 100 वाक्यों की पहचान की गई, 22 भारतीय भाषाओं में उनका अनुवाद किया गया, एक पुस्तक का रूप दिया गया एवं व्यापक रूप से प्रसारित किया गया ।

(iv) अवसंरचना विकास हेतु राज्यों के लिये विकास प्रोत्साहन सेवाएं (डीएसएसएस)

केंद्र राज्य साझेदारी का नमूना स्थापित करने एवं ढांचागत विकास के क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की साझेदारी की पुनर्स्थापना करने के लिये अवसंरचना विकास हेतु राज्यों के लिये विकास प्रोत्साहन सेवाएं (डीएसएसएस) प्रारंभ की गई थी, ताकि परियोजनाएं जोखिम से स्वतंत्र हो पाएं, परियोजना विकास के महत्वपूर्ण संरचनात्मक मसलों का समाधान हो पाए एवं सांस्थानिक एवं संगठनात्मक क्षमताओं का निर्माण हो पाए ।

बीस राज्यों से 450 से अधिक परियोजनाएं प्राप्त हुई, जिनमें से चुनौतीपूर्ण तरीक़े से संरचना तैयार करने व कार्यान्वयन के लिये 8 प्रदेशों से 10 क्षेत्रों में 10 परियोजनाओं का संक्षिप्त सूची में नाम रखा गया ।

(v) स्वास्थ्य में सार्वजनिक निजी क्षेत्र की साझेधारी

स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोकथाम, निदान एवं कुछेक असंक्रामक प्रक्रियाओं जैसे हृदय विज्ञान, कर्करोग विज्ञान, फेफड़ों संबंधी विज्ञान में सरकार के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु राज्यों की सहायता करने के लिये टायर-2 एवं टायर-3 के शहरों पर ज़ोर देते हुए निजी/ स्वयंसेवी क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं को शामिल कर ज़िला अस्पताल स्तर पर कार्यान्वित करने के लिये राज्यों का मार्गदर्शन करने वाला ढांचा तैयार किया गया ।

अक्टूबर 2018 में स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्र में निजी सार्वजनिक साझेदारी को प्रोत्साहन देने के लिये एक मॉडल रियायतग्राही समझौता भी शुरू किया गया ।

(vi) केंद्र सरकार के मंत्रालयों के साथ प्रदेशों के लम्बित मामलात का समाधान

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्र सरकार के मंत्रालयों के साथ सभी लम्बित मामलों का शीघ्रता से समाधान किया गया है । राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडीशा एवं पुद्दुचेरी से प्राप्त विषयों का समाधान किया गया है ।

(vii) प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट

महाराष्ट्र, असम, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, नगालैण्ड, बुंदेलखंड क्षेत्र एवं दिल्ली की मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने में सहायता की गई ।

(viii) 115 निर्धारित आकांक्षापूर्ण ज़िलों का रूपांतरण

‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण को साकार करने एवं यह सुनिश्चित करने के लिये कि भारत की विकास प्रक्रिया समावेशी रहे, प्रधानमंत्री ने 5 जनवरी, 2018 को आंकाक्षापूर्ण ज़िला कार्यक्रम (एडीपी) की शुरुआत की थी । यह महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से कम प्रगति करने वाले एवं न्यून विकसित क्षेत्रों के रूप में उभरे तथा इस प्रकार संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिये एक चुनौती प्रस्तुत करने वाले 115 निधारित ज़िलों के शीघ्रता से रूपांतरण की विशेष पहल है ।

आंकाक्षापूर्ण ज़िला कार्यक्रम (एडीपी) के अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों में रहन सहन के मामले में आसानी के स्तर में बढ़ोतरी के साथ साथ इन ज़िलों में रहने वाले लोगों की आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि का उद्देश्य लेकर 49 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों की पहचान की गई है । स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास तथा आधाभूत अवसंरचना ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं जहां तीव्र रूपांतरण निर्धारित किया गया है ।

दिनांक 1 अप्रैल 2018 को नीति आयोग ने इन जिलों की बेसलाइन रैंकिंग जारी की थी जिसके माध्यम से यह ज़िले इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति का पता लगा सकते हैं साथ ही प्रदेश में एवं अंततः देश में सर्वश्रेष्ठ ज़िला बनने के लिये कार्य कर सकते हैं । इस सोच को साकार करने के लिये ज़िला टीमों ने राज्य एवं केंद्र सरकार के प्रयासों के समन्वय के सिद्धांत का पालन करते हुए ज़िला कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप दिया है । इसके अतिरिक्त आंकाक्षापूर्ण ज़िला कार्यक्रम (एडीपी) जनसंख्या के अलग-अलग धड़ों के साथ साथ संस्थानों जैसे सिविल सेवा संस्थानों, निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, लोकोपकारी संस्थाओं इत्यादि के साथ मिल कर केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ कार्य कर समावेशी विकास की इस महत्वपूर्ण पहल में योगदान देने का अनूठा मंच उपलब्ध कराता है ।

‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ नाम से एक आकांक्षापूर्ण ज़िला नियंत्रण-पट्ट विकसित किया गया है जो सभी संकेतकों से तत्क्षण आंकड़े एवं रैंकिंग जुटाता है । ज़िला कलेक्टर/ न्यायाधीश इस नियंत्रण-पट्ट के माध्यम से प्रगति की स्थिति पता लगाने के लिये स्वनिर्मित आंकड़े उप्लब्ध करवा रहे हैं ।

समावेशी विकास को प्रोत्साहन- सरकार के सबका साथ- सबका विकास के लक्ष्य को बढ़ावा

  • पंचायती राज मंत्रालय को संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत उल्लिखित क्षेत्रों में केंद्रीय निधि से वंचित प्रदेशों के बीच धन के पारदर्शी एवं न्यायोचित आवंटन के नये दिशानिर्देश जारी कर दिये गए हैं ।
  • पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) की केंद्रीय भूमिका का लाभ उठाने के लिये नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की पुनर्संरचना की अनुशंसा की है । तब से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान 2018-19 से 2021-22 तक प्रदेशों की चुनौतियों का समाधान करने की एक केंद्र प्रायोजित योजना बन गई है ।
  • नियोजन में विराम के बाद एवं योजनागत व ग़ैर-योजनागत व्यय के विलय के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिये नयी बजटीय प्रणाली में अनुदान निर्धारित करने हेतु नये दिशानिर्देश तैयार कर लिये गए हैं एवं वित्त मंत्रालय के पास आवश्यक कार्रवाई के लिये अग्रेषित कर दिये गए हैं ।
  • जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को उच्च स्तरीय शोध संस्थानों के रूप में उन्नत करने के लिये उनके पुनर्निर्माण पर तैयार रिपोर्ट का नीति आयोग द्वारा आगे आवश्यक कदम उठाने हेतु परीक्षण किया जा रहा है ।
  • अनुसूचित जाति उप योजना (एससीएसपी) एवं आदिवासी उप योजना (टीएसपी) के लिये निगरानी ढांचे का विकास कर लिया गया है एवं इन दोनों उप योजनाओं (एससीएसपी एवं टीएसपी) की ऑनलाइन निगरानी के लिये संबंधित मंत्रालयों को भेज दिया गया है ।
  • दिव्यांगजनों के लिये राष्ट्रीय नीति, 2006 में कमियों की पहचान कर ली गई है एवं नीति दोबारा तैयार करने के लिये इसको दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग को अग्रेषित कर दिया गया है ।
  • एक अवधारणा पत्रः “वापमंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों में जीविकोपार्जन के तौर तरीक़ेः एरोमा, शहद, डेयरी संबंधी कामकाज एवं अन्य परम्परागत उद्योगों की संभावनाएं” तैयार कर लिया गया है एवं संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, प्रदेशों एवं अन्य हिस्सेदारों के पास आवश्यक कदम उठाने हेतु भेज दिया गया है ।
  • ग़ैर सरकारी संस्थाओं के नवीन दर्पन पोर्टल, जो अप्रैल 2017 में लाइव हुआ था, का देश में ग़ैर सरकारी संस्थाओं के एक चुस्त डाटाबेस के रूप में विकास किया गया है एवं ग़ैर सरकारी संस्थाओं द्वारा किसी केंद्रीय मंत्रालय/ विभाग से अनुदान प्राप्त करने की पात्रता हासिल करने के लिये एक यूनीक आईडी प्राप्त करने के रूप में विकसित किया गया है । 43,000 ग़ैर सरकारी संस्थान पहले ही पंजीकरण करवा चुके हैं ।

प्रमाण आधारित नीति निर्माण को समर्थ बनाना एवं दीर्घकालीन दृष्टिकोण से उत्पादन क्षमता में वृद्धि

    1. तीन वर्ष का राष्ट्रीय एजेंडा एवं नये भारत के लिये रणनीति @75

नीति आयोग ने 2017-18 से 2019-20 की अवधि को कवर करते हुए एक तीन वर्ष का एजेंडा तैयार किया है । यह एजेंडा फ्रेमवर्क भारत की परिवर्तित सच्चाई के अनुरूप विकास की रणनीति से तालमेल की अनुमति प्रदान करता है ।

नीति आयोग द्वारा भारत की स्वतंत्रता के पचहत्तरवें वर्ष में 2017-18 से 2022-23 की अवधि को कवर करते हुए रणनीति पत्र तैयार किया जा रहा है । इस रणनीति पत्र में 2022-23 के लक्ष्य, साथ ही उनकी प्राप्ति किस प्रकार की जानी है इसका लेखा जोखा भी शामिल होगा एवं शीघ्र ही इसका शुभारंभ किया जाएगा ।

    1. केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसइ) के सुधार

प्रशासनिक मंत्रालयों के साथ बातचीत कर नीति आयोग ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की चार शाखाओं में रणनीतिक विनिवेश की अनुशंसा की है । नीति आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर अब तक 30 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को केंद्रीय मंत्रिमण्डल की आर्थिक मामलों की समिति ने रणनीतिक विनिवेश के लिये सिद्धांततः अनुमति प्रदान कर दी है । विनिवेश की प्रक्रिया निवेश और लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) द्वारा संचालित की जा रही है एवं पहला लेनदेन 14 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में होने की संभावना है ।

सरकार को 74 बीमार/ घाटे में चल रहे/ ख़राब प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसइ) पर एक रिपोर्ट सौंपी गई थी । जिसकी सिफारिशें क्रियान्वित हो रही हैं एवं अब तक 15 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम बंद होने की प्रक्रिया में हैं ।

    1. संतुलित क्षेत्रीय विकास
  • विशेष निधि का जारी किया जानाः क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन देने के लिये नीति आयोग ने ओडीशा, बिहार एवं पश्चिम बंगाल के लिये बारहवीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान संतुलित निधि की अनुशंसा की, एवं असम, मेघालय, मिजोरम एवं त्रिपुरा के लिये संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत कवर किये गए क्षेत्रों में एक बार की विशेष सहायता राशि जारी करने की अनुशंसा की ।
  • उत्तर-पूर्व के लिये विकास सहायताः उत्तर पूर्वी एवं हिमालयी प्रदेशों के लिये एक नयी औद्योगिक नीति हेतु रोडमैप की जांच करने एवं सुझाने के लिये नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया । समिति ने उत्तर पूर्वी राज्यों एवं अन्य हिस्सेदारों के साथ बातचीत कर अपनी अनुशंसा को अंतिम रूप दिया । इन सिफारिशों के आधार पर औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने मार्च 2020 तक 3000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर पूर्व औद्योगिक विकास योजना (एनईआईडीएस) 2017 को तैयार किया जिसको मार्च, 2018 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति प्राप्त हुई ।
  • उत्तर पूर्व के लिये नीति फोरम: यह नीति आयोग द्वारा गठित पहला क्षेत्रीय फोरम है जिसमें उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों एवं संबंधित मंत्रालयों/ विभागों का प्रतिनिधित्व है । इस फोरम का गठन हमारे देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में तीव्र, समावेशी किंतु चिरस्थायी विकास के मार्ग में विभिन्न बाधाओं की पहचान हेतु, एवं साथ ही पहचान की गई बाधाओं के निवारण हेतु समुचित उपायों की अनुशंसा करने के लिये किया गया । इस फोरम में नामचीन विशेषज्ञ एवं प्रतिष्ठित संस्थान (आईआईटी, आईआईएम, एनईआरआईएसटी, आरआईएस, आरएफआरआई इत्यादि) सदस्य स्वरूप हैं ।
  • द्वीपों का अखंड विकासः नीति आयोग के पास संधारणीय विकास के अनोखे नमूनों के रूप में निर्धारित द्वीपों के अखंड विकास की प्रक्रिया को दिशा देने का शासनादेश है । इसी को दृष्टिगत रखते हुए नीति आयोग ने प्रमुख हिस्सेदारों के साथ बातचीत के बाद प्रथम चरण में 10 द्वीपों को सूचीबद्ध किया है । सभी द्वीपों के लिये अंतिम विकास संभावना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है । इन द्वीपों की वहन क्षमता का आकलन कर लिया गया है एवं चिरस्थायी विकास को सुनिश्चित करने के लिये पर्यावरणीय विभाजन भी कर लिया गया है । लक्षद्वीप तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को आत्मनिर्भर पारि-पर्यटन परियोजनाओं के केंद्र के रूप में प्रदर्शित करने एवं स्थानीय रोज़गार का प्रोत्साहन कर सामुद्रिक अर्थव्यवस्था के विकास  के लिये अगस्त 2018 में एक वैश्विक निवेशक सम्मेलन भी आयोजित किया गया था ।
  • द्वीप विकास एजेंसी (आईडीए)आईडीए की स्थापना जून 2017 में भारत के गृहमंत्री की अध्यक्षता एवं नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के संयोजन में की गई थी । यह निर्धारित द्वीपों के अखंड विकास की प्रगति से संबंधित समीक्षा का कामकाज देखती है । अब तक द्वीप विकास एजेंसी की तीन बैठकें हो चुकी हैं । द्वीप विकास एजेंसी की अंतिम बैठक 24 अप्रैल, 2018 को आयोजित हुई थी ।
  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम परियोजनाएं- जीआईएस आधारित योजनानीति आयोग ने सरकार के सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया की योजना बनाने, प्रबंधन एवं निगरानी करने के लिये भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन और जियो इंफोर्मेटिक्स (बीआईएसएजी) गुजरात द्वारा विकसित “विलेज प्रोफाइल एण्ड तालुका प्लानिंग एटलस” अभिनव जीआईएस मॉडल पर आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के इस्तेमाल की संभावना की पहचान की है । भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन और जियो इंफोर्मेटिक्स (बीआईएसएजी) प्रत्येक राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की अलग-अलग वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित एक विशिष्ट रूप से निर्मित सॉफ्टवेयर का विकास कर रहा है । नीति आयोग ने नवम्बर 2017 में बीआईएसएजी द्वारा विशिष्ट रूप से निर्मित सॉफ्टवेयर हेतु सरकारी कर्मचारियों के लिये गहराई से एक क्षमता विकास कार्यक्रम का भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन और जियो इंफोर्मेटिक्स (बीआईएसएजी) में आयोजन किया ।
    1. स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र के सुधारः नीति आयोग ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार शुरू किये हैं ।
  • व्यापक चर्चा के पश्चात राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) अधिनियम, 2017 एवं राष्ट्रीय भारतीय औषध प्रणाली आयोग अधिनियम, 2017 को अंतिम रूप दिया जा चुका है ।
  • राष्ट्रीय पोषण रणनीति का विकासः नीति आयोग ने व्यापक परामर्श की प्रक्रिया के बाद राष्ट्रीय पोषण नीति की रचना की । यह रणनीति नीति निर्माताओं के लिये भारत के विकास कार्यक्रम में पोषण को केंद्र में लाने का औचित्य एवं रोडमैप उपलब्ध कराती है । यह विभिन्न क्षेत्रों के मध्य आंतरिक सम्मिलन पर ध्यान देती है एवं कुपोषण से निपटने एवं देश की पोषण संबंधी आवश्यकताओं एवं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये प्राथमिक ज़िलों की पहचान करती है ।
  • पोषण अभियान की शुरुआतः भारत में अगले तीन वर्ष में पोषण संबंधी परिणामों में बढ़ोतरी के उद्देश्य से पोषण अभियान शुरू किया गया है । इस कार्यक्रम का संचालन करने के लिये उत्तरदायी राष्ट्रीय परिषद नीति आयोग में स्थित है एवं इसके अध्यक्ष नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं । सितम्बर 2018, पोषण माह– पोषण को जनांदोलन बनाने के लिये देश भर में प्रारंभ एक विशाल जागरूकता एवं पहुंच अभियान- के रूप में निर्धारित किया गया है ।
  • षधीय क्षेत्र में सुधार के प्रयासः नीति आयोग ने सस्ती दवाईयां एवं चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिये नीति निर्माण में योगदान दिया है ।
  • राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीइआर)- राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान का मूल्यांकन किया गया एवं औषधीय शिक्षा के लिये मार्ग सुझाया गया ।
  • सितम्बर 2018 में नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वी के पॉल की अध्यक्षता में भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) का स्थान लेने के लिये बोर्ड ऑफ गवर्नर की स्थापना कर एक अध्यादेश प्रभाव में लाया गया था ।
    1. भारत के ऊर्जा क्षेत्र का चालन
  • वर्ष 2015 में भारत ऊर्जा सुरक्षा परिदृश्य (आईइएसएस), 2047 का पुनर्निर्माण किया गया था एवं भारत नवीन जलवायु योजना (आईएनडीसी) लक्ष्यों के निर्धारण में इसका उपयोग किया गया था । नीति आयोग ने भी “प्रदेश ऊर्जा परिकलक के विकास” हेतु आंध्र प्रदेश, गुजरात एवं असम का साथ दिया । दिनांक 16 नवम्बर 2017 को आंध्र प्रदेश राज्य ऊर्जा परिकलक 2050 की शुरुआत की गई जबकि अन्य दो राज्य क्रमशः अपने अपने प्रथम प्रारूप के साथ तैयार हैं । दूसरे चरण में तीन और प्रदेश- कर्नाटक, तमिलनाडु एवं महाराष्ट्र का बीड़ा उठाया गया है ।
  • हिस्सेदार-चालित रोडमैप विकास की मुहिम में नीति आयोग ने ‘भारत अपरम्परागत विद्युत रोडमैप 2030’ पर एक रिपोर्ट लॉंच की है । यह रिपोर्ट इस क्षेत्र के अवसरों एवं बाधाओं का सार प्रस्तुत करती है ।
  • नीति आयोग ने प्रदेश कार्ययोजना का आठ प्रदेशों में एकीकरण करने के लिये डेलोइट एवं पीडबल्यूसी की सेवाएं ली हैं । अब इस प्रदेश कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है ।
  • अन्य विभागों से विस्तृत चर्चा एवं आमजन की प्रतिपुष्टि के बाद नीति आयोग द्वारा तैयार राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनइपी) प्रालेख को अंतिम रूप दिया जा रहा है ।
  • नीति आयोग ने ऊर्जा की सुगमता एवं सस्तेपन की स्थिति के मापन एवं सुगमता व सस्तापन सुनिश्चित करने के लिये प्रदेशों द्वारा की जा रही कोशिशों की जानकारी प्राप्त करने के साथ साथ इनके टिकाऊपन एवं पर्यावरण हितकारिता की माप के लिये प्रदेश ऊर्जा सूचकांक भी तैयार किया है । यह सूचकांक संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं प्रदेशों को उनकी प्रतिपुष्टि हेतु एवं स्वयं यही तैयार करने हेतु भेज दिया गया है ।
  • नीति आयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिल कर भारत का एक गतिज भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) ऊर्जा मानचित्र तैयार कर रहा है । यह संगठित ऊर्जा मानचित्र सभी हिस्सेदारों को ऊर्जा संबंधी आवश्यक सूचना उपलब्ध कराएगा जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया की बेहतरी में सहायता प्राप्त हो सकेगी ।

विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर हस्तक्षेप

  • रोजगार एवं निर्यात पर कार्यबलः सितम्बर 2017 में नीति आयोग ने रोजगार व निर्यात पर आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया । इस कार्यबल में भारत सरकार के वरिष्ठ सचिव स्तर के अधिकारी एवं बाहर के विशेषज्ञ शामिल हैं । इस कार्यबल ने नौकरियों एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिये केंद्रीय वाण्जिय मंत्री को अनेक क्षेत्र-आधारित सिफारिशें की हैं ।
  • ग्रामीण पेयजल – देश के 19 आर्सेनिक व फ्लोराइड प्रभावित राज्यों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिये 1000 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं । 14 प्रदेशों के 3100 से अधिक आर्सेनिक/ फ्लोराइड प्रभावित निवास-स्थानों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया है ।
  • स्वच्छ भारत अभियान (एसबीएम)- दिनांक 2 अक्टूबर 2014 को इस अभियान की शुरुआत की गई । तब से लगभग 3.64 लाख गांवों, 385 ज़िलों एवं 13 राज्यों व 4 केंद्र शासित प्रदेशों ने स्वयं को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया है । ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घरों में शौचालय का कवरेज 39% से बढ़ कर 84% हो गया है । पिछले चार वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घरों में व्यक्तिगत शौचालय की संख्या चार गुना हो चुकी है । हाल ही में हुए कुछ सर्वेक्षणों में पाया गया कि शौचालय की पहुंच वाले 90% से अधिक ग्रामीण घर इसका उपयोग कर रहे हैं । शहरी क्षेत्रों में 84,049 वार्डों में से 62,436 वॉर्डों में हर घर से ठोस अपशिष्ट संग्रहण का लक्ष्य 100% पूरा कर लिया गया है एवं 2,618 शहरों ने स्वयं को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है जिनमें से आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय द्वारा 2089 शहरों को तृतीय पक्ष द्वारा सत्यापन के माध्यम से खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) का प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया गया है ।
  • सुधार के लिये अल्पकालिक कदमः वर्गीकृत स्वायत्तता, प्रत्यायन ढांचे में सुधार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) में पुराने पड़ चुके नियमन आयामों को दूर करने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये अनेक लक्षित सिफारिशों समेत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिये अल्पकालिक कदम उठाने के लिये अनुशंसाएं की गई हैं । मंत्रालय इन सिफारिशों को क्रियान्वित करने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है ।
  • बंदरगाह के पारितंत्र में क्षमता का विकासः नीति आयोग ने क्षेत्र विशेष पर आधारित बैठकों की श्रृंखला के माध्यम से बंदरगाह पारितंत्र क्षमता आंदोलन का चालन किया । समीक्षा के दौरान सीमा शुल्क प्रक्रमण, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह ट्रस्ट में रेलवे रेक की लदाई एवं प्रलेखीकरण के कार्यों में देरी कम करने में विशेष उपलब्धियां रिपोर्ट की गई ।
  • केंद्र सरकार के अंतर्गत कार्यरत 679 स्वायत्त निकायों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई एवं प्रथम चरण का प्रालेख सरकार को सौंप दिया गया जबति द्वितीय चरण के प्रालेख पर कार्य प्रगति पर है ।
  • भारत के स्वर्ण बाज़ार के रूपांतरण की सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया गया है एवं यह वित्त मंत्री को सौंप दी गई हैं ।
  • सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के मददगारों द्वारा प्रशिक्षण एवं अभ्यास संदर्शिका के रूप में उपयोग करने हेतु सामाजिक क्षेत्र के लिये प्रशिक्षण एवं अभ्यास संदर्शिका- लिंग समावेशी योजना निर्माण पुस्तिका एवंसामाजिक अंकेक्षण हेतु पुस्तिका’ का प्रकाशन किया गया है ।
  • रणनीति रिपोर्टः रेयर अर्थ के महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भरता’ की रणनीतियों पर एवं ‘फ्लाई ऐश व धातुमल’ के प्रभावी इस्तेमाल एवं निगरानी पर रिपोर्ट ।
  • खनिज क्षेत्र के विकास को पुनर्जीवन प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय खनिज नीति, 2018 के नवीनीकरण का रोडमैप
  • केंद्र सरकार द्वारा सहायता प्राप्त प्रमुख परियोजनाओं के लिये स्थानों के चयन हेतु चैलेंज मेथड दिशानिर्देश तैयार कर लिये गए हैं ।
  • नीति आयोग द्वारा टायर-2 एवं टायर-3 शहरों में सार्वजनिक परिवहन एवं ग़ैर-मोटरयुक्त परिवहन की बेहतरी के लिये रणनीतिक चलिष्णुता ढांचे पर कार्य किया जा रहा है ।
  • नीति आयोग ने कौशल विकास पर 10 मुख्यमंत्रियों के एक उप समूह की देखभाल की, तथा जिसने पहुंच, प्रासंगिकता, निष्पक्षता, गुणवत्ता एवं वित्त के बढ़े हुए श्रोतों के लिये अनुशंसाएं की । कौशल विकास मंत्रालय समिति की प्रमुख सिफारिशों पर कार्य कर रहा है ।    
  • उत्तर पूर्व क्षेत्र में जल संसाधनों के प्रबंधन के लिये आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है । नदियों के पुनर्जीवन की नीति के परीक्षण हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया गया ।
  • सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ नीति आयोग 36 अधिकरणों से 18 अधिकरणों के विलय का समन्वय एवं क्रियान्वयन भी कर रहा है ।

सरकारी योजनाओं की क्षमता एवं क्रियान्वयन में वृद्धि के लिये परियोजना प्रबोधन को संस्थागत करना 

(i) आउटपुट आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क 2018-19:

परिणाम आधारित निगरानी पर बढ़ते ज़ोर को देखते हुए विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमइओ) ने सभी केंद्रीय क्षेत्र व केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के आउटले के लिये सभी मापने योग्य संकेतकों के साथ साथ एक सुपरिभाषित आउटपुट एवं आउटकम प्रक्रिया की शुरुआत की ।

यह गतिविधि सभी प्रासंगिक परिव्यय की पहचान के साथ शुरू हुई, जिसकी संख्या वित्त वर्ष 2017-18 के लिये 8.14 लाख करोड़ रुपये का बजट कवर करते हुए लगभग 600 सीएस/ सीएसएस आउटले है । यह आउटपुट, आउटकम एवं संकेतक, प्रदर्शन की निगरानी के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों पर आधारित एक मानकीकृत प्रक्रिया का उपयोग कर विकसित किये गए ।

परिणामी आउटपुट आउटकम मॉनिटरिंग फ्रैमवर्क 2018-19 की निगरानी एक नवीन विकसित वेब-आधारित संवादमूलक डैशबोर्ड के माध्यम से होगी । मंत्रालयों/ विभागों को उपलब्धियों के आंकड़े अपलोड करने के लिये डैशबोर्ड की पहुंच प्रदान की गई है । डैशबोर्ड मंत्रालयों के एमआईएस, पीएफएमएस से स्वतः प्रदर्शन के आंकड़े ले पाए तथा बारीकी से प्रदेश एवं ज़िला स्तर के आंकड़े भी जुटा पाए, इसके लिये कार्य जारी है । डैशबोर्ड के स्क्रीनशॉट्स नीचे दिए गए हैं ।

(ii) प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा क्षेत्रवार समीक्षाः

सरकार ने महज़ आउटपुट के बजाय किसी योजना अथवा किसी क्षेत्र विशेष के आउटकम को पता लगाने के लिये कदम उठाए हैं, 15 क्षेत्रों के आउटकम की निगरानी की जा रही है । जबकि समीक्षाएं अनेक वर्षों से जारी थी, पिछले दो वर्ष में इन समीक्षाओं में भौतिक प्रगति की निगरानी करने से आउटकम प्रगति की ओर बढ़ा गया है ।  इसको साकार करने के लिये 2016 में एक संवादमूलक डैशबोर्ड बनाया गया था । 2017 की प्रधानमंत्री कार्यालय की समीक्षाओं में जिन क्षेत्रों को कवर किया गया वह- सड़क, एरपोर्ट, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल इंडिया, कोयला, पीएनजी, विद्युत, एनआरई, शहरी आवासन, ग्रामीण आवासन, एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना- हैं । डैशबोर्ड का स्क्रीनशॉट नीचे दिया गया है ।

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(iii) परिणामोन्मुखी (आउटकम) बजट

केंद्रीय आउटकम बजट, 2017-18 की प्रगति के नवीनीकरण के लिये एक डैशबोर्ड का विकास किया गया । आंकड़े अपलोड करने के लिये मंत्रालयों/ विभागों को इस डैशबोर्ड की पहुंच प्रदान की गई ।

(iv) कार्यक्रम निगरानी एवं मूल्यांकन

विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमइओ) ने विशेष योजनाओं के लिये विशिष्ट अनुरोधों पर आधारित निगरानी एवं मूल्यांकन का बीड़ा उठाया है । आउटले से आउटकम आधारित शासन प्रणाली वाले बदलाव के बाद ज़ोर अपेक्षित आउटकम की पहचान, इसी पर उचित प्रकार से प्रगति के मापन एवं उनकी प्राप्ति में आने वाली बाधाओं के विश्लेषण पर है ।

इस बारे में विकास निगरानी मूल्यांकन कार्यालय (डीएमइओ) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत एवं निर्मित किये गए आवासों की प्रगति के लिये एक वेब-आधारित संवादमूलक डैशबोर्ड का विकास किया है । डैशबोर्ड के स्क्रीनशॉट नीचे दिये गए हैं ।

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इसके अतिरिक्त योजना के कार्यान्वयन में कमियों की पहचान के लिये शीघ्र आकलन अध्ययनों के साथ साथ फिलहाल क्रियान्वित चयनित कार्यक्रमों का मूल्यांकन भी किया गया है ।

राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (इ-एनएएम) द्वारा एक शीघ्र आकलन अध्ययन कराकर प्रधानमंत्री कार्यालय में जमा कराया गया था । मूल्यांकन अध्ययन एवं शीघ्र आकलन अध्ययन जिन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है –  प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम, शिक्षा का अधिकारः सुसंगत सर्व शिक्षा अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, स्वच्छ भारत (ग्रामीण), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (समेकित जलविभाजन प्रबंधन), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भारतनेट, एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- हैं ।

(v) संधारणीय विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में कार्यान्वयन एवं निगरानी की प्रगति

(क) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा स्वीकृत वैश्विक संधारणीय विकास लक्ष्यों (एसडीजी) संकेतकों के प्रकाश में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने राष्ट्रीय संधारणीय विकास लक्ष्य संकेतकों की एक विस्तृत सूची का विकास किया है । नीति आयोग के पास देश में संधारणीय विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन पर नज़र रखने का कार्य है । संधारणीय विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा के लिये केंद्रीय मंत्रालयों, प्रदेश सरकारों एवं थिंक टैंकों की भागीदारी कर नीति आयोग ने संधारणीय विकास लक्ष्यों पर एक कार्यबल गठित किया है ।

(ख) बेहतर समझ एवं तीव्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये नीति आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित/ केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं तथा संधारणीय विकास लक्ष्यों व इससे जुड़े लक्ष्यों पर अन्य सरकारी शुरुआतों को योजनाबद्ध किया है । अनेक राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों ने भी अपने विभागों, योजनाओं एवं शुरुआतों के साथ ऐसा ही किया है ।

(ग) नीति आयोग ने संधारणीय विकास लक्ष्यों पर जागरूकता एवं समन्वय में बढ़ोतरी के लिये केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों, सीएसओ, अकादमिक विशेषज्ञों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं एवं अन्य हिस्सेदारों के साथ 21 राष्ट्रीय/ क्षेत्रीय परामर्श आयोजित किये हैं । नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने संधारणीय विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के क्रियान्वयन पर दिनांक 19 जुलाई 2017 को न्यूयॉर्क में युनाइटेन नेशन्स हाई लेवल पॉलिटिकल फोरम में इण्डिया वोलैण्ट्री नेशनल रिव्यू रिपोर्ट प्रस्तुत की है ।

(घ) नीति आयोग एक विस्तृत एसडीजी इण्डिया इंडेक्स तैयार कर रहा है जिसमें संधारणीय विकास लक्ष्यों पर प्रदेशों/ केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन का मापन करने के लिये संकेतक मौजूद हैं । देश में संधारणीय विकास लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी करने के लिये इन पर एक गतिशील राष्ट्रीय डैशबोर्ड की रचना भी की जा रही है ।

(ड) नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत एवं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गटेर्स ने अक्टूबर 2018 में भारत के लिये संधारणीय विकास फ्रेमवर्क 2018-19 पर हस्ताक्षर भी किये ।

(vi) भारत सरकार का परियोजना निर्धारण खंडः

दिनांक 1 जनवरी 2015 से नीति आयोग ने 45,14,389 करोड़ रुपये की लागत से 584 सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित परियोजनाओं का निर्धारण किया है । इसके अतिरिक्त 229 केंद्रीय क्षेत्र एवं 48 प्रदेश क्षेत्र परियोजनाओं समेत 2,16,703 करोड़ रुपये की कुल लागत से 277 पीपीपी परियोजनाओं का मूल्यांकन भी किया गया है ।

(vii) केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन की निगरानीः यूटी प्रोग्रेस ट्रेकर का विकास

नीति आयोग ने एक डैशबोर्ड, सरकार की विभिन्न विकासात्मक योजनाओं/ परियोजनाओं/ शुरुआतों की मासिक प्रगति पर निगरानी रखने व उनके बारे में पता लगाने के लिये केंद्र शासित प्रदेशों का एक प्रगति मापक तैयार किया है । केंद्र शासित प्रदेश इसमें आंकड़े डालते हैं, मंत्रालय उनका सत्यापन करते हैं, एवं नीति आयोग/ गृह मंत्रालय मासिक एवं त्रैमासिक आधार पर उनकी देखरेख करते हैं । वर्तमान में यह मापक 42 विकासात्मक योजनाओं/ परियोजनाओं/ शुरुआतों की प्रगति की निगरानी कर रहा है । इस निगरानी ने केंद्र शासित प्रदेशों में सेवाएं प्रदान करने में बेहतरी लाने में सहायता की है । इसका यूआरएल http://progresstracker.in/ है ।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी तथा नीति निर्माण के लिये हिस्सेदारों से परामर्श को प्रोत्साहन

नीति आयोग ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंकों के साथ अनेक क्षेत्रों में सहयोग के लिये मंच मुहैया कराया है । सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं संयुक्त शोध परियोजनाओं के माध्यम से नीति आयोग ने सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में विशेषज्ञों की राय लेना सुगम बनाया है ।

  • समावेश ज्ञान एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ हब एवं स्पोक मॉडल का इस्तेमाल कर साझेदारी एवं नेटवर्किंग के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की शुरुआत की गई ।
  • चैम्पियंस ऑफ चेंज – हिस्सेदारों से मंत्रणा के प्रति नीति निर्माण की प्रक्रिया को प्रतिक्रियाशील बनाने के लिये युवा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीइओ) एवं युवा उपक्रमियों की दो कार्यशालाएं आयोजित की गई । यह पहली बार आयोजित एक अनोखी घटना थी जिसमें प्रधानमंत्री एवं उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ साथियों को प्रभुत्वसंपन्न युवाओं से सीधे चर्चा करते हुए देखा गया । यह चर्चा अलग अलग प्रकार के विषयों जैसे 2022 तक नया भारत, विकास के अग्रिम चरण में पहुंचता  डिजिटल भारत, शिक्षा एवं कौशल, एक संधारणीय कल को क्रियाशील बनाना, स्वास्थ्य एवं पोषण, अविश्वसनीय भारत की सॉफ्ट शक्ति, मेक इन इण्डिया, किसानों की आय को दोगुना बनाना, विश्वस्तरीय अवसंरचना, कल के शहर एवं वित्तीय क्षेत्र में सुधार करना के ईर्द गिर्द बुनी गई थी ।
  • न्यायिक प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर आमराय बनाने के लिये सम्मेलन आयोजित देश में विवादों के निपटारे की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिये विवाचन पर एक वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया गया । विश्व में सर्वाधिक प्रतिष्ठित मध्यस्थता पुरस्कार- वैश्विक विवाचन समीक्षा (जीएआर) पुरस्कार ने भारत को ‘न्याय अधिकार जिसने शानदार प्रगति की है’ श्रेणी में विजेता घोषित किया । विधि आयोग के सहयोग से राष्ट्रीय विधि दिवस, 2017 के अवसर पर भारत के विकास में तीन स्तंभों की भूमिका का संतुलन विषय पर एक और सम्मेलन का आयोजन किया गया । अक्टूबर 2018 में अंतर्राष्ट्रीय विवाचन पर सर्वश्रेष्ठ परिपाटियां विषय पर प्रशिक्षण एवं गहन विचार कार्यशाला का आयोजन भी किया गया ।
  • नीति आयोग ने प्रदेश नगरीय नेताओं के लिये सिंगापुर सरकार के साथ साझेदारी कर क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की जिनमें सात राज्यों से 200 अधिकारियों ने दिल्ली व सिंगापुर में विभिन्न कार्यशालाओं में मौजूदगी दर्ज की । शहरी योजना में जल प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए कार्यशाला का दूसरा चरण नवम्बर 2018 में आयोजित किया गया ।

ज्ञान एवं नवाचार केंद्र

नीति आयोग का एक शासनादेश एक अत्याधुनिक संसाधन केंद्र का रखरखाव करना, बेहतर शासन प्रणाली पर अनुसंधान एवं चिरस्थायी तथा न्यायसंगत विकास में सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों का भंडार बनना, एवं हिस्सेदारों के मध्य ज्ञान के प्रसार में सहायता देना है । ज्ञान के भंडार के रूप में विकसित करने के लिये अनेक शुरुआतें की गई हैं :

  • केस स्टडी के व्यापक भंडार का सार-संग्रह जो सभी क्षेत्रों में प्रदेशों की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को प्रतिबिम्बित करता हो : “स्टेट्स फॉरवर्डः बेस्ट प्रेक्टिसेज़ फ्रॉम अवर स्टेट्स”
  • नीति आयोग ने “स्किलिंग फॉर एम्प्लोयेबिलिटी: बेस्ट प्रैक्टिसेज़” सार संग्रह का प्रकाशन किया, जिसमें राज्य सरकार, निजी क्षेत्र एवं नागरिक समाज द्वारा निष्पक्षता, पहुंच, गुणवत्ता, प्रासंगिकता एवं वित्त से जुड़ी चुनौतियों के समाधानों का प्रकाशन किया गया है ।
  • सामाजिक सुरक्षा, अवसंरचना, बाल सुरक्षा एवं स्थानीय शासन प्रणाली के क्षेत्र में उन्नतिशील कार्य को समाहित करने के लिये द गुड गवर्नेंस रिसोर्स बुक (2015) ।
  • सभी क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों की तत्क्षण जानकारी प्रदान करने वाला पोर्टल शीघ्र ही शुरू किया जाएगा । इसमें सहकारी संघवाद की भावना का निरूपण होगा । पोर्टल में प्रदेश स्तर पर ज़िला न्यायाधीश समेत प्रमुख सरकारी अधिकारियों को सर्वश्रेष्ठ प्रणालियां अपलोड करने का अधिकार प्राप्त होगा ।

उद्यम संबंधी पारितंत्र को प्रोत्साहन

(i) अटल नवाचार मिशन

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  • अटल नवाचार अभियान, नीति आयोग के तत्वावधान में देश में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन देने वाली भारत सरकार की एक फ्लैगशिप पहल है । कार्यक्रम ने अपने पहले चरण में स्कूली एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में नवप्रवर्तनशील संस्थानों का नेटवर्क स्थापित किया है ।

अटल टिंकरिंग लैब

 

  • हाई स्कूल के स्तर पर अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) स्थापित करने की फ्लैगशिप योजना के अंतर्गत अटल नवाचार मिशन (एआईएम) ने भारत के सभी राज्यों में 2400 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) स्कूलों का चयन किया है । औसतन 300,000 से अधिक स्कूली छात्र एटीएल से जोड़े गए हैं, 3500 से अधिक नवाचारों की रचना की गई है, अनेक गतिविधियों की श्रृंखला के माध्यम से 1000 अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया है । कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा छह से उच्चतर कक्षा में पढ़ने वाले छात्र रोबोट, 3 डी प्रिंटर तथा इंटरनेट से जुड़े विभिन्न मंचों पर कार्य करेंगे ।
  • इसके अतिरिक्त कैरियर की शुरुआती अथवा बीच की स्थिति वाले 1500 से अधिक परामर्शदाताओं को स्वयंसेवी आधार पर 21वीं सदी के कौशल वाले युवा अन्वेषकों को आगे लाने हेतु साथ जोड़ा गया है । सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली कुछ टिंकरिंग प्रयोगशालाओं ने विदेशों में अनेक कार्यक्रमों में वर्ल्ड रोबोटिक ओलम्पियाड, मैकर फैयर, नोबल प्राइज़ सीरीज़ एवं भारत भर में कई अन्य रोबोटिक प्रौद्योगिकी नवाचार चुनौतियों में हिस्सा लिया है । वास्तव में कुछ टिंकरिंग लैब्स ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार की चुनौतियों को जीता भी है ।

अटल उद्भवन केंद्र (एआईसी)

  • अटल उद्भवन कार्यक्रम (एआईसी) कार्यक्रम के अंतर्गत इन्क्यूबैटर्स की स्थापना के लिये देश भर में टायर-1, टायर-2 एवं टायर-3 शहरों में मिलाकर 100 से अधिक संस्थानों का चयन कर लिया गया है । पहले राउंड में चयनित 19 अटल उद्भवन केंद्रों में उद्भवित स्टार्टअप ने पिछले एक वर्ष में पहले ही 6000 नौकरियों का सृजन कर अच्छे विकास एवं तीव्र प्रगति के उदाहरण देना शुरू कर दिया है । 500 से अधिक स्टार्टअप में से करीब 10% का ध्यान महिलाओं के सशक्तीकरण पर है । इन इन्क्यूबैटर्स एवं इनसे लाभान्वित होने वाले स्टार्टअप नेइकॉनोमिक टाइम्स स्टार्टअप ऑफ द इयर 2017 में दो पुरस्कारों समेत विभिन्न मंचों पर अनेक पुरस्कार अपने नाम किये हैं ।

अटल न्यू इंडिया चैलेंज (एएनआईसी)

  • मौजूदा पेटेंट एवं प्रतिमान से तकनीकी उत्पाद की रचना में सहायता करने के लिये अटल न्यू इंडिया चैलेंज नाम का कार्यक्रम है । यह चुनौतियां ऐसे अन्वेषकों को लाभ पहुंचाएंगी जो आवासन, परिवहन, कृषि, एवं जल तथा गंदे पानी के प्रबंधन के क्षेत्र में भारतीय प्राथमिकताओं हेतु प्रौद्योगिकी का विकास कर रहे हैं । समय के साथ अटल नवाचार मिशन इन नवाचारों को धरातल पर उतारने में मंत्रालयों की सहायता करेगा एवं मुख्यधारा के प्रचालनों में और अधिक नवाचार लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा ।

अटल नवाचार मिशन देश के विभिन्न भागों में विद्यार्थियों तथा अध्यापकों को अन्वेषकों में रूपांतरित करने, उद्यमी जैसे सोच विकसित करने में ज़मीनी स्तर पर कार्य कर रहा है जो 2022 तक नये भारत का विकास करने का मार्ग प्रशस्त करेगा ।

(ii) वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन 2017सर्वप्रथम महिलाएं सभी के लिये समृद्धि

  • नीति आयोग ने नवम्बर 2017 में हैदराबाद में वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन 2017 का आयोजन किया । इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री ने किया एवं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति की सलाहकार सुश्री इवांका ट्रम्प ने किया । वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन ने दुनिया के समक्ष पेश चुनौतियों के समाधान ढूंढने एवं विकसित करने के लिये उच्च स्तरीय उद्यमिता प्रतिभा को निवेशकों एवं विश्व भर में स्टार्टअप के पारितंत्र से जोड़ा । कुल 150 से भी अधिक देशों के 2500 से अधिक उद्यमी, निवेशक एवं वक्ताओं ने तीन दिन तक हुए 53 सत्रों में ‘सर्वप्रथम महिलाएं : सभी के लिये समृद्धि’ विषय के साथ भागीदारी की ।
  • वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन से पहले देश भर की विभिन्न साझेदार संस्थाओं के सहयोग से उद्यमिता व नवाचार से संबंधित 50 से भी अधिक कार्यक्रम आयोजित किये गए । वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन के पश्चात यह घोषणा की गई कि नीति आयोग एक महिला उद्यमिता सेल की स्थापना करेगा ।

(iii) महिला उद्यमिता मंच

नीति आयोग ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश भर में महिलाओं हेतु एक पारितंत्र का विकास करने के उद्देश्य से महिला उद्यमिता मंच (डबल्यूइपी) का शुभारंभ किया । इसका उद्देश्य महिलाओं को उनकी उद्यमिता संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता करना, नवप्रवर्तनशील पहल की संख्या में वृद्धि करना एवं उनके उद्यमों के लिये चिरस्थायी, दीर्घकालीन रणनीतियां बनाना है ।

इस अवसर पर शुरू पोर्टल http://wep.gov.in एक सूचनाप्रद, संवादमूलक वेबसाइट है जो एक समर्पित संसाधन एवं ज्ञान के आधार के रूप में कार्य करती है । महिला उद्यमिता मंच (डबल्यूइपी) का उद्देश्य सरकारी एवं निजी क्षेत्र की योजनाओं एवं शुरुआतों में सूचनाओं को सरल एवं कारगर बना कर स्थापित एवं अभिलाषी  महिला उद्यमियों की राह में आ रही बाधाओं का निवारण करना है ।

कृषि क्षेत्र में गति बढ़ाने वाले सुधार

वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य के मद्देनज़र नीति आयोग ने कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिये नये कदमों की श्रृंखला शुरू की है । उनमें से कुछ बड़े सुधार हैं :

(i) मॉडल एक्ट ऑन एग्रीकल्चरल लैंड लीज़िंग, 2017

काश्तकार के अधिकारों को मान्यता देने एवं ज़मीन मालिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिये नीति आयोग ने मॉडल एक्ट ऑन एग्रीकल्चरल लैंड लीज़िंग, 2017 का निर्माण किया है जो कृषि क्षेत्र में निवेश, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था एवं रोज़गार को सुगम बनाएगा । उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, ओडीशा, कर्नाटक, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश जैसे अनेक राज्यों ने या तो इसको पहले ही अंगीकार कर लिया है या अपने अपने क़ानूनों में संशोधन का कार्य शुरू कर दिया है ।

(ii) कृषि उपज विपणन समिति अधिनियम के सुधार

कृषि मंत्रालय, प्रदेशों एवं अन्य हिस्सेदारों के साथ चर्चा के साथ नीति आयोग ने  मॉडल एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस एण्ड लाइवस्टॉक मार्केटिंग कमेटी एक्ट (एपीएलएमसी) 2017 की शुरूआत की । इस अधिनियम को अंगीकार करने के लिये प्रदेशों से कहा जा रहा है ।

(iii) कृषि विपणन एवं कृषक मैत्रीपूर्ण सुधार सूचकांकः

नीति आयोग ने कृषि बाज़ार, भूमि लीज़ एवं निजी भूमि पर वानिकी (वृक्षों के कटान एवं पारवहन) के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार लागू करने की आवश्यकता के बारे में राज्यों को संवेदनशील बनाने के लिये सबसे पहली बार ‘कृषि विपणन एवं कृषक मैत्रीपूर्ण सुधार सूचकांक’ विकसित किया । इस सूचकांक का उद्देश्य प्रदेशों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का विकास करना है ।

    1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाःbanner2.jpg

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का रोडमैप तैयार किया गया एवं संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों, राज्यों तथा अन्य हिस्सेदारों के साथ साझा किया गया ।

(v) मूल्य अपूर्णता भुगतान

नीति आयोग ने सरकार द्वारा कृषि पैदावार के अधिग्रहण के स्थानपन्न के रूप में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत मूल्य अपूर्णता भुगतान की संकल्पना का प्रस्ताव किया है । कपास एवं दालों के लिये क्रमशः महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश में इसकी पायलट परियोजना प्रस्तावित की जा रही है ।

(vi) उर्वरक क्षेत्र का पुनर्जीवनः 2022 तक भारत को यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिये नीति आयोग ने गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी एवं रामगुंडम में नये कारखानों के पुनरोद्धार एवं तालचर कारखाने के लिये तकनीक के चयन हेतु अनेक समितियों का मार्गदर्शन किया है । उर्वरक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) लाने की पायलट परियोजना अनेक प्रदेशों में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है एवं क्रियान्वयन के लिये सभी राज्यों में आगे ले जाई गई है ।

(vii) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के कार्यान्वयन के लिये वैकल्पिक प्रणालीः

2018-19 के बजट की घोषणा के साथ ही नीति आयोग को विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के क्रियान्वयन हेतु वैकल्पिक प्रणाली विकसित करने का कार्य सौंप दिया गया है । नीति आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों एवं अन्य हिस्सेदारों से परामर्श के साथ तीन विकल्पों : बाज़ार आश्वासन योजना, मूल्य अपूर्णता भुगतान योजना, एवं निजी अधिग्रहण एवं भंडारण योजना- से बनी प्रणाली स्थापित की है ।

(viii) किसानों की आय दोगुनी करने के लिये व्यवसाय मॉडल की देखरेख हेतु कार्यबल

नीति आयोग ने किसानों की आय दोगुनी करने हेतु पायलट परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने के लिये एक व्यवसाय मॉडल विकसित करने हेतु एक कार्यबल का गठन किया है । इस पहल के अंतर्गत प्राथमिक रूप से सामाजिक व्यवसायियों के माध्यम से भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 10 पायलट परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा । इस पहल के संचालन के लिये प्रमुख सिद्धांत बाज़ार संचालित रवैया, कृषि उत्पादन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग को प्रोत्साहन देना, किसानों के जोखिम का न्यूनीकरण एवं कृषि क्षेत्र में अतिरिक्त सुधार के लिये आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल हैं ।

सीमांत तकनीक को अंगीकार करने को प्रोत्साहन

    1. डिजिटल भारत को प्रोत्साहन

विमुद्रीकरण के पश्चात नीति आयोग ने डिजिटल भुगतान आंदोलन के प्रमुख चालक के रूप में कार्य किया । आयोग ने डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिये भारत भर में एक व्यापक पक्षपोषण एवं पहुंच का कार्यक्रम हाथ में लिया । मंत्रालयों, उद्योग संस्थानों, शैक्षिक संस्थाओं एवं राज्यों में शिक्षा प्रदान करने के एक वृहत कार्यक्रम का बीड़ा उठाया गया । 100 नगरों में 100 डिजिधन मेलों का आयोजन किया गया । प्रदेशों/ केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहन देने के लिये सूचना, शिक्षा एवं संचार का कार्य चलाकर पांच करोड़ जन धन खातों को डिजिटल मंच के अंतर्गत लाया गया । समाज के सभी वर्गों में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिये लकी ग्राहक योजना एवं डिजिधन व्यापार योजनाएं भी शुरू की गई । इन दो योजनाओं के अंतर्गत कुल 16 लाख से भी अधिक उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों ने 256 करोड़ रुपये तक के कैशबेक पुरस्कार जीते ।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को डिजिटल भुगतान का प्रोत्साहन करने हेतु अनुशंसाएं करने के लिये संयोजक बना कर नीति आयोग ने डिजिटल भुगतान के विषय पर मुख्यमंत्रियों की एक समिति का गठन किया । जनवरी 2017 में प्रधानमंत्री को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट की अनेक सिफारिशें तभी से क्रियान्वित की गई हैं ।

नीति आयोग ने विशेषकर सुदूर क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को सुगम बनाने के लिये भीम एप के विकास को प्रोत्साहन भी प्रदान किया ।

नीति आयोग ने थर्ड पार्टी सत्यापन के आधार पर लैस-कैश टाउनशिप योजना की शुरुआत भी की । लैस-कैश टाउनशिप के रूप में सत्यापित 75 टाउनशिप ऐसी थी जहां टाउनशिप के अंदर 80 प्रतिशत से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यम से था । प्रधानमंत्री ने दिनांक 14 अप्रैल, 2017 को इनकी घोषणा लैस-कैश टाउनशिप के रूप में की ।

    1. साझासंबद्ध एवं स्वच्छ गतिशीलता समाधान

नीति आयोग देश के लिये स्मार्ट शहरों में अपनाने के लिये साझा, संबद्ध एवं स्वच्छ गतिशीलता समाधानों पर व्यापकरूप से कार्य कर रहा है । वह एक रिपोर्ट ‘इण्डिया लीप्स अहेडः ट्रांसफोर्मेटिव मोबिलिटी सोल्यूशंस फॉर ऑल’ एवं ‘इण्डिया एनर्जी स्टोरेज मिशनः ए मेक इन इण्डिया ऑपोर्च्युनिटी फॉर ग्लोबली कम्पीटिटिव बैटरी मैन्युफैक्चरिंग’ तथा ‘वैल्युइंग सोसाइटी फर्स्टः एन असेसमेंट ऑफ द पोटेन्शियल फॉर द फीबैट पॉलिसी इन इण्डिया’ पर नीतिगत संक्षेपलेकर सामने आया है ।

इलेक्ट्रिक वाहनों में चार्जिंग सेवाएं मुहैया कराने के लिये नीति आयोग में एक इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन कीस्थापना की गई थी ।

फरवरी 2018 में नीति आयोग ने रूपांतरित गतिशीलता में बढ़ोतरी के विषयों से जुड़ी रणनीतियां निर्धारित करने केलिये छह अंतर-मंत्रालयी समितियों का गठन किया था ।

उक्त कदमः सितम्बर 2018 में वैश्विक गतिशीलता सम्मेलन का आयोजन हुआ था । सम्मेलन का ज़ोर गतिशीलता सेजुड़े विभिन्न आयामों के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं अलग-अलग मंचों में गतिशीलता में बढ़ोतरी करने में लगे विभिन्नसाझेदारों को लाना था । विभिन्न अंतर-सरकारी संस्थाओं, अकादमिक संस्थानों, भारत एवं विदेश में नीति निर्माण मेंलगे थिंक टैंकों, गतिशीलता क्षेत्र से वैश्विक नेतागणों जैसे ओइएम, बैटरी निर्माता, चार्जिंग की अवसंरचना मुहैयाकराने वाले संस्थानों, तकनीकी समाधान प्रदान करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सेदारी की ।

    1. शासन प्रणाली में सीमांत तकनीकों का अंगीकरण

कृत्रिम बुद्धिमताः नीति आयोग के पास कृत्रिम बुद्धिमता पर राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने एवं भारत की अर्थव्यवस्था, समाज एवं शासन प्रणाली पर इसके प्रभाव का आकलन करने का शासनादेश भी है । इन तकनीकों के विकास, अंगीकरण एवं प्रभाव को समझने के लिये नीति आयोग मंत्रालयों, अकादमिक क्षेत्र, उद्योगों, शोधकर्ताओं एवं स्टार्टअपके साथ सम्पर्क कर रहा है । इसके आधार पर कृत्रिम बुद्धिमता पर राष्ट्रीय रणनीति विषय पर चर्चा का एक मसविदातैयार किया जा रहा है ।

आईबीएम एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के साथ साझेदारी कर असम, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के 10 आकांक्षापूर्ण ज़िलों में किसानों को तत्क्षण परामर्श प्रदान करने केलिये कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग कर एक फसल लब्धि भविष्यवाणी नमूना विकसित करने के लिये एक पायलटपरियोजना क्रियान्वित की जा रही है । स्वास्थ्य रक्षा एवं पुनः कौशल प्रदान करने के क्षेत्रों में विभिन्न विकासकों सेसहयोग से इसी प्रकार की परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है ।

जून, 2018 के महीने में शासन प्रणाली के प्रमुख क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमता के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के लिये प्रमुखरणनीतियों एवं सिफारिशों को विस्तार से बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमता पर एक राष्ट्रीय रणनीति जारी की गई थी ।

ब्लॉकचेनः नीति आयोग इण्डियाचेन, भारत विशिष्ट अवसंरचना मंच पर प्रस्ताव जो आधार, यूपीआई एवं इ-साइन जैसेतत्वों का फायदा उठाता है, पर एक चर्चा-पत्र तैयार कर रहा है । यह पत्र इण्डियाचेन के प्रत्ययात्मक ढांचे एवंशिल्पविद्या संबंधी डिज़ाइन की रूपरेखा प्रस्तुत करेगा ।

ऐसी परियोजनाएं जिनमें तकनीकी साझेदारों की पहचान की जा चुकी है एवं जिन पर विचार किया जा रहा है वह- नकली दवाओं के लिये औषधीय आपूर्ति श्रृंखला, सब्सिडी रहित उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला एवं भूमि संबंधी अभिलेखों काडिजिटलीकरण हैं ।

ब्लॉकचेन एवं कृत्रिम बुद्धिमता को प्रोत्साहन देने के लिये नीति आयोग ने अन्य देशों की सरकारों, राज्य सरकारों, कृत्रिम बुद्धिमता का विकास करने वाली कम्पनियों एवं अकादमिक संस्थानों के साथ अनेक प्रकार के सहयोग किये हैं ।

(iv) मैथेनॉल अर्थव्यवस्थाः जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता एवं निर्यात कम करने के लिये एक शीर्ष समिति एवं पांचकार्यबल मैथेनॉल अर्थव्यवस्था के क्रियान्वयन पर एक रोडमैप बनाने पर कार्य कर रहे हैं । इसके अंतर्गत उठाये जानेवाले कदमों में कोयले की राख एवं नगरीय ठोस अपशिष्ट से मैथेनॉल का उत्पादन, भंडारण, ढुलाई एवं मैथेनॉल इंजिनोंका अनुसंधान एवं विकास शामिल हैं । पोत परिवहन मंत्री ने अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन के लिये मैथेनॉल मिश्रितईंधन का उपयोग करने का निर्णय लिया है । सरकार स्वदेश में उत्पादित मैथेनॉल, जो कच्चे तेल पर भारत के 10 प्रतिशत आयात को कम कर सकता है एवं इस तरह वर्ष 2030 तक ईंधन पर खर्च को 30 प्रतिशत कम कर सकता है, को प्रोत्साहन देने के लिये एक ‘मैथेनॉल अर्थव्यवस्था कोष’ बनाने पर विचार कर रही है ।

(v) शरीर रक्षा कवच में ‘मेक इन इण्डिया‘ के लिये रोडमैपः नीति आयोग की एक समिति ने भारत में शरीर रक्षा कवचके निर्माण का रोडमैप तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय में जमा करवा दिया है । इसमें की गई प्रमुख अनुशंसाओं में कच्चेमाल समेत शरीर रक्षा कवच निर्माण के स्वदेश में उत्पादन को प्रोत्साहन देना, परीक्षण हेतु अधिक सुविधाओं कीरचना, शरीर रक्षा कवच में भारतीय मानक अंगीकार करना, हल्के शरीर रक्षा कवच हेतु अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी सामग्रीके क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिये उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना एवं अधिग्रहण की प्रक्रिया का सरलीकरण करनाशामिल हैं । यह सभी कदम शरीर रक्षा कवच का स्वदेश में निर्माण करने में मदद करेंगे एवं रक्षा, अर्द्धसैनिक बलों एवंसुरक्षा एजेंसियों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे । प्रधानमंत्री ने रिपोर्ट में की गई सभी सिफारिशों को स्वीकार करलिया है ।

अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध

क. नीति आयोग एवं चीन गणराज्य के नेशनल डेवलमेंट एण्ड रिफॉर्म कमीशन की सह-अध्यक्षता में अक्टूबर 6-7, 2016 को चौथे भारत-चीन रणनीतिक आर्थिक संवाद का आयोजन किया गया ।

ख. यूएस डीओई- एनर्जी इंफॉर्मेशन कमीशन (इआईए) की भारतीय ऊर्जा मंत्रालयों एवं विभागों के साथ ऊर्जा आंकड़ाप्रबंधन बैठकें अक्टूबर 24-27 के बीच नई दिल्ली में आयोजित की गई ।

ग. नीति आयोग एवं चीन गणराज्य के डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर डायलॉग (डीआरसी) का संवाद वर्ष 2016 में निर्धारितकिया गया था, जिसका दूसरा एवं तीसरा संस्करण नवम्बर 2016 एवं दिसम्बर 2017 में क्रमशः दिल्ली एवं बीजिंगमें आयोजित किया गया । नीति आयोग एवं डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर डायलॉग (डीआरसी) के बीच चौथा संवाद नवम्बर 2018 में मुंबई में आयोजित किया गया ।

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