Search

Press Information Bureau

Government of India

Date

December 27, 2018

वर्ष 2018 के दौरान इस्पात मंत्रालय की उपलब्धियां

                    वर्षांत समीक्षा 2018 : इस्पात मंत्रालय

इस्पात मंत्रालय की पहल, मेक इन स्टील – मेक इन इंडिया

#माईलवस्टीलआइडिया, इस्पात के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के लिए

2017-18 में इस्पात सीपीएसई का कारोबार

   राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 और घरेलू रूप से निर्मित आयरन एंड स्टील उत्पाद नीति 2017 के द्वारा इस्पात के उत्पादन और खपत दोनों में भारी मात्रा में वृद्धि हुई है। इस्पात की प्रति व्यक्ति खपत 2013-14 में 59 किलोग्राम से बढ़कर 2017-18 में 69 किलोग्राम हो गई है। 2017-18 में भारत ने 103 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया है और वह जल्द ही वर्ष 2018 में दुनिया में स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन जाएगा। इस्पात उत्पादन की क्षमता 2012-13 में 97 मिलियन टन से बढ़कर 2017-18 में 138 मिलियन टन हो गई है। भारत सरकार का बुनियादी ढांचों के निर्माण पर जोर और प्रतिबद्धता, मेक-इन-इंडिया और स्मार्ट सिटी अभियान से इस्पात का खपत प्रभावशाली रूप से बढ़ा है। 50 प्रतिशत से ज्यादा इस्पात का उत्पादन माध्यम क्षेत्र में है, जिसमें देश में फैले हुए छोटे उत्पादक शामिल हैं, जो कि बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मुहैया कराते हैं।

इस्पात मंत्रालय, आईएनएसडीएजी द्वारा कम लागत वाले आवास डिजाइनों के माध्यम से तथा पुलों, भूमिगत ऩालियों, आंगनवाड़ी, पंचायत हॉल और सामुदायिक शौचालय जैसी विभिन्न संरचनाओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी विकास को बढ़ावा दे रहा है।

इस्पात मंत्रालय ने रेलवे, सड़क परिवहन, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और वन, कोयला और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालयों के सहयोग से स्टील के उपयोग में वृद्धि और स्टील परियोजनाओं में तेजी से विकास किया है।

                            image0011VG5.jpg

                                              भारतीय रेलवे की पटरियों में इस्पात का उपयोग

इस्पात मंत्रालय ने भारत में इस्पात के खपत को बढ़ाने के लिए MyGov मंच का उपयोग विचारों के स्रोत को इकट्ठा करने के लिए किया। इस्पात क्षेत्र में विचारों को आमंत्रित करने के लिए #माईलवस्टीलआइडिया नामक एक प्रतियोगिता आयोजित की गई। पहला पुरस्कार दिल्ली के सुमित गुप्ता को सौर पैनलों और जैव शौचालयों से युक्त इस्पात पर आधारित कम लागत वाले विस्तार किए जा सकने वाले छोटे घरों के निर्माण के आइडिया के लिए दिया गया। दूसरा पुरस्कार तिरुवनंतपुरम हरीश एस को संलग्न पृथक भंडारण और विज्ञापन के लिए जगह के प्रावधानों के साथ स्टेनलेस स्टील से बने कचरे के डिब्बे के डिजाइन के आइडिया के लिए दिया गया। तीसरा पुरस्कार गुजरात के नडियाद शहर के वसिममलेक को दैनिक जीवन बार-बार खुदाई के कारण में लोगों को हो रही परेशानियों से निजात दिलाने के लिए सड़कों और अपार्टमेंट में स्थायी भूमिगत इस्पात नलिकाओं के इस्तेमाल करने के आइडिया के लिए दिया गया।

100 स्मार्ट सिटीज मिशन, सभी के लिए आवास मिशन, कायाकल्प और शहरी रूपांतरण के लिए अटल मिशन और हाई स्पीड बुलेट ट्रेन और मेट्रो ट्रेन जैसे प्रमुख कार्यक्रम हमारे देश में इस्पात के मांग की बढ़त्तरी में बहुत सहयोग देंगे।

केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री बीरेंद्र सिंह

image002K7KA.jpg

स्टील उद्योग निसंदेह रूप से एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है जो कि किसी भी देश के आर्थिक विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 श्री विष्णु देव साईं

केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री

image003I8QS

भारत 2017 में कच्चे इस्पात के उत्पादन में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश था और जनवरी से लेकर अक्टूबर 2018 की अवधि में वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है।

तालिका 1: इस्पात उत्पादक प्रमुख देश
(मिलियन टन में)
देश 2013 2014 2015 2016 2017 जनवरी-अक्टूबर2018
ब्राजील 34.163 33.897 33.256 31.28 34.36 29.2
चीन 822 822.306 803.825 807.61 831.73 782.5
जर्मनी 42.645 42.943 42.676 42.08 43.30 35.6
भारत 81.299 87.292 89.026 95.48 101.46 88.4
इटली 24.093 23.714 22.018 23.37 24.07 20.6
जापान 110.595 110.666 105.134 104.78 104.66 87.2
रूस 69.008 71.461 70.898 70.45 71.49 60.3
दक्षिण कोरिया 66.061 71.543 69.67 68.58 71.03 60.4
तुर्की 34.654 34.035 31.517 33.16 37.52 31.3
अमेरिका 86.878 88.174 78.845 78.48 81.61 71.7
अन्य 278.96 283.42 273.14 271.70 289.25 234.9
कुल 1650.354 1669.45 1620.001 1626.95 1690.48 1502.0
स्रोत: डब्लूएसए, सांख्यिकीय वर्ष पुस्तक 2018        

वर्तमान समय में भारत डायरेक्ट रिड्युसड आयरन (डीआरआई)/ स्पंज आयरन का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

तालिका 2: डीआरआई उत्पादक देश
(मिलियन टन में)
देश 2013 2014 2015 2016 2017 जनवरी- अक्टूबर2018
भारत 22.6 24.5 22.6 27.0 29.5 25.5
ईरान 14.5 14.6 14.5 16.0 19.4 20.6
मैक्सीको 6.1 6.0 5.5 5.3 6.0 5.0
 

मिस्र

3.4 2.9 2.5 2.6 4.7 4.7
संयुक्त अरब अमीरात 3.1 2.4 3.2 3.5 3.6 3.1
कतर 2.4 2.5 2.6 2.5 2.5 2.1
अन्य 27.5 28.4 25.0 21.4 23.0 8.4
कुल 79.6 81.3 76.0 78.3 88.7 69.4
स्रोत: डब्लूएसए, सांख्यिकीय वर्ष पुस्तक 2018      

देश 2017 में दुनिया में तैयार स्टील का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है और जल्दी ही इसके दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता बनने की उम्मीद है।

तालिका 3: 2017 में इस्पात का उपयोग करनेवाले 10  प्रमुख देश
(मिलियन टन में)
देश 2013 2014 2015 2016 2017 2018 (f) 2019 (f)
चीन 741.4467 710.768 672.34 681.02 736.83 781 781
अमेरिका 95.7 106.957 96.131 91.861 97.722 99.9 101.2
भारत 73.652 76.05 80.08 83.643 88.68 95.4 102.3
जापान 65.24 67.69 62.95 62.17 64.38 64.5 64.8
दक्षिण कोरिया 51.762 55.521 55.8 57.076 56.402 54.1 54.7
जर्मनी 38.013 39.642 39.265 40.454 41.007 41.2 41.9
रूस 43.31 43.146 39.824 38.647 40.623 41.1 41.2
तुर्की 31.301 30.773 34.381 34.077 36.055 35.2 35.8
मैक्सीको 20.574 23.472 24.956 25.487 26.43 25.9 26.2
इटली 21.904 21.928 24.488 23.733 24.649 25.6 25.9
अन्य 362.8893 374.91 375.036 382.53 384.501 394 406.2
कुल 1545.792 1550.857 1505.251 1520.698 1597.279 1657.9 1681.2
स्रोत: डब्लूएसए, सांख्यिकीय वर्ष पुस्तक 2018, शॉट रेंज आउटलुक 2018    
f – फोरकास्ट              

भारत में तैयार स्टील की प्रति व्यक्ति खपत 2013 में 60 किलोग्राम से बढ़कर 2017 में 69 किलोग्राम हो गई और 2013-14 में 59 किलोग्राम से बढ़कर 2017-18 में 69 किलोग्राम हो गई।

तालिका 4: प्रति व्यक्ति इस्पात उपयोग (उत्पादन, एएसडीयू 000 टन में) – वित्तीय वर्ष के हिसाब से
विवरण 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18
 

सकल उत्पादन

95577 100681 102904 115910 126855
 प्रत्यक्ष स्टील उपयोग (एएसयू) 74096 76992 81525 84042 90706
% वृद्धि 0.8% 3.9% 5.9% 3.1% 7.9%
जनसंख्या (पर्यावरण सर्वेक्षण 17-18) 125.1 126.7 128.3 129.9 131.6
प्रति व्यक्ति एएसयू (किलो) 59 61 64 65 69
% वृद्धि -1.7% 3.4% 4.9% 1.6% 6.2%
स्रोत: जेपीसी          

2017-18 के दौरान देश में कच्चे इस्पात की क्षमता 137.9 75 मिलियन टन थी जबकि कच्चे इस्पात का उत्पादन 103.131 मिलियन टन तक पहुंच चुका था।

तालिका 5: कच्चे इस्पात की क्षमता और उत्पादन
( ‘000 टन में)
वर्ष कार्य क्षमता उत्पाद % उपयोग
2013-14 102260 81694 80%
2014-15 109851 88980 81%
2015-16 121971 89791 74%
2016-17 128277 97936 76%
2017-18 137975 103131 75%
स्रोत: जेपीसी      

भारत पिछले दो वर्षों से तैयार इस्पात का शुद्ध निर्यातक देश रहा है।

तालिका 6: तैयार इस्पात का व्यापार
( ‘000 टन में)
व्यापार 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 अप्रैल- अक्टूबर 2018  
आयात 7925 5450 9320 11712 7227 7481 4720  
निर्यात 5368 5985 5596 4079 8243 9619 3739  
स्रोत: जेपीसी                

माध्यम इस्पात क्षेत्र को प्रोत्साहन

‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंगर्गत कैपिटल गुड्स निर्माताओं के साथ समझौता ज्ञापन [एमओयू]

राष्ट्रीय इस्पात नीति- 2017 की परिकल्पना वर्तमान समय मे देश की स्टील उत्पादन क्षमता 137 मीट्रिक टन को 2030-31 तक बढ़ाकर 300 मिलियन टन (एमटी) करना है।

300 मिलियन टन (एमटी) क्षमता तक पहुंचने के लिए संयंत्र और उपकरणों के आयात की अनुमानित लागत 25 अरब अमेरिकी डॉलर होगी। इसके अलावा, यह अनुमान लगाया गया है कि 300 एमटी क्षमता स्तर तक पहुंचने के लिए, भारत को स्वामित्व और अन्य चीजों के आयात के लिए सालाना 500 मिलियन अमरीकी डालर खर्च करना पड़ेगा।

इस्पात मंत्रालय ने ‘कैपिटल गुड्स इन स्टील सेक्टर: मेन्युफैक्चरिंग इन इंडिया’ पर एक कॉन्क्लेव का आयोजन 23.10.2018 को भुवनेश्वर, उड़ीसामें किया। यह कॉन्क्लेव  इस्पात के क्षेत्र में पूंजीगत वस्तुओं की घरेलू क्षमता, क्षमता निर्माण और पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने की एक पहल है।

भारत सरकार के इस विजन को पूरा करने के लिए, सेल ने इस कॉन्क्लेव को दौरान कैपिटल गुड्स निर्माताओं (भेल, एचईसी और मेकॉन) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिससे कि इस्पात क्षेत्र से संबंधित पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण में स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिल सके।

माध्यम इस्पात उत्पादकों के लिए पुरस्कार योजना

इस्पात मंत्रालय ने 2018 में माध्यम इस्पात उत्पादकों द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को मान्यता देने के लिए और इन उत्पादकों को दक्षता, गुणवत्ता, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के संचालन में उच्च मानकों को प्राप्ति करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए और नवाचार, अपशिष्ट उपयोग, जीएचजी के उत्सर्जन में कमी इत्यादि को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक पुरस्कार योजना की शुरूआत की है।

दिनांक 13 सितंबर, 2018 को आयोजित माध्यम इस्पात क्षेत्र कान्क्लेव में वर्ष 2016-17 के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

घरेलू रूप से निर्मित आयरन और स्टील उत्पादों (डीएमआई एंड एसपी) की नीति

मई, 2017 में प्रारंभ किए गए आयरन और स्टील उत्पादों (डीएमआई एंड एसपी) के घरेलू निर्माताओं को वरीयता देने की पॉलिसी से लगभग 8,500 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा की अनुमानित बचत की गई है।

स्टील रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी मिशन ऑफ इंडिया (एसआरटीएमआई)

 भारत में लौह और इस्पात के क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्व की संयुक्त सहयोगी शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एसआरटीएमआई नामक एक प्रगतिशील संस्थागत तंत्र के स्थापना की ओर कदम बढ़ाया है। यह एक उद्योग संचालित प्लेटफॉर्म है और प्रारंभिक समूहों को इस्पात की प्रमुख कंपनियों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। एसआरटीएमआई को 14 अक्टूबर 2015 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। लोहे और इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान के लिए एसआरटीएमआई सक्रिय रूप से इस्पात कंपनियों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और अकादमिक संस्थाओं के साथ बातचीत कर रहा है।

विकास और अनुसंधान के लिए बजट

इस्पात मंत्रालय अनुसंधान एवं विकास योजना के अंतर्गत इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के प्रमोशन को वित्तपोषित कर रहा है। वर्ष 2018 के दौरान, 43.87 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले 10 आरएंडडी परियोजनाओं का अनुमोदन किया गया है, जिसमें सरकारी बजट से 40.79 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। आरएंडडी की 25 परियोजनाएं प्रगतिशील अवस्था में है। इस्पात मंत्रालय, एमएचआरडी के अंतर्गत आने वाली आईएमपीआरआईटीटी योजना के तहत 11.04 करोड़ रुपये के कुल लागत वाली तीसरी आरएंडडी परियोजनाओं में 50 प्रतिशत (5.52 करोड़ रुपये) का वित्तपोषण कर रहा है।

इस्पात विकास कोष के माध्यम से आरएंडडी

वर्ष 2018 के दौरान, एसडीएफ की सहायता वाले आरएंडडी योजना के अंतर्गत 9 आरएंडडी परियोजनाओं को चलाया जा रहा था।

इस्पात प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टत केंद्र

इस्पात मंत्रालय मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग में विश्व स्तर की सुविधा और इस्पात क्षेत्र में मानव संसाधन विकास का निर्माण के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। इस प्रकार की सुविधाएं लोहा और इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दे रही हैं और इस क्षेत्र के लिए कुशल श्रमशक्ति भी पैदा करती है। इस प्रकार के चार ऐसे केंद्र आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी, बीएचयू और आईआईटी मद्रास में स्थापित/ अनुमोदित किए गए हैं।

स्टील और स्टील उत्पादों का गुणवत्ता नियंत्रण

इस्पात मंत्रालय, बीआईएस प्रमाणन अंक योजना के अंतर्गत उत्पादों को अधिकतम कवरेज देने के साथ अग्रणी मंत्रालय है। देश में 85 प्रतिशत से ज्यादा इस्पातों का उत्पाद अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के अंतर्गत आता है। यह आदेश घटिया इस्पात उत्पादों के आयात, बिक्री और वितरण को प्रतिबंधित करता है। यह अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए भी बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का निर्धारण करता है। इस्पात मंत्रालय ने अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन योजना के अंतर्गत अब तक 47 कार्बन स्टील और 6 स्टेनलेस स्टील उत्पाद मानकों को कवर किया है। सरकार ने बुनियादी ढांचे, निर्माण, आवास और इंजीनियरिंग क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण अंत उपयोगी अनुप्रयोगों के लिए गुणवत्ता वाले स्टील की आपूर्ति को आसान बना रही है।

नेडो मॉडल परियोजनाएं

न्यू एनर्जी एंड इंडस्ट्रीयल टेक्नोलॉजी ऑरगेनाइजेशन (नेडो), की स्थापना 1980 में जापान सरकार की एक संस्था के रूप में विकास को बढ़ावा देने, नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का प्रस्तुतीकरण और औद्योगिक प्रौद्योगिकी के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया। नेडो, जापान के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय बड़े सार्वजनिक शोध और विकास प्रबंधन संगठनों में से एक है।

औद्योगिक प्रौद्योगिकी के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से, नेडो उन्नत किस्म की नई तकनीकों के अनुसंधान और विकास की खरीद करता है। इनके विचारणीय प्रबंधन की जानकारी को रेखांकित करते हुए कि नेडो कैसे भविष्य के प्रौद्योगिकी की शुरूआत के साथ-साथ विकास के लिए मध्य-दीर्घकालिक परियोजनाओं का पता लगाती है जो कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आधार बनता है, यह व्यावहारिक अनुप्रयोगों से संबंधित अनुसंधानों को भी समर्थन प्रदान करता है।

नेडो मॉडल परियोजनाओं के अंतर्गत, कुशल ऊर्जा, स्वच्छ और हरी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए इस्पात मंत्रालय ने, जापान सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करके, एकीकृत इस्पात संयंत्रों में मॉडल परियोजनाओं की स्थापना के लिए सुविधा प्रदान की है। अप्रैल 2014-मार्च 2018 की अवधि के दौरान, ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए एक मॉडल परियोजना को मंजूरी दे दी गई है और इसका कार्यानवयन आईएसपी बर्नपुर में स्थित सेल के प्लांट में किया जा रहा है।

यूएनपीडी परियोजना

इस्पात मंत्रालय ने यूएनडीपी और औसएड के सहयोग से परियोजना को “अप स्केलिंग एनर्जी इफिसिएंट प्रोडक्शन इन स्मॉल स्केल स्टील इंडस्ट्री इन इंडिया” को लागू किया है। इस परियोजना के माध्यम से, 283 पुन: रोलिंग मिलों में ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकियों को लागू करने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया गया और उत्पादकता में सुधार, ऊर्जा खपत में कमी और जीएचजी उत्सर्जन के लिए 4 इंडक्शन भट्ठी इकाइयों की शुरूआत की गई। जिसके परिणामस्वरूप इन इकाइयों में ऊर्जा खपत में औसत 24 प्रतिशत की कमी आई है।

                                स्टील ऑथारटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल)

image0040F5P.jpg

                                      भिलाई स्टील प्लांट के दहन की भट्टी

सेल के आधुनिकीकरण और विस्तार की योजना

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अपने कच्चे इस्पात की क्षमता को 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़ाकर 21.4 एमटीपीए तक करने के लिए अपने पांच एकीकृत इस्पात संयंत्रों, भिलाई (छत्तीसगढ़), बोकारो (झारखंड), राउरकेला (ओडिशा), दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) और बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) और सलेम (तमिलनाडु) में विशेष इस्पात संयंत्रों के आधुनिकीकरण और विस्तार करने  का दायित्व उठाया है।
सालेम इस्पात संयंत्र, राउरकेला इस्पात संयंत्र, आईआईएससीओ इस्पात संयंत्र, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र और बोकारो इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार का काम पूरा हो चुका है। नई सुविधाओं का संचालन, स्थिरीकरण और उत्पादन बढ़ोतरी के अंतर्गत है।

भिलाई स्टील प्लांट के अंतर्गत, आधुनिकीकरण और विस्तार की प्रमुख आवश्यकताएं पूरी कर ली गई हैं। भारत के प्रधानमंत्री ने 14.6.2018 को आधुनिकीकृत और विस्तारित भिलाई इस्पात संयंत्र को देश के नाम समर्पित किया।

हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्लांट के लिए संयुक्त उपक्रम

आरएसपी के मंडीरा डैम में 10 मेगावाट हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्लांट की स्थापना के लिए ओडिशा हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (ओएचपीसी) की सहायक कंपनी की ग्रीन एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा (जीईडीसीओएल) और सेल के बीच एक संयुक्त उपक्रम का गठन किया गया है। इस संयुक्त उपक्रम में सेल की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और शेष 74 प्रतिशत हिस्सेदारी जीईडीसीओएल की होगी। संयुक्त उपक्रम कंपनी “गेडकोल सेल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीएसपीसीएल)” को दिनांक 6.9.2018 को निगमित किया गया है।

रेलवे लाइन का विकास

रेल मंत्रालय, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और सेल एकसाथ मिलकर दिल्ली-राजहर और रोघाट के बीच 95 किलोमीटर की दूरी की ब्रॉड गेज रेल लिंक का निर्माण कर रही है। रेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को रेल मंत्रालय ने दिल्ली-राजहर और रोघाट के बीच इस रेल लाइन का निर्माण करने का अधिकार दिया है। वर्ष 2018 के दौरान, 17 किलोमीटर से 34 कि.मी. तक रेल लाइन के निर्माण का दूसरा खंड पूरा कर लिया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अप्रैल में इस विस्तार का उद्घाटन किया और अब यह लाइन परिचालन में है।

एएआई के साथ एमओयू

सेल और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने अप्रैल 2018 में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस), भारत सरकार की एक प्रमुख परियोजना ‘उड़ान’ के लिए सेल के राउरकेला, बोकारो और बर्नपुर हवाईअड्डों के उपयोग पर एमओयू पर हस्ताक्षर किया है।

हिमाचल प्रदेश के स्टील प्रोसेसिंग यूनिट (एसपीयू) में उत्पादन

 

एसपीयू, खंडूरी, हिमाचल प्रदेश में प्रति वर्ष 100,000 टन टीएमटी बार्स की उत्पादन क्षमता के साथ नियमित उत्पादन का काम वर्ष 2018 के दौरान शुरू हुआ। इस यूनिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। एसपीयू, खंडूरी के उत्पाद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में बेचे जाते हैं जिससे की इन क्षेत्रों की परियोजनाओं और खुदरा ग्राहकों की आपूर्ति को पूरा किया जा सके।

इस्पात के खपत को बढ़ावा देने के लिए अभियान

सेल द्वारा 2018 में लक्षित आबादी के साथ सक्रिय रूप से संलग्न रहने तथा स्थानीय ठेकेदारों, इंजीनियरों और उपयोगकर्ताओं से जुड़कर रहने और लोगों में इस्पात की उपयोगिता के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘सेल स्टील- गांव की ओर’, नामक अभियान को लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर ब्रांड निर्माण, जनता को बाहरी रूप से जानकारी प्रदान करना, इस्पात के महत्व के बारे में दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी प्रदान करना है। अप्रैल-नवंबर 2018 के दौरान 67 बैठकें आयोजित की गई। बैठकों में  भाग लेने वाले प्रतिभागियों में राजमिस्त्री, स्थानीय पंचायत या तहसील के प्रतिनिधि, बैंक अधिकारी, प्रोफेसर, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, स्टील और सीमेंट के लघु डीलर, स्थानीय उपभोक्ता, इंजीनियर और सेल के रिटेल चैनल पार्टनर शामिल थे।

राउरकेला में इस्पात जन अस्पताल का आधुनिकीकरण

image005T3U4.jpg

                   राउरकेला स्टील प्लांट, ओडिशा

  राउरकेला के सेल में 600 बिस्तरों वाले इस्पात जन अस्पताल का 295 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से आधुनिकीकरण किया गया। यह अस्पताल अब 6 विषयों में स्नातकोत्तर चिकित्सा की शिक्षा प्रदान करता है: बर्न और प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियो-थोरैसिक सर्जरी और नेफ्रोलॉजी।  इस्पात जन अस्पताल वर्तमान समय में सेल के कर्मचारियों और उनके परिवारों के अलावा स्थानीय आबादी का ईलाज कर रहा है और विभिन्न सीएसआर पहलों के अंतर्गत मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है।   अस्पताल के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए 13 अगस्त, 2018 को सेल, राउरकेला स्टील प्लांट और नेशनल बिल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है।

सेल का टर्नओवर

  मार्च 2018 तक, सेल का टर्नओवर अबतक का सर्वाधिक लगभग 58,297 करोड़ रुपया रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। कंपनी ने मार्च 2018 के समाप्त वर्ष में 2,83 करोड़ रुपये के नकद लाभ के साथ-साथ सीपीएलवाई में 1,53 करोड़ रुपये की नकद हानि भी दर्ज की है। इसके अलावा, सेल ने वार्षिक आधार पर कारोबार में होने वाले घाटे में 80 प्रतिशत तक की कमी लाया है।   एच2 2017-18 में, यह 1,268 करोड़ रुपये के पीबीटी को पंजीकृत करके मुनाफे में तब्दील हो गई।   अपने मजबूत प्रदर्शन के साथ, सेल ने 32,284 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो सीपीआईएल में 23 प्रतिशत की वृद्धि है। सीपीआईएल के दौरान टैक्स में 2,028 करोड़ रुपये के नुकसान के मुकाबले, एच1 2018-19 में पीबीटी लगभग 1,676 करोड़ रुपया रहा।

 राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी)

निस्प नगरनार, बस्तर, छत्तीसगढ़  

3 एमटीपीए के विश्व मानकों का एकीकृत इस्पात संयंत्र की स्थापना छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नगरनार में की गई है जिसका परिचालन 2019 में शुरू हो जाएगा। यह शून्य निर्वहन के साथ काम करेगा और इसकी रूप-रेखा को स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी फॉर एनर्जी इफिसिएंट टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है।   इस प्लांट को पानी और बिजली के सर्वोत्कृष्ट उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें नवीनतम विधूलीयन प्रणाली, प्रदूषण उत्प्रवाही संयंत्र, प्रदूषण निगरानी प्रणाली को अपनाया गया है। सभी हवा और अन्य उत्सर्जन विश्व मानकों से उंचे और ऊपर के स्तर के हैं। कच्चा माल संचालन प्रणाली पूरी तरह से स्वचालित है और उच्च स्तर के धूल दमन प्रणाली से सुसज्जित है।   पूरे संयंत्र को 1800 एकड़ से भी कम समय जगह में स्थापित किया गया है जिसके चारदीवारी के चारों ओर 25 मीटर चौड़ाई वाली ग्रीन बेल्ट है और इसका 33 प्रतिशत क्षेत्र पेड़ों से ढका हुआ है।

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (रीनल)  

विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र (वीएसपी)- राष्ट्रीय इस्पत निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) कॉर्पोरेट इकाई के अंतर्गत भारत का पहला तटीय सार्वजनिक क्षेत्र का एकीकृत संयंत्र है। आरआईएनएल-वीएसपी को सूचना संरक्षा प्रबंधन प्रणाली (आईएसएमएस) के लिए आईएसओ 27001 से प्रमाणित होने का गौरव प्राप्त है।   रीनल ने अपने प्रमुख उत्पादन मौजूदा सुविधाओं जैसे पिघलाऊ भट्टियां, स्टील मेल्ट शॉप कन्वर्टर्स और धातुमल संयंत्र का आधुनिकीकरण किया है जिससे कि प्रमुख उपकरणों के उचित रख-रखाव को बनाए रखा जा सके, जो कि पिछले 2 दशकों से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं। आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में इकाइयों को ऊर्जा कुशल और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आधुनिकीकरण का काम धातुमल मशीन- 2 को छोड़कर सभी जगहों में पूरा कर लिया गया है, जिसे संभवतः 3 पिघलाऊ भट्टियां के संचालन और इष्टतम उत्पादन मॉडल पर विचार करने के बाद किया जा सकता है। आधुनिकीकरण के अलावा, एक और कनवर्टर और कोस्टर को स्थापित किया गया है जिससे कि तरल स्टील क्षमता 1 एमटीपीए बढ़ गई है, यानी यह 6.3 एमटीपीए से 7.3 एमटीपीए हो गया है। सभी आधुनिकीकृत और संशोधित इकाइयों के साथ ही अतिरिक्त कनवर्टर और कोस्टर इकाइयां परिचालन में हैं। पिछले वर्ष इस अवधि के मुकाबले आरआईएनएल के सभी प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में सुधार दर्ज किया गया। इसने पिछले वर्ष इस अवधि की तुलना में, गर्म धातु में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि तरल इस्पात में 19 प्रतिशत, तैयार इस्पात में 15 प्रतिशत और बिक्री योग्य इस्पात उत्पादन में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। रीनल का बिक्री टर्नओवर 13,059 करोड़ रुपये था, जो कि पिछले साल इस अवधि से 39 प्रतिशत ज्यादा है और इस्पात की बिक्री 3.003 मिलियन टन रही, जो कि पिछले साल इस अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा है।

मैंगनेस ओर इंडिया लिमिटेड (मोइल)  

मैंगनेस ओर इंडिया लिमिटेड (मोइल) मैंगनीज-अयस्क खनन के लिए राज्य-स्वामित्व वाली एक मिनीरत्न कंपनी है जिसका मुख्यालय नागपुर, भारत में है। बाजार में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ, यह वित्तीय वर्ष 2008 में भारत में मैंगनीज अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक था। मोइल को भारत में शीर्ष 500 कंपनियों में से 486 वां स्थान प्राप्त है और वर्ष 2011 में इसे खानों और धातु के क्षेत्र में भारत के 500 कंपनियों की सूची में 9 वें स्थान पर रखा गया। मोइल 10 खानों का संचालन करता है जिसमें  महाराष्ट्र के नागपुर और भंडारा जिलों में 6 और मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में चार अवस्थित है। 10 में से सात भूमिगत खान (कंदरी, मुनसर, बेल्डोंगरी, गुमगांव, चिकला, बालाघाट और उक्वा) हैं और तीन खुली खदान (डोंगरीबुजुर्ग, सीतापतोर और तिरोदी) है। इसका बालाघाट खान एशिया का सबसे गहरा भूमिगत मैंगनीज खान है।   वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 8.32 लाख मीट्रिक टन के उत्पादन की तुलना में वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान मैंगनीज अयस्क (गैर-प्रयोजन) का उत्पादन 9.81 लाख मीट्रिक टन रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 117.91 प्रतिशत की अधिकता को दर्शाता है।   मोइल ने वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 9.74 लाख मीट्रिक टन के मैंगनीज अयस्क (गैर-प्रयोजन) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान इसका बिक्री दर 9.5 लाख मीट्रिक टन था।   मोइल ने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान परिचालन के माध्यम से 989.8 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 1323.46 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया है।   मोइल ने वित्त वर्ष 201-17-18 के दौरान सबसे ज्यादा 207.04 करोड़ रुपये का क्षमता व्यय किया है जबकि 2016-17 के दौरान इसका क्षमता व्यय 120.74 करोड़ रूपया था।   मोइल ने भूमिगत खानों में चलने वाले हाइड्रोलिक के बदले एक वैकल्पिक सामग्री के  रूप में एक उपयोगी संरचना और इसके तरीकों के लिए पेटेंट का आवेदन दायर किया है। उत्पाद के विकास और प्रणाली के लिए सभी प्रकार के शोध कार्यों को मोइल के मुंसर और डोंगरीबुजर्ग खान में किया गया है।   मोइल, भूमिगत खानों की रिक्तियों को भरने हेतु हाइड्रोलिक परिवहन के लिए उपयुक्त सामग्री विकसित करने के लिए परीक्षण कर रहा है। आने वाले सालों में यह भूमिगत चीजों को भरने के लिए रेत की खपत को कम करने में और नदी की रेत के खनन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करेगा।

धातु स्क्रैप व्यापार निगम लिमिटेड (एमएसटीसी)  

एमएसटीसी लिमिटेड, इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत एक मिनी रत्न श्रेणी-1 की पीएसयू है। इस कंपनी की स्थापना 9 सितंबर 1964 को लौह स्क्रैप के निर्यात हेतु एक नियामक प्राधिकरण के रूप में कार्य करने के लिए की गई थी।   एमएसटीसी के संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी, महिंद्रा एमएसटीसी रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड (एमएमआरपीएल) पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से कबाड़ वाहनों और अनुपयोगी सामानों के पुनर्चक्रण और कर्तन के लिए एक संगठित व्यवस्था की स्थापना के लिए पहल को करने वाली पहली कंपनी है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, इस कंपनी ने 44000 वर्गफुट कवर क्षेत्र वाली  लगभग 6 एकड़ की जमीन ग्रेटर नोएडा मे लीज पर ली है, जो कि भारत का पहला अत्याधुनिक संग्रह और समापन केंन्द्र है और यह परिचालन की अवस्था में है।   यह कंपनी रीसाइक्लिंग के लिए दिल्ली और एनसीआर से व्यक्तियों और संस्थानों से पुराने वाहनों को खरीदती है। यह पुराने वाहनों के लिए आकर्षक दामों के प्रस्तावों के साथ इसे घर से उठाने जैसी सेवाएं प्रदान करती है। गुजरात के दाहेज एक कटाई संयंत्र के स्थापना की प्रक्रिया चल रही है, जो कि अगले वर्ष से परिचालित हो जाएगा और भारत में इस प्रकार का पहला संयंत्र होगा। यह न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराएगा बल्कि भारत में कटे हुए स्क्रैप के आयात का एक विकल्प होगा और विदेशी मुद्रा में भी बचत करेगा।   एक बार कार का स्क्रैप प्राप्त हो जाने के बाद उसे ग्रेटर नोएडा में रीसाइक्लिंग सुविधा केंद्र में ले जाया जाता है और यूरोप और अमेरिका में रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के लिए अपनायी जाने वाली विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ध्वस्त और  नष्ट कर दिया गया है। एमएमआरपीएल की वेबसाइट cerorecycling.com की शुरूआत गई है और रेडियो विज्ञापन भी दिए जा रहे हैं, जिससे कि समाज में बड़े पैमाने पर रीसाइक्लिंग सुविधा के लाभों के बारे में और इस्पात क्षेत्र में संसाधन अनुकूलन के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके।   भारत में टुकड़ों में बंटे हुए स्क्रैप की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे 50-60 कर्तन संयंत्रों को तुरंत स्थापित करने की आवश्यकता है।                            

 केआईओसीएल

  केआईओसीएल लिमिटेड इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख कंपनी है। यह एक मिनी-रत्न कंपनी है और इसे आईएसओ 9001:2008, आईएसओ 14001:2004 और ओएचएसएएस 18001:2007 का प्रमाणन प्राप्त है। यह एक निर्यात पर आधारित इकाई है, जिसे विशेषज्ञता लौह अयस्क खनन, निस्पंदन प्रौद्योगिकी और उच्च गुणवत्ता वाले छर्रों के उत्पादन में है।   छर्रा संयंत्र की वार्षिक क्षमता लगभग 3.5 मिलियन टन लौह अयस्क छर्रों का उत्पादन करना है। अन्य सुविधाओं में छर्रों को स्टॉकयार्ड से पोत तक सीधे लोड करने की सुविधा शामिल है। मैंगलोर संयंत्र में उत्पादित छर्रों में उच्च गुणवत्ता वाले मेटलर्जिकल गुण होते हैं और विस्फोट भट्टी और डीआरआई इकाइयों के लिए आदर्श फीड हैं।   केआईओसीएल ने एनएमडीसी के साथ लौह अयस्क लाभ और गोलीकरण संयंत्र के लिए, उड़ीसा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) के साथ कालीपानी, ओडिशा में 1.4 एमटीपीए क्रोम अयस्क लाभकारी संयंत्र के संचालन और प्रबंधन के लिए ओ एंड एम अनुबंध किया है और एमआरपीएल, मंगलुरु के कोक हैंडलिंग सिस्टम (क्रसर कन्वेयर) का संचालन किया है।   मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत, केआईओसीएल ने निर्यात के लिए ब्राजील से आयातित उच्च स्तर के अयस्कों से उच्च स्तर के छर्रों का उत्पादन किया है।   कौशल विकास पर राष्ट्रीय नीति का समर्थन करने और इसमें भाग लेने के लिए, केआईओसीएल ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और क्वेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एनएसडीसी का एक प्रमाणिक साझेदार, के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। कर्मचारियों, अनुबंध श्रमिकों, स्थानीय युवाओं, महिलाओं, वंचित समूहों और सीपीयू सहित आस-पास के अन्य प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।   कुद्रमुख खानों के बंद होने के बाद, वित्तीय वर्ष 2017-18 में 23,27,000 मीट्रिक टन का उत्पादन और 23,00,801 मीट्रिक टन छर्रों का प्रेषण सबसे ज्यादा हैं। 31 मार्च, 2018 को स्टॉक एक्सचेंजों में कारोबार की गई बाजार मूल्य के आधार पर, केआईओसीएल को बाजार पूंजीकरण के आधार पर पांच सौ शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल किया गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी सूची के अनुसार, शीर्ष 500 कंपनियों की सूची में केआईओसीएल का स्थान 182वां है।   केआईओसीएल ने दक्षिण कलीपानी, ओडिशा में अपने नए क्रोम अयस्क लाभप्रद संयंत्र के बचे हुए कार्यों को पूरा करने के लिए इस वर्ष जुलाई में ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ अनुबंध समझौतों पर हस्ताक्षर किया है।

2017-18 में सीपीएसई का कारोबार

image0069ZWQ.jpg

  • लाभ कमाने वाली सीपीएसई के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया •स्टैंडअलोन और निष्पक्ष ई-कॉमर्स सेवा प्रदाता   •ई-नीलामी का सबसे बड़ा मंच   •ई-कॉमर्स में स्क्रैप का विन्यास, कोयले की बिक्री, फेरोमैंगनीज,लौह अयस्क इत्यादि   •ई-नीलामी में स्पेक्ट्रम, कोल लिंकिंग, खनन पट्टा आदि भी शामिल।

image007SRQE

  • 2017-18 में लाभ कमाने वाले सीपीएसई बना •बहु-विषयक डिजाइन, इंजीनियरिंग, परामर्श में अग्रणी  •केवल धातुओं और खनन क्षेत्र में ही नहीं बल्कि   इसके अलावा बिजली, तेल और गैस, बुनियादी ढांचे,  रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, पाइपलाइन, रेलवे इत्यादि     संगठनों से अनुबंध

image008E3PH

  • इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत लाभ कमाने वाली प्रमुख सीपीएसई •2017-18 में 35.5 मीट्रिक टन के उच्चतम उत्पादन की प्राप्ति   •2017-18 में 36.1 मीट्रिक टन की रिकॉर्ड ज्यादा बिक्री

image009BYY1

  • लगातार लाभ कमाने वाली सीपीएसई   •2017-18 के दौरान 9.81 लाख मीट्रिक टन का उच्चतम   गैर-प्रायोजन का उत्पादन   •2017-18 में 12.01 लाख मीट्रिक टन मैंगनीज अयस्क का उत्पादन   •2017-18 में 1,333.35 करोड़ रुपये का अबतक का सर्वोच्च कारोबार।

image01029IA

  • लाभ कमाने वाली सीपीएसई

  • 2017-18 में 23.27 लाख टन का उच्चतम संचयी उत्पादन,

पिछले वर्ष की तुलना मे 57 प्रतिशत की वृद्धि

  • 2017-18 में 23.00 लाख टन का उच्चतम संचयी प्रेषण

अर्थात, पिछले वर्ष की तुलना मे 66 प्रतिशत की वृद्धि।

  • 2017-18 में संचालन से 1629 करोड़ रुपये का राजस्व,

पिछले वर्ष की तुलना में 75 प्रतिशत की वृद्धि।

image011XYP0.jpg

  • लाभ कमाने वाली सहायक सीपीएसई।

  • इस्पात संयंत्रों में स्क्रैप और स्लैग प्रबंधन के लिए

उपपादन की विशेष सेवाएं

  • अपशिष्ट धातुमल के रीसाइक्लिंग से धन का निर्माण और

लौह, स्टील बनाने की प्रक्रिया से स्क्रैप का निर्माण

image012J25S.jpg

  • 2017-18 में आरआईएनएल ने ईबीआईटीडीए पॉजिटिव बनाया

  • 2017-18 में तरल स्टील का 4.972 मीट्रिक टन (प्रो.) उत्पादन,

 जो कि 2013-14 में 3.391 मीट्रिक टन से 46 प्रतिशत अधिक

  • 2017-18 में 1,6625 करोड़ रुपये (प्रो.) का बिक्री कारोबार,

पिछले साल इस अवधि के मुकाबले 31 प्रतिशत अधिक।

image013QWLV.jpg

  • 2017-18 के दौरान सेल के नुकसान में भारी गिरावट दर्ज

  • 2017-18 में 15.983 मीट्रिक टन पर गर्म धातु का उच्चतम उत्पादन

  • पिछले वर्ष की तुलना में 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ

15.021 मीट्रिक टन कच्चे इस्पात का उच्चतम उत्पादन

  • 2017-18 में 14.071 मीट्रिक टन के साथ बिक्री योग्य

इस्पात का उच्चतम उत्पादन

     कॉरपोरेट खेल नीति

केंद्रीय इस्पात मंत्री, चौधरी बीरेंद्र सिंह ने इस वर्ष इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए कॉर्पोरेट खेल नीति का अनावरण किया। यह नीति इस्पात मंत्रालय के सीपीएसई द्वारा खेलों के प्रचार हेतु रूप-रेखा प्रदान करती है।

खेल, किसी भी देश के आर्थिक विकास और मजबूती का संकेतक है और इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले सीपीएसई ओलंपिक खेलों के लिए पदक लानेवाले उम्मीदवारों को तैयार करने की कोशिश करेंगे। प्रतिभा खोज, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण और कोचिंग के लिए बुनियादी ढांचा और संस्थागत समर्थन प्रदान कर सीपीएसई अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

इस्पात सीपीएसई अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार, खेल गतिविधियों के लिए एक विशिष्ट बजट जारी करेंगे और यह बजट कंपनी के सीएसआर फंड से अलग होगा। इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले सीपीएसई ग्रामीण खेलों, दिव्यांगों के लिए खेलों, गृहिणियों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक और आवधिक खेल आयोजनों को प्रायोजित करेंगे। इस्पात मंत्रालय के सीपीएसई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों के आयोजनों को भी प्रायोजित करेंगे।

इस्पात मंत्रालय के सभी सीपीएसई एक शीर्ष खेल निकाय का गठन करेंगे जिन्हें राष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थाओं और संघों, भारतीय ओलंपिक संघ और पैरा ओलंपिक संघ से संबद्ध किया जाएगा। महारत्न और नवरात्र वाले सीपीएसई कम से कम एक मान्यता प्राप्त खेल विषयों में खेल अकादमी की स्थापना करेंगे और सामान्य फिटनेस उपकरण तथा सुविधाओं के साथ उनके बुनियादी ढांचे को बनाए रखेंगे।

जनवरी 2018 से भारत इस्पात की अतिरिक्त क्षमता के साथ वैश्विक फोरम का सह-अध्यक्ष बन गया है।

 

2018 में, इस्पात मंत्रालय की स्क्रैपिंग नीति को अंतिम रूप दिया गया।

                                                                       ********

Advertisements

Year End Review 2018: Ministry of Skill Development and Entrepreneurship

Ministry of Skill Development and Entrepreneurship

More than One Crore youth annually joining and benefitting from the Skill India program;

Core focus on converging all skill development initiatives in the country under one National Skills Qualification Framework;

Skill India– Highlights 2018

skill-india-logo.jpg

This year, Ministry of Skill Development and Entrepreneurship (MSDE) completed its4 successful years, since its inception in 2014. For the first time, a ministry created by the Government of India,is keeping its core focus on converging all skill development initiatives in the country under one National Skills Qualification Framework (NSQF).Annually, more than One Crore youth, have been joining and benefitting from the Skill India program, a mission under the Ministry to equip youth with skills for better livelihood.

Some of the key achievements of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship are:

I. Policy, Framework & Standards

  • Launch of the National Policy for Skill Development and Entrepreneurship in 2015: First ever comprehensive policy framework for skill development of the country
  • National Skill Development Mission,launched in 2015 by Hon’ble Prime Minister – First ever national implementation plan covering all states, territories and people
  • Common Norms – launched in 2015 to provide harmonization of training costs, processes, assessments, certification and outcome. Presently over 20 Ministries are implementing skill development schemes
  • Common Norms Alignment with other schemes and programs; 18 out of 20 Ministries aligned; Ministry of Home Affairs (MHA) exempted because of special nature
  • Enforcement of National Skills Qualification Framework (NSQF) –more than 2,000Qualification Packs developed in four years

II. Programs/Initiatives

  • Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY): It is one of the flagship schemes of the Ministry aimed at providing free-of-cost skill training to over 1 Crore youth in 4 years in 221+ job roles;offering short term training between 2 months to 6 months.

intro-logo.png

  • Pradhan Mantri Kaushal Kendra (PMKK): It is an initiative towards creation of “Model TrainingCenters”with standardized infrastructure for delivery of skill development training to be opened in every district of India; aiming to make benchmark institutions that can demonstrate aspirational value for competency based skill development amongst key stakeholders- industry and trainees.
  • National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS): The scheme is aimed to increase the involvement of industries and employers in engaging youth as apprentices and providing on-the-job skill training to create a ready workforce. The government reimburses part of stipend paid by the employer.
  • Establishing Academic Equivalence: Skill India aimsto make skilling aspirational and bring vocational training in equivalence with the academic education system, especially to provide horizontal and vertical mobility pathway to candidates pursuing vocational education. The Directorate General of Training wing under the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship and National Institute of Open Schooling (NIOS) under Ministry of Human Resource Development have signed a MoU to put in place a system for academic equivalence to vocational/ITI qualification, thereby opening gatewayto meet aspirations of ITI candidates to attain high academic qualification in addition to their skills. This MoU also opens pathways for ex-trainees of ITI, holding National Trade Certificate (NTC) to earn secondary/senior secondary qualification.
  • Capacity building in long term skill development: One of the initiatives towards building capacity of the skill ecosystem is uniform nomenclature of all the skill institutes across country as National Skill Training Institutes (NSTIs), and merging of NSTIs, with courses in ITIs, establishment of Indian Institute of Skills (IIS) and inspections and de-affiliation of various ITIs etc.

Investment in Skill Development Infrastructure

  • Pradhan Mantri Kaushal Kendras: In year 2018, MSDE focused extensively on building industry standardized infrastructure for driving skill development training under Pradhan MantriKaushalKendras (PMKK). PMKK has the potential to become the benchmark of skill development infrastructure, training, and placement in the respective district and; also in the country. Its objective is to make skill development quality oriented, sustainable and aspirational.
  • As on December 2018, 719 PMKKs have been allocated across 29 States and 6 UTs, covering 631 Districts and 521 Parliamentary Constituencies (PC). Out of which, 515 PMKKs have been established and work is under progress to establish 204 additional PMKK Centres. Further, 419 PMKKs have been inaugurated by Local Members of Parliament, Members of Legislative Assembly and other dignitaries. A total of 100 PMKKs have been inaugurated and 65 PMKKs established in 2018.
  • National Skill Training Institute (NSTI): MSDE also laid down the foundation stone of the first National Skill Training Institute (erstwhile RVTI) in Telangana, Hyderabadby the Hon’ble Vice President of India. The foundation stone for NSTI(W) Mohaliwas also laid down by the Minister for Skill Development & Entrepreneurship Sh. Dharmendra Pradhan in July 2018.
  • National Skill Training Institute (W): Under the Central Scheme, regular vocational training programmes are being conducted through an Institutional Network of 18 central Institutes called National Skill Training Institute for Women, providing training facilities exclusively for women in skills having high wage-employment and self-employment potential besides Instructor training programmes.
  • The NSTIs(W), Noida, Bengaluru, Thiruvananthapuram, Jaipur, Allahabad, Kolkata, Tura, Panipat, Vadodara and Indore are housed in their own permanent premises. NSTI(W) Mumbai is currently under operation from a two-floor building provided by the State Government of Maharashtra. NSTIs(W) at Shimla, Mohali, Trichy, Agartala, Patna, Goa and Hyderabad are functioning from temporary buildings provided by the respective State Governments. Besides these 18 operational institutes, the land has been identified for NSTI (W) in Jammu & Kashmir.
  • Regular skill training programmes are being organized under Craftsmen Training Scheme (CTS) and Craft Instructors Training Scheme (CITS) in trades/areas having high demand for wage/self-employment/Trained Instructors. A total of 4,904 regular seats (2784 CTS+2120 CITS) have been sanctioned in the NSTIs(W) in 2018-19 as on November 2018. Besides this, in CTS/CITS courses 2nd units are also being conducted in the trades having high demand.
  • Long Term Training is presently conducted in functional areas such as Office Management, Electronics, Architecture, Computer, Dress Making, Cosmetology, Fruits and Vegetables Processing, Desktop Publishing, Surface Ornamentation Techniques, Fashion Design & Technology, Catering and Hospitality, Sewing Technology, Travel & Tour, Computer Aided Embroidery & Designing, Food and Beverages Service Assistant, Food Production (General), Draughtsman Civil, and Interior Decoration & Designing etc. Besides these, Short Term Training is also provided in 18 NSTIs(W) in the above-mentioned trades. Placement support is also provided to the pass out trainees by organizing Campus Interviews. Apprenticeship Training support is extended to the trainees. Off-campus Short Term Training programsare being conducted by the NSTIs(W).
  • Indian Institute of Skills (IIS): These state-of-the-art centers of excellence are being set up across four regions of India, on the lines ofpremiere global institutes such as Institute of Technical Education (ITE), Singapore. The Hon’ble Prime Minister had launched the first IIS in Kanpur in December 2016, which was conceptualized by the Prime Minister during his visit to ITE Singapore. M/S NBCC has been hired for planning, designing and construction of new building for IIS Kanpur. M/S NBCC has hired an agency and construction work has started. Further, IIS Mumbai will be set up in collaboration with TATA group. Total budget of Rs. 476 Crore has been laid down for building IIS, which will provide hands-on training in advanced courses such as energy efficient construction, industrial electronics and automation etc.

Programs and Achievements made

  • Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) and Recognition of Prior Learning (RPL): Ministry of Skill Development and Entrepreneurship is implementing flagship scheme known as Pradhan MantriKaushalVikasYojana (PMKVY) on pan–India basis.
  • PMKVY (1.0) was launched as a pilot in 2015, as a reward based scheme providing entire cost of training as a reward to successful candidates. The scheme was designed as a skill certification and reward scheme with an aim to enable and mobilize a large number of Indian youth to take up skill training and become employable for sustainable livelihood. Under the scheme, monetary reward was provided to successfully trained candidates. During its pilot phase, PMKVY (1.0) trained over 18 Lakh candidates in 375 job roles.
  • Owing to its successful first year of implementation, the Union Cabinet approved the Scheme for another four years PMKVY (2.0)(2016-2020) to impart skilling to 1 Crore youth of the country with an outlay of Rs. 12,000 crores.PMKVY(2.0) enables large number of prospective youth which also includes tribal community, persons with disability and other disadvantaged youth, to take up Short Term Training (STT) and Recognition of Prior Learning (RPL) through accredited and affiliated training partner/training centers.
  • The schemes runsacross more than 250 job roles related to nearly 38 Sector Skill Councils for Short term training, Special Projects (SPL) and RPL, which is a diverse and exhaustive representation of the industry.
  • Under PMKVY(2.0), as on December 12, 2018, 33,43,335(STT+SPL+RPL) candidates have been trained (23,32,544 STT + 9,38,420 RPL + 73,389under SPL) and undergoing training (82,482STT as on 12thDec,2018) under Short Term Training and 9,951 for SPL and 5,680 for RPL.
  • In FY 2018-19, till December 12, 2018,under PMKVY (2.0)6,88,388 candidates under STT, 2,35,258candidates under RPL and 41,939 candidates under Special Projects have been trained. 10,07,292 candidates were assessed and 9,44,455 candidates were certified in FY 2018 – 19, under the program.
  • Under the Centrally Sponsored State Monitored (CSSM) component of PMKVY (2.0), wherein the skill training is managed by the states, however, funded by the centre – as on 12th December 2018, a total of 1.82 lakh candidates have been enrolled and 94,349 candidates have been trained. A total of 87,722 candidates are currently undergoing training across 169 job roles.
  • The flagship program PMKVY has successfully registered close to 10 lakh placements in 2018. The scheme emphasizes on bringing scale and speed to standards in the skill ecosystem and creating employment opportunities for the youth and women. Encouragingly, women have outshone men with over 5 lakhs registering for the placement drive. The number of male registrations is just a shade under 4.5 lakh and expected to climb in a few months.
  • Since 2018, as a new initiative, each candidate certified under PMKVY (2.0) also gets covered under Personal Accident insurance sum of 2 lakhs which is valid upto 2 years. The cost of this insurance is being covered by the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
  • Recognition of Prior Learning (RPL)with Best in Class Employers: RPL certifies the skills of people with prior experience or those trained informally. Since 2016, the program has benefitted close to 8 lakh people across the country. To scale up this initiative, Ministry of Skill Development & Entrepreneurship launched RPL with Best in Class Employers in 2018 – an initiative to directly collaborate with reputed employers across various sectors. The event saw commitment made by Sector Skill Councils and prominent employers across sectors. A few are listed below:
    • Hydrocarbon Sector – Targeted to certify more than 9 Lakh candidates in partnership with 3 employers
    • Retail Sector – Targeted to certify more than 5 Lakh candidates across 60+ employers
    • Tourism Sector – Targeted to certify more than 5 Lakh candidates across 24 employers
    • Life Sciences Sector – Targeted to certify more than 75 thousand candidates with more than 21 employers
    • Plumbing Sector – Informal and unorganized sectors such as plumbing are also coming along to collaborate for this ambitious initiative in a big way
  • MSDE launched a dedicated portal for Recognition of Prior Learning (RPL) program which will provide a platform for individuals to get information of RPL Centers across the country and register for an upcoming batch.

Fee Based Trainings:  Under the student paid model for skill trainings being implemented by National Skill Development Corporation (NSDC)approved training providers, over 104 lakh trainings have been conducted till December 13, 2018 since inception. In FY 18-19 till November 2018, more than 23 lakh trainings have been reported in high demand job roles, across 35+ priority sectors, which include renewable energy efficiency specialist, smart cities – concept and implementation, solar technicians, rooftop gardening and F&B services specialist amongst others.

Long Term Training: Under the Long-term training module, there are a total of 15,042 ITIs in the country, out of which 2,229 ITIs got affiliated in 2108.  The seating capacity of the ITIs in the country has been increased by 2,94,196 including supernumerary. Directorate General of Training (DGT) which is governing ITIs around the country, published under “Affiliation Norms 2018” which is available on www.ncvtmis.gov.in

    • Grading of ITIs: Directorate General of Training under the aegis of Ministry of Skill Development and Entrepreneurship launched grading exercise for ITIs to provide “Star Rating” to the performing institutes and gave an opportunity to the others to improve upon. The first phase of grading process commenced in November2017 and the entire process has been completed by June 2018. A Total 4811 ITIs including 2940 Pvt. ITIs have been graded and final grades were published on DGT/NCVT MIS website in June 2018.
    • Directorate General of Training is in process of launching the second phase of grading, addressing the feedback received from Phase I and recommendation of the core grading committee. The second phase of grading process will be launched with the aim of grading all the remaining ITIs in the country.

Dual System of Training: The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship signed 27 MoUs with varied industries under the dual system of training (DST) in six states – namely, Odisha, Jharkhand, Rajasthan, Karnataka, Uttar Pradesh and Delhi. Around 80 more MoUs are in the pipeline for Gujarat and Tamil Nadu. The DST scheme is inspired by the German Vocational Training Model, whichenables industries to partner with Government and Private Industrial Training Institutes (ITIs) for conducting training programmes under high employability courses to fulfil the needs of industries. The ITI and industry have the freedom to choose the training pattern either in a block mode (i.e. few months in ITI then few months in industry) or mixed mode (i.e. few days in a week shared between ITI and industry). The dual system of training is currently available in 16 trades for one and two year’s duration. The theory portion and basics about safety and tools, equipment along with foundation practical is conducted in the ITIs. And the industrial training relevant to practical/ lab training portion of the curriculum is taught in the industry. The students are paid a small amount of stipend in their training period at the industry and are awarded National Trade Certificate in dual mode on the successful completion of trainings

  • SANKALP: Skills Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion (SANKALP) project aims to implement the mandate of the National Skill Development Mission (NSDM), which was launched on 15th July by Ministry of Skill Development through its core sub-missions. The project will be implemented in mission mode through World Bank support.

The project was made effective in January 2018 with 28 States and 7 UTs across the country having submitted their consent for participating in SANKALP. The process of disbursements of funds to States/ UTs is underway. Regional workshops with States/ UTs are also being held to facilitate roll out. To promote decentralized planning, “Award for excellence in District Skill Development Planning (DSDP)” has been launched under SANKALP. 223 districts across 19 States/ UTs participated in this. To provide support to aspirational districts in skill development, Aspirational Skilling Abhiyaan has been launched by the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship. Financial assistance of Rs 10 Lakh is provided to each aspirational district through the SANKALP fund. Some other highlights under SANKALP projects are as below:

    • To strengthen the decision making and brining more transparency in the vocational education and skill training system, the Skill India portal has been launched under SANKALP. In the coming years, Skill India portal will be a platform where most of skilling schemes related data of Central & State/ UT will be available.
    • A Global Skill Gap study has been undertaken to evaluate the current scenario and future-outlook for overseas employment of skilled workers from India.Collaboration with Singapore Polytechnic is aimed to strengthen the academies for training of trainers and assessors.
  • STRIVE: “Skills Strengthening for Industrial Value Enhancement (STRIVE)” is aRs 2,200 crore – central sector project, with half of the project outlay as World Bank assistance. STRIVE is an outcome-based project, marking a shift in government’s implementation strategy in vocational education and training from inputs to results building in a strong shift to an outcome-based skill ecosystem. The STRIVE project aims at creating awareness through industry clusters/ geographical chambers that would address the challenge of involvement of Micro, Small and Medium-sized Enterprises (MSMEs). The Project would also aim at integrating and enhancing delivery quality of ITIs. These ITI would be competitively selected for upgradation under the project in order to ensure achievement of the outcome. Currently the operations manual of the project is been prepared which would lay down the standard operating procedure to be followed by the various implementing agencies. Post finalization and approval of the operations manual the implementation phase of the project would commence.
  • National Council for Vocational Education and Training (NCVET):The Union Cabinet chaired by the Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, approved the merger of the existing regulatory institutions in the skills space – National Council for Vocational Training (NCVT) and the National Skill Development Agency (NSDA) into the National Council for Vocational Education and Training (NCVET). NCVET will regulate the functioning of entities engaged in vocational education and training, both long-term and short-term, and establish minimum standards for the functioning of such entities. The primary functions of NCVET will include – recognition and regulation of awarding bodies, assessment bodies and skill related information providers; approval of qualifications developed by awarding bodies and Sector Skill Councils (SSCs); indirect regulation of vocational training institutes through awarding bodies and assessment agencies; research and information dissemination; and grievance redressal.
  • Jan Shikshan Sansthan(JSS) – The JSS component of schemeof support to voluntary agencies for adult education has been transferred from Ministry of Human Resource Development to Ministry of Skill Development and Entrepreneurship on 2nd July, 2018. At present, 271 Jan ShikshanSansthansarepresent in 27 States and 2 UTs in the country. As on December 2018, 247 JSSs are functional. The Jan ShikshanSansthans are set up under the aegis of either a voluntary organization (as its Parent body) or a University or as an Independent agency under Act 1860 of Societies Registration. JSS is funded through 100% annual grant from the Government of India. The affairs of the Jan ShikshanSansthans are managed by its independent Board of Management constituted with the concurrence of Government of India for a period of three years.
  • Jan Shikshan Sansthans are imparting vocational skill training programmes at the door step of the beneficiaries with a minimum cost and infrastructure. The JSS are not working in isolation, but also conduct convergence programmes with different departments. JSS impart training in various types of trades/courses such as cutting & tailoring, soft toys making, bag making, beauty culture, electrical repairs, food processing, welding, auto repairing, plumbing, zari work etc.The Scheme of Support of Jan ShikshanSansthan (NGOs) for Skill Development under MSDE was approved by the Standing Finance Committee (SFC) in its meeting held on 4thSeptember2018,upto March 2020.

CONVERGENCE WITH OTHER MINISTRIES

  • Skill India for farmers: In order to develop skills and increase productive of the rural youth, Ministry of Skill Development & Entrepreneurship (MSDE) and Ministry of Agriculture & Farmers Welfare (MoA&FW) inked an agreement. Both MSDE and MoA&FW recognize the importance of providing employable skills to the youth, to improve their livelihood. Under the MoU signed, MSDE will identify job roles to attract rural youth towards agriculture sector in order to fulfill their needs and aspirations.  To begin with the Pilot at a few selected KrishiVikasKendras involving aspirational and technologically oriented job roles (Micro irrigation Technician, Green House Operators, Green House Fitter, Aquaculture technicians) under Agriculture / Allied Sector, Food Processing and related sectors can lay a very strong foundation for new Pan India Model. The MoUhas been signed for duration of five years andaims to encourage youth to undergo skill training on various vocations in agriculture for gainful wage or self-employment.
  • Skill India and Ministry of Drinking Water and Sanitation have joinedhands to train 50,000 masons in four states: While starting with the training of a thousand masons from Jhansi and the surrounding areas, more such training sessions are currently underway in other regions, with an approximate target of skilling 50,000 masons by NSDC and their training partners. Depending on the skill levels of the masons, they are undergoing Recognition of Prior Learning (RPL) which is a seven-day training program designed to recognize and certify the informal learning and on the job skills that the candidate may have picked up and giving it equal acceptance as the formal NSQF levels. The masons receiving the skill training are being taught to construct a much smaller and cheaper twin pit system. This method involves the construction of two leach pits, with a ‘Y’ junction, so that one pit can be filled at a time. The practice being to fill one pit, which may take the average family five to eight years, cover it over when nearly full, and to leave it to stand while the second pit is used.
  • Inter-ministerial collaborations – Recognizing that skilling is not the sole mandate of MSDE, but a key requirement of several other ministries to implement their flagship program, MSDE is collaborating with several national missions, projects and ministries.
    • MSDE is providing bridge training to electrical lineman involved with Saubhagya scheme which is initiated by the Ministry of Power
    • Assisting in the upgradation of skills of railway staff under the Swarna Project under Ministry of Railway
    • Contributing to the Swacchh Bharat Mission by skilling quality masons who are key to our move to Open Defecation Free India – by constructing quality toilets speedily
    • Supporting the Urja Ganga Gas Pipeline Project and NamamiGange.
    • Supporting the “Transformation of Aspirational Districts” program of NITI Aayog, which was formally launched by the Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi in January 2018, will cover 117 districts across India. The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship (MSDE) commenced its “Aspirational Skilling Abhiyan 2018-19”.
      • Aspirational Skilling Abhiyanhas been conceived to aid and complement the Transformation of Aspirational Districts program. The campaign will support the skilling initiatives/component of the aspirational districts by addressing district level challenges. Dedicated team of over 150 officers from MSDE, Directorate General of Training (DGT), National Skill Development Agency (NSDA), National Skill Development Corporation (NSDC) are being deputed to work with these districts in three phases. Through this program, MSDE endeavors to facilitate strengthening of governance and institutional infrastructure in the aspirational districts.

Other Developments

  • MSDE also signed an MoU with social media platforms like Facebook and Adobe, to leverage their platform for youth empowerment
  • Operational Framework for Apprenticeship: Ministry of Skill Development & Entrepreneurship have brought about comprehensive reforms in the Apprenticeship Act in 2014 & the Apprenticeship rules in 2015 to make apprenticeship more industry friendly. MSDE launched an Operational Framework for the Apprenticeship Actin 2018 which provides operational guidelines listing out roles & responsibilities of the stakeholders at the National and State level. This also provides detailed information regarding the execution of National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS) which incentivize corporates to engage apprentices across different sectors.

The reforms also saw launch of Guidelines for Training of Trainer (ToT) and Training of Assessors (ToA) for short-term skill development programs to further strengthen the teaching pedagogy in the ecosystem. This was done in partnership with Temasek Foundation and technical support from Singapore Polytechnic. These would enable convergence of multiple stakeholders such as DGT, NSDC, SSCs, Skill universities and private partners for ToT and ToA programs.

The NAPS scheme aims to promote apprenticeship training and incentivize employers who wish to engage apprentices extending them an opportunity to earn while they learn by enrolling into on the job training. The financial benefit to establishments under NAPS includes i) sharing of 25% of the prescribed stipend, subject to a maximum of INR 1,500 per month per apprentice and ii) sharing of cost of basic training with basic training providers; upto INR 7,500 for 3 months.  The apprenticeship scheme engages students from ITIs, Polytechnics, schools, colleges and short-term courses (PMKVY, DDU-GKY, SDI and others). It was earlier restricted to only the manufacturing sector; but the government sees more opportunity for engagement of apprentices in service sector now.

The employers are also given the freedom to build their own curriculum under to conduct the apprenticeship scheme.  These reforms have been brought about in the Apprenticeship Act of 1961 so that both the industry and the candidate can get more benefit and equal opportunities of growth. More than 4.8 Lakh candidates and more than 74,000 establishment have registered under the Act since the launch of NAPS.

  • Skill India Portal: Minister for Skill Development & Entrepreneurship Shri Dharmendra Pradhanannounced the launch of Skill India Portal. This improved skill development management system will provide an end-to-end solution to bring all the stakeholders in the skill ecosystem to a robust unified platform. The Skill India portal aims to bring the entire candidate and training partner database on a single platform. This would be a unified interface which would act as an integrated platform for all skilling initiatives and schemes run by various Central Ministries, state governments, NSDC and Corporates among others. This portal will help in empowering skill training by creating a repository of candidates, their skilling lifecycle, placement etc. and would be a rich data pool for better analytics, which would empower informed decision making for future development programs.
  • MSDE conducted nearly 400 RozgarMelas between April’18 and November’18 covering 24 states and 250 districts. There have been 1.37 lakh registrations and around 65,000 candidates have been shortlisted. So far over 800 employers have participated in RozgarMelas.
  • Agreements and partnerships have been struck with the private sector to boost the Skill India programme. Collaborations with corporates like NASSCOM, SAP, IBM, Adobe helped create curriculum aligned with jobs of the future. The programme will help to facilitate development of skills, including in areas of new-generation technology like artificial intelligence, automation, robotics and block-chain technology
  • Skill Saathi – A Mega Counselling Program – Skill India has also created a platform to provide skill-based career counselling to potential candidates through initiatives like Skill Saathi. Guidance and counselling is an important aspect of developing skillful youth. It is an important part of a pupil’s support system and should be provided at all levels. It helps candidates develop their skills and learning abilities.Initiatives like Skill Saathi also keep in mind the demand side of industry and business by providing the potential workforce with decision-making skills, pre-employment skills, increased worker maturity, reduction in the rate of attrition, increase in the rate of productivity and employment of candidates as per their areas of interest, aptitude and training.
    • Through the counselling model under Skill India, MSDE is making an endeavor to introduce youth to non-traditional education pathways in the technical and vocational streams including:
      • ITI courses on offer – including those aligned to the new age Industrial 4.0 skills of AI, IoT, AR/VR technologies
      • Short term courses – with guidance on how to contact and connect with Training Providers
      • Apprenticeship Opportunities – both in Short-term and Long-term training courses
      • Degree Apprenticeship Opportunities – an earning while learning program recognized by UGC and set to be offered by select Universities
      • Skill Universities
    • The objective is to spread awareness on a large scale about the avenues available for those uninterested in academic routes, while also providing more avenues to those seeking higher education in a formal setup.
  • Special Projects under PMKVY especially focused on tribal populations have been initiated in 2018.Below are few of them:

(i) Bru Project: The project aims for skilling of   BRU TRIBE of Mizoram, who were displaced   and currently living in the Internally Displaced Person (IDP) camps in the districts of North Tripura. Under the project, 556 candidates have been benefited.

(ii) Katkari primitive tribe: Project aims to skill 1020 candidates from the Katkari tribe in Maharashtra.

(iii) Skill Development scheme for LWE districts:Government is taking many initiatives to bring back the Naxalites to the mainstream of our country.We are implementing the scheme “Skill Development in 47 Districts Affected by Left Wing Extremism”, in the 47 districts affected by LWE.The scheme is assisting State Governments to establish 1 new ITI in each of 47 affected Districts. Out of the 47 districts, 39 districts are Aspirational.Apart from that, 2 Skill Development Centers are also being established in each of 34 affected districts.It will help the local youth to lead a decent livelihood by way of acquiring skill in these institutes.

  • In 2018, DGT relaxed the entry qualification to ITIs for surrendered Naxalites, as per policy of Government, under which the beneficiary will undergo one-year pre-ITI Foundation course.
  • The foundation course will enable them to fill the gap of regular academic attainment and enable them to understand the ITI curriculum. On successful completion of the course, they will be admitted to ITI for one- or two-year duration regular trades.
  • These candidates will also be eligible for one year “National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS)” after successful completion of ITI Program.
  • Every beneficiary will be eligible for a monthly stipend of Rs. 6000/- for a maximum period of 36 months under the scheme “Surrender-cum-Rehabilitation Scheme of Left Wing Extremists” being implemented by MHA.

(iv) Common Facility Centre for Filigree Craftsman: Odisha has a rich heritage of art and crafts that has been made popular by the work of local artisans, work that dates back over 1000 years. In an endeavor to further upgrade the skills of these talented artisans, and make them self-reliant, the Skill-cum-Common Facility Centre for Filigree Craftsman at Cuttack was launchedin April 2018.The centre enables further industry level training using/in latest technology. It also provides training on marketing strategies, including ecommerce, so that the artisans can be self-sustained and engage directly with buyers. The Common Facility Centre equipped with the relevant machinery and latest technology will be accessible to practitioners wanting to generate their own livelihood, towards promoting self-employment.The centre carries the aim to train future goldsmiths, while also serve as the cornerstone of revival of Filigree handicraft. The vision of the program is to have an international-level Filigree exhibition-cum-workshop in Cuttack to provide wider opportunities to Filigree Craftsmen living in rural areas.

  • Ministry of Skill Development and Entrepreneurship has partnered with Ministry of Labour and Employment (MoLE) to conduct the following programs:
    1. Support MoLE’s skill development scheme for persons with disabilities which is run through the Vocational Rehabilitation Centers (VRCs)
    2. To address the issue of Child Labour by empowering them through training under Jan SikshanSansthan Scheme and Pradhan MantriKaushal Kendra Scheme. 4 pilot programs are underway across 4 districts
    3. To support the skilling and rehabilitation of bonded labour identified by MoLE under a pilot project in 5 districts
    4. Skilling of building and other construction workers and their family members will be facilitated under PMKVY in all job roles identified by Construction SSC under both the models i.e. Short-Term Training (STT) and Recognition of Prior Learning (RPL) under PMKVY for capacity building and empowerment
    5. Skill training will be imparted for providing alternative employment/livelihood for Beedi workers and their dependents with funding initially by Pradhan MantriKaushalVikasYojana (PMKVY), as for other traineeInternational Collabo International Collaboratons and forms of engagement

Internatiol Collabortions and Platforms of engagement

  • MoC with Government of Japan: A Memorandum of Cooperation (MoC) on Technical Intern Training Program (TITP) was signed between the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship (MSDE) and Government of Japan at Tokyo. The first batch of 17 students has completed pre–departure training at CII’s Chennai facility and have received their Internship Offer Letters form a leading Automotive manufacturer in Japan. They have been trained by native Japanese Trainers, engaged specifically for the programme to ensure high quality training in varied divisions like production, quality department, technical department etc. These interns mostly hail from rural villages of Southern Tamil Nadu. They belong to economically weaker sections of the society with average family income ranging from INR 40,000 – INR 80,000 per annum. As per the Program requirement they come with an experience of 6 months to 1 year. Most of them were engaged in the manufacturing sector where they earned INR 8000 to INR 10000 per month. Under the Program, they are receiving nearly INR 65000 per month, post statutory deductions. The program is giving them a huge financial and professional advantage, which will not only enhance their standard of living but will also benefit their families.
  • India Skills Finals: Team India is all set for 45th World Skills International competition to be held in Kazan in Russia.
    • India Skills 2018, the biggest skills competition of the country, designed to encourage and prepare the youth for the global stage, ended on a grand note in New Delhi in October 2018. More than 400 competitors from 27 states displayed their skills in 46 skills, 7 traditional skills and 4 demo skills, before experts and jury members. More than 15,000 visitors attended the IndiaSkills 2018 competition. A total of 164 winners were awarded medals in their respective skill categories. Of these, 45 won gold medals, while 47 won silver and the bronze medal went to 43 winners. Maharashtra topped the medals tally with 23 medals, followed by Odisha, which had 21 winners. Karnataka and Delhi came third with 16 medals each, while Chandigarh finished in the fifth position with 12 medals. The finalists will represent India at the 45thWorldSkills Competition to be held in 2019.
    • Team India is led by the National Skill Development Corporation (NSDC) under the guidance of the MSDE at the event. 2017 saw one of the most successful year for Team India, which won 1 Silver, 1 Bronze and 9 Medallions for Excellence at the World Skill competition held in Abu Dhabi in 2017. This is the best medal tally that India had since it started participating at these competitions in 2007.
    • Euro Skills 2018: Euro Skills is the European Championship of young professionals, a promotion of latest skill development around Europe. EuroSkills was held at Budapest, Hungary, from 26th to 28th September 2018. It has more than 28 countries participating in the competition out of which India was one of the guest countries, along with other countries like Japan, UAE and Korea.

******************

Year End Review 2018 – Ministry of Heavy Industries & Public Enterprises

Year End Review 2018 
 Ministry of Heavy Industries & Public Enterprises

PM’s 7 Cs for Future of Mobility in India

Three Mantras for CPSEs – Imagination, Incentives and Institution Building

ICAT Certification with High Security Features

Global Mobility Summit

The Prime Minister of India, Narendra Modi,outlined the vision for the future of mobility in India, in the Global Mobility Summit held in New Delhi in September this year. He spelt out 7 Cs:Common, Connected, Convenient, Congestion-free, Charged, Clean and Cutting-edge.

  • Public Transport must be the cornerstone of India’s mobility initiatives
  • It must be integrated with geographies and different modes of transport
  • Mobility should be safe, affordable and accessible to all sections of society
  • It must be a check on the economic and environment costs of congestion
  • Investments are being made across value chains from batteries to smart charging to Electric Vehicle manufacturing
  • Mobility must be powered by clean energy which is India’s most powerful weapon in the fight against climate change
  • It is a sector with immense opportunity for innovation and growth which can help solve problems for public good

FAME – INDIA SCHEME

The National Electric Mobility Mission Plan 2020 was unveiled in 2013 as part of the scheme FAME-India [Faster Adoption and Manufacturing of (Hybrid &) Electric Vehicles in India]. The scheme is being implemented over a period of 6 years till 2020. It will support the hybrid and electric vehicles market development and its manufacturing eco-system to achieve self-sustenance at the end of this period. Government of India is committed to instil confidence in the industry and allow them to plan required investments and create needed capacities. This will also enable the scheme to align with Government’s Make in India initiative. The scheme focuses on four areas:

  • Technology Development
  • Demand Creation
  • Pilot Projects
  • Charging Infrastructure

The Phase-I of the scheme commenced from 1st April, 2015 and was extended till 31st March, 2018.

The second phase of FAME (Faster Adoption and Manufacturing of (Hybrid &) Electric Vehicles) India scheme is now being implemented. It includes an investment over Rs 5,500 crore over a period of five years which will provide subsidies for all types of electric vehicles.

Subsidies will be available to all categories of electric vehicles in order to promote green vehicles and check pollution.

  • The scheme will provide subsidies to battery-operated scooters and motorcycles in a range of Rs 1,800 to Rs 29,000, based on their technology.
  • For three-wheelers, incentives will range from Rs 3,300 to Rs 61,000.
  • The manufacturers claim incentives from the government at the end of each month.

According to the National Automotive Board, under the Department of Heavy Industry Ministry, as of August 24, 2018 around Rs 264 crore worth of incentives were given out and a total of 226,557 vehicles benefited from the scheme.

The scheme is one of the green initiatives of the Government of India, which will be one of the biggest contributors in reducing pollution from road transport sector in the near future. This scheme is aimed at incentivizing all vehicle segments like 2-Wheelers, 3-Wheelers, 4-Wheeler Vehicles, Light Commercial Vehicles and Buses.

During 2017-18, following amendments were made in the FAME-India scheme:

  • The Phase-I of the scheme was further extended for a period of 6 months i.e. upto 30.09.2017 and “Mild Hybrid” technology was excluded from benefits under FAME-India scheme
  • Electric 3W (with maximum speed not exceeding 25 km/hr) has also been included for availing incentive under the scheme
  • L5 category has been included in the retro fitment category
  • Fully Electric Bus has also been included for demand incentive under the scheme

During the financial year 2017-18, an amount of Rs. 175 crore was allocated for this scheme, out of which an amount ofapprox.Rs. 85.49 crore has already been utilized. Through this scheme about 1,54,000 electric & hybrid vehicles have been given direct support by way of demand incentives (total incentive amounting to Rs. 202.72 crore) since its launch on 1st April,2015 and till 30th September, 2017. During financial year 2017-18, from 1st April, 2017, nearly 16,000 vehicles were supported by demand incentive till 30th September, 2017.

Further, during financial year 2017-18, the Department approved the pilot projects of charging infrastructure and project of technological development worth Rs. 17.50 crore. Some of the projects approved are:

  • 200 (150-AC & 50 DC) Charging Stations at Delhi, Jaipur andChandigarh
  • 75-AC Smart Chargers in NCR
  • 60 DC-charging infrastructure
  • pilot project for five electric buses at IGI Airport
  • Design & Development of AC-DC Combined Public Charging Stations

Total No. of Vehicles Sold: 262776 

38096145

 Saved fuel ( In Litres)

52390

Fuel saving per day ( In Litres)

 

129870

CO2 Reduction per day ( In Kg.)

95142481

CO2 Reduction ( In Kg.)

AUTOMOTIVE POLICY

Department of Heavy Industry has finalized the draft Automotive Policy for holistic development of automobile sector in India. The policy proposes to:

  • Adopt a long-term roadmap for emission standards beyond BS-VI and harmonize the same with global standards by 2028
  • Rollout CAFE norms till 2025 and beyond and setup incentives and penalties
  • Adopt a composite criterion based on length and CO2 emissions to classify vehicles for differential taxation purposes
  • Harmonize automotive standards over the next 5 years in line with WP-29
  • Improve the skill development and training eco-system, increase accountability of ASDC and implement a Labour Market Information System
  • Retain tax exemption on different levels of R&D expenditure with strong audit control
  • Scale-up of indigenous R&D with commercially viable innovations
  • Harmonize AIS and BIS standards on safety of critical parts over next 3 years
  • Fast track adoption of Bharat New Vehicle Safety Assessment Programme

The automotive industry is a pillar of Indian economy and a key driver of macro-economic growth and technological advancement:

  • It contributes 7.1% to the total GDP and provides employment to about 32 million people, directly and indirectly
  • Strong domestic demand along with supportive Government policies have led to the Indian automotive industry climbing up the ranks to be one of the global leaders
  • India is the largest manufacturer of two-wheelers, three-wheelers and tractors in the world
  • India is the fifth largest vehicle manufacturer overall

The automotive sector attracted USD 16.5 Billion in foreign direct investment between April 2000 and December 2016.

  • The sector will attract around USD 8-10 billion more in local and foreign investment by 2023
  • The growth of the automotive industry in India since the early 1990’s is a shining example of how industrial prowess supported by progressive policies and national economic growth can yield rewards to all stakeholders
  • The advantage of experience, scale and expertise of Indian automotive companies along with the stimulus of high domestic demand provides the domestic industry with a unique opportunity to achieve global leadership in both manufacturing and engineering, especially in emerging areas
  • The industry is being handheld by the Government to create a clean and sustainable mobility ecosystem
  • Several global and domestic original equipment manufacturers (OEMs) and component manufacturers now operate in the country, offering consumers an ever-expanding range of vehicles with global standards of technology, features and quality.

The Government of India and the Indian automotive industry articulated their objectives for the future of the industry through the Automotive Mission Plan 2016-26 (AMP 2026). The plan envisions that by the year 2026, India will be the third in the world after China and USA in engineering, manufacturing and export of vehicles and auto components.

Government of India has demonstrated its intention to curb vehicular pollution through pivotal initiatives such as Faster Adoption and Manufacturing of (Hybrid &) Electric Vehicles (FAME) scheme, and regulatory measures such as early introduction of Bharat Stage- VI in 2020. Also, fuel consumption standards for Indian vehicles came into force in India in April 2017 for petrol, diesel, liquefied petroleum gas (LPG) and compressed natural gas (CNG) passenger vehicles. These standards are based on a Corporate Average Fuel Efficiency (CAFE) system and targets to bring about around 18% improvement in fuel consumption of passenger vehicles by 2022, compared to 2012.

CENTRAL PUBLIC SECTOR ENTERPRISES (CPSES)

Prime Minister of India, Narendra Modi addressed heads and senior officials of Central Public Sector Enterprises (CPSEs) at the CPSE Conclave-Vision 2022 in New Delhi in April this year. This was the first time in 75 years that a conclave of all CPSEs was held. The Prime Minister said that the conclave will be a new beginning to transform CPSEs into Profit and Social Benefit Generating Enterprises.

Prime Minister outlined three mantras for CPSEs- Incentives, Imagination and Institution building in order to bring about this transformation. He said that the CPSEs are the wealth of the nation and will be an important catalyst to fulfil the vision of New India by 2022.

  • Unique incentives, not necessarily financial, will energize the public enterprises.
  • Imagination will bring about technological changes for which leadership is necessary
  • Institution building will transform the public enterprises from Maharatna into New India Ratna Enterprises.

The Prime Minister gave a formula of 5 Ps- Performance, Process, Persona, Procurement and Preparedness which will prepare the CPSEs to compete with the best companies in the world.Collective efforts of all CPSEs will help India become a 5 trillion-dollar economy in next five years and they will be the third arm of revenue generation for the India’s GDP.

Putting forth five challenges the Prime Minister asked for roadmaps with measurable targets to be prepared within 100 days towards fulfilling the vision of New India by 2022. The five challenges are:

  • How CPSEs will increase their Geo Strategic Reach?
  • How CPSEs will reduce India’s import bill?
  • How CPSEs will work in coordination with each other for innovation and research?
  • How CPSEs will use CSR funds for the 115 aspirational districts, which are to be brought on par with national indices?
  • What new model CPSEs will offer to the development of New India?

CPSEs’ under the Department of Heavy Industry:

  1. Heavy Engineering Corporation Limited
  2. Engineering Projects (India) Limited
  3. Bharat Heavy Electricals Limited

Subsidiaries:

  1. a)    Bharat Heavy Plate and Vessels Limited
  2. b)   BHEL Electrical Machines Limited

Joint Venture:

  1. a)    NTPC BHEL Power Projects (Private) Limited
  2. HMT Limited

Subsidiaries:

  1. a)   HMT (Bearing) Limited
  2. b)   HMT (International) Limited
  3. c)   HMT (Machine Tools) Limited
  4. d)   HMT(Watches) Limited
  5. e)   HMT (Chinar Watches) Limited
  6. Scooters India Limited
  7. Andrew Yule and Company Limited

  Subsidiaries:

  1. a)   Hooghly Printing Company Limited
  2. b)   Yule Electricals Limited
  3. c)   Yule Engineering Limited
  4. Cement Corporation of India Limited
  5. Hindustan Cables Limited
  6. Hindustan Paper Corporation Limited

  Subsidiaries:

  1. a)   Nagaland Pulp and Paper Company Limited
  2. b)   Hindustan Newsprint Limited
  3. c)   Jagdishpur Paper Mills Limited
  4. Hindustan Photo Films Manufacturing Company Limited
  5. Hindustan Salts Limited

  Subsidiary:

  1. a)   Sambhar Salts Limited
  2. Instrumentation Limited

  Subsidiary:

  1. a)   Rajasthan Electronics and Instruments Limited
  2. NEPA Limited
  3. Tyre Corporation of India Limited
  4. Bharat Shari Udyog Nigam Limited; including

  Subsidiary:

  1. a)   Braithwaite, Burn & lessop Construction Limited
  2. Triveni Structurals Limited
  3. Tungabhadra Steel Products Limited
  4. Bharat Pumps and Compressors Limited
  5. Richardson and Cruddas (1972) Limited
  6. Bridge and Roof Company (India) Limited

CPSEs/Subsidiaries of CPSEs under liquidation/winding up/ closure/ transfer to other Departments/Organizations:

  1. Bharat Ophthalmic Glass Limited
  2. Bharat Leather Corporation Limited
  3. Tannery and Footwear Corporation of India Limited
  4. Rehabilitation Industries Corporation
  5. Bharat Yantra Nigam Limited
  6. National Bicycle Corporation of India Limited
  7. National Industrial Development Corporation Limited
  8. Mining and Allied Machinery Corporation Limited
  9. Cycle Corporation of India Limited
  10. Jessop and Company Limited
  11. Lagan Jute Machinery Company Limited
  12. Reyrolle Burn Limited
  13. Weighbird (India) Limited
  14. Bharat Brakes and Valves Limited
  15. Bharat Process and Mechanical Engineers Limited
  16. Mandaya National Paper Mills Limited

Autonomous Bodies:

  1. Fluid Control Research Institute (FCRI)
  2. The Automotive Research Association of India(ARAI)
  3. NATRIP Implementation Society (for the Implementations of National Automotive
    Testing and Research & Development Infrastructure Project)
  4. Central Manufacturing Technology Institute(CMTI)

BHARAT HEAVY ELECTRICALS LIMITED (BHEL)

image00200WY.jpg

BHEL is a leader amongst Indian power plant equipment manufacturers

BHEL is the undisputed leader amongst the Indian power plant equipment manufacturers, a name to reckon with in the Indian industry and India’s industrial ambassador to the world. In its journey of over 55 years, it has gained the status of being one of the strongest pillars of Indian industry. BHEL serves the core sectors of the economy and provides a wide range of solutions to customers in power, transmission, transportation, renewables, water, defence & aerospace, oil & gas, and industry.

With 17 manufacturing plants, 2 repair units, 4 regional offices, 8 service centres, 1 subsidiary, 3 active joint ventures, 15 regional marketing centres, 3 overseas offices and current project execution at more than 150 project sites across India and abroad, BHEL manufactures a wide range of high quality & reliable products adhering to national and international standards for various industries. Till date, BHEL has installed around 11 GW power generating capacity in overseas markets, and an additional 6 GW is under execution.

The Union Cabinet approved the revised guidelines of the Department of Public Enterprises (DPE) on time bound closure of sick and loss making Central Public Sector Enterprises (CPSEs) and disposal of movable and immovable assets. The revised guidelines would reduce delays in implementation of closure plans of sick and loss making CPSEs.

  • The guidelines provide a broad framework for expeditious completion of various processes and procedures for closure of CPSEs by laying down important milestones in the closure process along with timelines, outlining the responsibilities of the concerned Ministries, Departments and CPSEs in the process.
  • The guidelines provide for advance preparatory action to be taken by administrative Ministry, Department and CPSEs, preparation of closure proposal, settlement of statutory and other liabilities of the CPSE under closure and modalities for disposal of movable and immovable assets of such CPSEs in a time bound manner.

The guidelines give first priority for utilization of land of CPSEs under closure for affordable housing as per guidelines of Ministry of Housing and Urban Affairs. The guidelines will apply to all sick and loss making CPSEs, where:

  • Approval or in principle approval for closure has been obtained by administrative Ministry and Department from the CCEA or Cabinet; or
  • the process for obtaining the approval of the competent authority is underway after the administrative Ministry and Department has decided for the closure of the CPSE.

Financial Package for Nepa Limited:

The Cabinet Committee on Economic Affairs announced a financial package of Rs. 469.41 crore for the Revival and Mill Development Plan (RMDP) of Nepa Limited, a public sector newsprint company located in Nepanagar, Madhya Pradesh. This package includes an infusion of Rs. 277 crores as equity in the company for the completion of RMDP which shall enhance production capacity to 1 lakh MT per annum from the present capacity of 83,000 MT per annum, diversify production, improve quality of products and also help resume production at Nepa Ltd. The RMDP is expected to be completed within a year.

A loan of Rs. 101.58 crore has also been approved for the payment of salary and wages. This will reduce the hardship being faced by the employees. A sum of Rs. 90.83 crore was approved for the voluntary retirement scheme of 400 employees. On completion of the RMDP,the strategic disinvestment of Nepa Ltd. at an appropriate time was also approved. The completion of the RMDP will help Nepa Ltd. to boost production and also support employment in the tribal belt of Madhya Pradesh.

INTERNATIONAL CENTRE FOR AUTOMOTIVE TECHNOLOGY

The International Centre for Automotive Technology (ICAT) completed the first BS-VI certification for a heavy duty engine model for M/s Volvo Eicher Commercial Vehicle Limited. The engine has been developed and manufactured indigenously by Volvo Eicher in India. The successful completion of the compliance test of the engine, much ahead of the implementation date of 1 April, 2020, gives sufficient time for product stabilization to make it more robust and cost competitive for the end consumers.

The pro-active approach from the Government of India has made the country leapfrog from the conventional BS-IV to directly adopt BS-VI emission norms as the next level for regulatory framework in India. The BS-VI emission standards integrate substantial changes to existing emission standards ensuring cleaner products to the consumer. Besides the more stringent limits on the gaseous emission components, the particulate matter (PM) limits have also been significantly reduced along with the introduction of particle number (PN) limits.

ICAT is the first of new world class centers established under the National Automotive Testing and R&D Infrastructure Project (NATRiP) with the main objective of carrying out Research & Development besides extending homologation facilities in the field of Automotive Engineering. It has emerged as a comprehensive technical partner of the automotive industry.

ICAT is one of the prime testing agencies recognized by the Government of India as one of the accredited ‘Type Approval and Homologation’ agencies under Central Motor Vehicle Rules (CMVR) and has also been recognized as Scientific and Industrial Research Organization (SIRO) by the Department of Scientific and Industrial Research (DSIR), since Feb 2010, by BIS for Tyre Testing and Safety Glasses and by Central Pollution Control Board (CPCB) for emission and noise testing of generator sets.

image0037QS6.jpg

Heavy Industries Minister, Anant Geete at the International Centre for Automotive Technology (ICAT) at Manesar

National Automotive Testing and R&D Infrastructure Project (NATRIP) was inaugurated by Union Minister of Heavy Industries & Public Enterprise (HI &PE), Anant Geete at the International Centre for Automotive Technology (ICAT) at Manesar in Haryana. ICAT has been rendering services of automotive testing & certification to the industry since 2006.

NATRIP is the largest and most significant initiative in the automotive sector which represents collaboration between the Government of India, a number of State Governments and Indian Automotive Industry to create a state of the art testing, validation and R&D infrastructure in the country.

The augmented facilities have been completed at ICAT Centre-II at Manesar in Haryana.

The newly opened labs have the following facilities:

  • Noise Vibration & Harshness (NVH) Lab
  • Electromagnetic Compatibility (EMC) Lab
  • Passive Safety Lab (PSL)
  • Tyre Test Lab (TTL)

ICAT Certification to prevent use of forged certificates:

International Centre for Automotive Technology (ICAT) launched Certification with high security features in order to prevent use of forged certificates.

This is a first of its kind initiative taken by any automotive certification agency in India for enhancing the security of the CMVR certificates which includes Type Approval Certificates (TAC) and Conformity of Production (COP) Certificates for vehicles, engines and components.

The new ICAT certificate format consists of nine new and unique security features. The unique features in the certificate are:

  • High security paper
  • Printing using the ultraviolet ink
  • Troymark
  • Microprint
  • Pantograph
  • Reverse Pantograph
  • Secure code
  • Print code
  • Digitally printed stamp and seal of ICAT

 While some of the security features are generic in nature same for all the certificates), the other features are specific for each certificate i.e. the contents or the information covered through these features will be specific for that particular certificate. Another distinction is that some of the features are visible only through ultraviolet light. The certificates will be printed using special printers which have been imported by ICAT for this very purpose.

With the new high security features it will become difficult to forge or counterfeit the ICAT certificate.

ICAT is the premier certification agency authorized by Ministry of Road Transport and Highways (MORTH) for providing testing and certification services to the vehicle and component manufacturers situated within India and abroad. In addition to the certification services, ICAT is providing extensive testing services for product development and validation.

e-CHARGING STATIONS

image004S5U3.jpg

Anant Geete inaugurating e-charging infrastructure, in Dwarka, New Delhi

Union Minister of Heavy Industries & Public Enterprises, Anant Geete inaugurated charging stations in UdyogBhawan and Dwarka in New Delhi this year.

Eight charging stations have been installed in the premises of UdyogBhawan for facilitating charging of e-vehicles. Of the eight charging stations, two fast charging stations have been installed by BHEL and six slow charging stations by Energy Efficiency Services Limited (EESL).

In Dwarka, charging infrastructure has been developed by Rajasthan Electronics & Instruments Ltd. (REIL) having 18 charging stations. 400 e-rickshaws can be charged from these stations.

REIL has already set up 45 charging stations in different cities. Department of Heavy Industry funds charging station installed by REIL.

As a part of Swachh Bharat Mission and to continue with the Government of India’s sustained efforts to promote electric mobility in the country, the Department of Heavy Industry has allocated 455 electric buses to selected cities and special category states, through Expression of Interest (EoI) recently. The Department has also approved funding of 130 electric buses to Ahmedabad, Himachal Pradesh and Navi Mumbai.

For reduction in pollution levels and making cities cleaner and environment friendly, the Government is working on FAME-II scheme having focus on mass and shared public transportation based on electric powertrain. The necessity for development of charging infrastructure for smooth roll out of electric mobility in the country is being addressed in the Phase-II of FAME scheme.

image005CA9F.jpg

Lithium – Ion battery powered three wheeler

AUTOMOTIVE RESEARCH ASSOCIATION OF INDIA (ARAI)

ARAI, established in 1966, a leading Automotive R&D organization set-up by the automotive industry is affiliated to Ministry of Heavy Industries and Public Enterprises and is recognized by Department of Scientific and Industrial Research. ARAI is one of the premier Testing and Certification Agencies and plays a vital role in formulating regulations for the Indian automotive industry. An ISO 9001, 14001, 27001 and OHSAS 18001 certified organization, ARAI is accredited by National Accreditation Board for Testing & Calibration Laboratories (NABL).

ARAI is equipped with state-of-the-art facilities in the areas of emission evaluation, noise vibration and harshness, structural dynamics, engine design & development, computer aided engineering, vehicle evaluation, components safety evaluation, material evaluation, automotive electronics and calibration.

Significant Achievements of ARAI during 2018-19

Awards & Recognitions:

  • Recognized by National Traffic Safety and Environment Laboratory (NTSEL), Japan for TRIAS 31 Tests
  • Director ARAI conferred with ‘EMobility+ Leadership Award 2018’
  • Patent granted for ‘Improved Process and Device for Biodiesel Production for Home Appliance’ by the Patent Office, Government of India
  • Outstanding Paper Award (two awards) at FISITA 2018
  • Awarded certification for Information Security Management System (based as per ISO/IEC 27001-2013
image0069J8A image007SMRL.jpg image008Q49C
EMobility+ Leadership Award 2018 Patent granted by The Patent Office, Government of India ISO/IEC 27001-2013 Certification
  • Successful NABL Re-Assessment of Calibration Scopes and NABL Assessment of Mechanical, Electronics, Chemical & Photometry Testing Scopes of ARAI-Kothrud and ARAI-HTC.
  • Successful Completion of Re-Certification Audits as per new versions of ISO9001-2015 / ISO14001-2015 and OHSAS 18001-2007 for ARAI-Kothrud & ARAI-FID and new Certification Audits as per ISO9001-2015 / ISO14001-2015 & OHSAS 18001-2007 of HTC-Chakan.

Significant Projects Executed:

  • Low Floor (LF) and Semi-low Floor (SLF) Bus Prototypes with Aluminium Superstructure meeting AIS:052, bus body code requirements designed and built under DHI funded project.
  • Smart structural system concepts for meeting the energy efficient targets under DHI funded project.
  • Simulator for simulation of vehicle environment and conditions during offline testing and validation of BEVC DC-001 charging stations developed in-house.
  • Design optimization of high capacity DG set enclosure to meet CPCB norms.
  • Die Wear prediction through Forging Process Simulation.
  • Fatigue Testing of Axles as per latest Notification.
  • Electronic Stability Control (ESC) System Evaluation: M1 Category Vehicles using Steering Robot
  • Ergonomics and Comfort Assessment of Off-Road Vehicle Operator Seat.
Aluminium Superstructured SLF Bus Proto Aluminium Superstructured LF Bus Proto
image009LEYR.jpg image010VD0Q.png
Development of Smart Structural Systems Concepts: Weight Optimization for Chassis Frame Development of Smart Structural Systems Concepts: Steering Wheel Vibration Control by

Inertial Mass Actuator (IMA)

image011ZW36.png image012RRUQ.png
Simulator for Interoperability of BEVC DC-001 Chargers Design optimization of high capacity DG Set Enclosure
image013BF9D.jpg image0144EZT.png
Die Wear Prediction Fatigue Testing of Axles
image0158OLN.png image016OMVK
Electronic Stability Control (ESC) System Evaluation Ergonomics and Comfort Assessment of Off-Road Vehicle Operator Seat
image017UZSQ.jpg image018HNLD.jpg

Significant Facilities Added:

E-Motor Test System for 2W EV TGTC Lab at HTC
image0192W2Y.png image020WCPU.jpg
EV & EVSE Environment Simulator for Charger Testing Chassis Dynamometer with

Mass Emission Measurement

image0218HH8 image022VIYP

*****************

वर्ष 2018 के दौरान आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की उपलब्धियां

 

             वर्षांत समीक्षा-2018 - आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय
12 शहरों (एचआरआईडीएवाई) के लिए कुल 422.61 करोड़ रुपये की लागत के सभी 70 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, 310.43 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई

2018 में कुल 140.14 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाएं पूरी हुई

शहरी पुनर्जागरणः भारतीय शहरों का कायाकल्प और परिवर्तन- 6,85,758 करोड़ रुपये की लागत से लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास जारी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने विश्व की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में एक-शहरी पुनर्जागरण के लिए भारतीय शहरों का कायाकल्प और परिवर्तन- की शुरूआत की है। इसके लिए कई पहलों की शुरूआत की गई है और 6,85,758 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों को नागरिक अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। परिवर्तन का यह कार्य, शहरी क्षेत्रों में शहरी कायाकल्प परियोजनाओं के माध्यम से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 12 नगरों के लिए हृदय (एचआरआईडीएवाई)  योजनाओं के कार्यान्वयन को मंजूरी दी गई है।

राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और संवर्धन योजना (हृदय)

21 जनवरी, 2015 को शुभारंभ की गई राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और संवर्धन योजना (हृदय) को 12 नगरों में लागू किया गया है। ये 12 नगर हैं- अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारिका, गया, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलनकन्नी और वारंगल।

2018 में 140.14 करोड़ रुपये की लागत से अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारिका, पुरी और वाराणसी नगरों में 20 परियोजनाएं पूरी की गई। 2018 में पूरी की गई कुछ प्रमुख परियोजनाएं निम्न हैं-

·         हृदय नगरों में तीर्थ यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वाराणसी, अजमेर, अमृतसर और अमरावती शहरों के विभिन्न विरासत स्थलों से संबंधित 59 सड़कों का उन्नयन किया गया। अमृतसर (गोलबाग), अजमेर (सुभाष उद्यान) और पूरी (बांकी मुहाना) शहरों के सार्वजनिक पार्कों व उद्यानों के कायाकल्प का कार्य पूरा किया गया।

·         शहरों में स्थानीय विरासत को पुनर्जीवित करने और पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण केन्द्रों के निर्माण के लिए पुष्कर, अजमेर और वाराणसी शहरों में विरासत पथ से संबंधित तीन विकास परियोजनाओं को पूरा किया गया। विरासत पथ के माध्यम से प्रमुख स्मारकों को जोड़ा गया। वर्तमान विरासत भवनों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अमृतसर में रामबाग गेट और वाराणसी में टाउन हॉल से जुड़ी दो परियोजनाओं को पूरा किया गया। एक म्यूजियम के रूप में रामबाग गेट और एक सांस्कृतिक केन्द्र के तौर पर टाउन हॉल का उपयोग हो रहा है।

·         विरासत शहरों में कई जलाशयों में पानी नहीं है और इनका इस्तेमाल कचरा संग्रह स्थल के रूप में किया जा रहा है। हृदय (एचआरआईडीएवाई) परियोजना के अंतर्गत कुछ विरासत जलाशयों को पुनर्जीवित करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। अना सागर झील से जुड़ी परियोजना को पूरा कर लिया गया है। प्रत्येक विरासत शहर में जागरूकता बढ़ाने और विकास के लिए सरकार के प्रयासों की जानकारी देने के लिए आईईसी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

ग्राफ में हृदय परियोजनाओं की स्थिति

https://i1.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image001FWSN.png

https://i0.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image002SEVH.png

इन परियोजनाओं से अवसंरचना का निर्माण होगा और शहर के लोगों तथा पर्यटकों के लिए शहर के विरासत चरित्र से संबंधित अनुभव बेहतर होगा। परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा। इसलिए जनभागीदारी से इन परिसंपत्तियों को लम्बी अवधि तक संचालित किया जा सकेगा। यह लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक भी सिद्ध होगा। इसके अलावा अवसंरचना विकास के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों के बेहतर परिचालन व मरम्मत, परिसंपत्तियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक लाभ प्राप्ति के लिए आवश्यक है।

कुछ सफल परियोजनाएं

·         रामबाग स्कूल का पुनर्निर्माणः रामबाग गेट, म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस और म्यूनिसिपल स्कूलः पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह के समय से ही अमृतसर शहर का रामबाग गेट एकमात्र ऐतिहासिक गेट है जो अभी तक विद्यमान है।

https://i1.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122601.jpg

किले के अंदर एक भवन में ब्रिटिश जमाने का एक 100 साल पुराना प्रिंटिंग प्रेस और एक स्कूल है। परियोजना के अंतर्गत पूरे भवन की संरचना के संरक्षण का कार्य पूरा किया गया। संरक्षण कार्य का उद्देश्य था- भवन के उपयोगकर्ताओं पर भवन की सांस्कृतिक विशेषताओं का प्रभाव पड़े। इस प्रकार भवन के महत्व को स्थानीय समुदाय से जोड़ा गया।

प्रारंभ में दो कमरों में पांच कक्षाएं चल रही थी। परियोजना के तहत भवन में उपलब्ध जगह को पांच कक्षाओं के लिए सुव्यवस्थित किया गया तथा बरामदे को बच्चों की अन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराया गया। शौचालयों तथा रसोईघर का उन्नयन किया गया। शिक्षकों के लिए भी एक कमरा उपलब्ध कराया गया। खुले क्षेत्र में बच्चों के खेलने के लिए जगह बनाई गई।

https://i0.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122601.png

रामबाग गेट को लोगों के म्यूजियम (पीपल्स म्यूजियम) के रूप में विकसित किया गया। स्थानीय समुदाय इसे लोक विरसा कह कर बुलाते है। स्थानीय समुदाय के लिए यह सांस्कृतिक स्थल है और यह अमृतसर शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।

https://i0.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122603.jpg

प्रिंटिंग प्रेस के उपयोग को बनाए रखने के लिए म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस की भवन संरचना तथा मशीनों को बेहतर बनाया गया। उल्लेखनीय है कि अमृतसर शहर के धनी राम चात्रिक ने प्रिंटिंग प्रेस के टाईप सेट को गुरुमुखी भाषा में भी तैयार किया। वे एक पंजाबी कवि और मुद्रण विशेषज्ञ थे। म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस का पुनर्निर्माण उनके योगदान के प्रति श्रद्धांजलि है।

·         विरासत केन्द्र के रूप में टाउन हॉल का संरक्षण और विकासः वाराणसी के मैदागिन स्थित टाउन हॉल को विजयनगर के महाराजा ने 1870 में बनवाया था। टाउन हॉल का निर्माण ड्यूक ऑफ ईडिनबर्ग के वाराणसी आगमन के उपलक्ष्य में किया गया था। परियोजना के अंतर्गत विरासत भवन का पुनर्निर्माण किया गया और इसे शहरवासियों तथा पर्यटकों द्वारा एक सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में उपयोग के लिए विकसित किया गया। टाउन हॉल भवन में रोशनी की व्यवस्था की गई, दरवाजों और खिड़कियों का मरम्मत किया गया, दीवारों की मरम्मत की गई और उनपर रंग-रोगन चढ़ाया गया, मंच निर्माण के लिए ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल किया गया, ध्वनि यंत्रों को लगाया गया और वातानुकूलन की व्यवस्था की गई। यह परियोजना अगस्त, 2018 में पूरी हुई। तब से इस भवन में कई सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया है जैसे हृदय आर्ट कैम्प, योग कार्यक्रम आदि।

o   https://i0.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122604.jpg

इस परियोजना के पूरे होने से टाउन हॉल के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित किया गया है और वाराणसी के लोगों को सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक अतिरिक्त स्थल प्राप्त हुआ है।

https://i0.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122605.jpg

 

·         अजमेर में सुभाष उद्यान का विकासः सुभाष उद्यान का निर्माण उस स्थान पर हुआ था जहां जहांगीर ने महल बनवाएं थे। समय के साथ ये महल विलुप्त हो गए। लोगों के घूमने-फिरने व आनंद उठाने के लिए इस पार्क में सुविधाएं विकसित की गई। जैसे- जॉगिंग ट्रैक, साईकिल ट्रैक, नौका विहार, कैफे आदि। यह परियोजना सितंबर, 2018 में पूरी हुई। स्थानीय समुदाय इस उद्यान को सामाजिक गतिविधियों के लिए भी उपयोग करते हैं।

https://i2.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122606.jpg

 

·         बांकी मुहाना स्थित अपशिष्ट जल परिशोधन संयंत्र द्वारा परिशोधित जल के उपयोग से प्राकृतिक उद्यान का विकासः भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना करने लाखों तीर्थ यात्री ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर पहुंचते है। नवंबर महीने में वार्षिक समुद्र तट (बीच) उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव में भारतीय और विदेशी पर्यटक भाग लेते है।

https://i0.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122607.jpg https://i1.wp.com/pibphoto.nic.in/documents/rlink/2018/dec/i2018122608.jpg

परंतु समुद्र तट का विकास मात्र कुछ ही स्थलों तक सीमित है। इस कारण इन स्थलों पर भारी भीड़ इकट्ठा होती है। वैकल्पिक पर्यटन स्थल का विकास इस परियोजना का लक्ष्य था।

इस परियोजना के अंतर्गत निम्न कार्य हुए- दीवारों का निर्माण, प्राकृतिक दृश्यों की व्यवस्था, उद्यान के लिए मार्ग निर्माण, एम्फीथिएटर का निर्माण, लाईट व झील का निर्माण, समुद्री जल प्रतिरोधक पौधारोपण, पेयजल की व्यवस्था व शौचालय का निर्माण आदि। यह परियोजना सितंबर, 2018 में पूरी हुई। इस परियोजना से कुछ स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ को कम करने में मदद मिली, समुद्र तट पर हरित प्रदेश विकसित किया गया और इस प्रकार क्षेत्र का सम्पूर्ण विकास हुआ।

 

·         10 हृदय (एचआरआईडीएवाई) सड़कों का विषयवस्तु (थीम) के आधार पर विकासः

 

https://i0.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image015SOR9.jpghttps://i2.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image006OZDK.jpghttps://i0.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image008J0VR.jpghttps://i0.wp.com/164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image007A68G.jpg

 

                                                                     ****

वर्ष 2018 के दौरान परमाणु ऊर्जा विभाग की उपलब्धियां

                 वर्षांत समीक्षा 2018 - परमाणु ऊर्जा विभाग

वर्ष 2018 के दौरान परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने ऊर्जा सुरक्षा और समाज के लाभ के लिए विभिन्‍न पहल किए और इस प्रकार राष्ट्र निर्माण में योगदान किया।

– कैगा जेनेटिंग स्‍टेशन (केजीएस) की यूनिट-1 ने 10 दिसंबर 2018 को 941 दिनों का लगातार परिचालन दर्ज किया और इसके साथ ही इस इकाई ने ब्रिटेन की हेशैमहेशैम-2 यूनिट-8 (610 मेगावॉट एजीआर) के 940 दिनों के लगातार परिचालन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पता चलता है कि पीएचडब्‍ल्‍यूआर की परमाणु बिजली उत्‍पादन प्रौद्योगिकी में राष्‍ट्र की क्षमता अब पूरी तरह प्रौढ़ हो चुकी है। यह डिजाइन, निर्माण, सुरक्षा, गुणवत्‍ता और परिचालन एवं रखरखाव में एनपीसीआईएल की उत्‍कृष्‍टता का प्रमाण है।

– गुजरात के काकरापार और राजस्थान में स्‍थापित होने वाले 700 मेगावॉट क्षमता के प्रेशराइज्‍ड हैवी वाटर रिएक्टरों के निर्माण की अब अच्‍छी प्रगति है। एक रिएक्‍टर 2018 के अंत तक क्रिटिकल हो सकता है और उसके बाद हर साल एक रिएक्टर क्रिटिकल होगा।

– गुजरात के काकरापार परमाणु बिजली संयंत्र यूनिट-2 में नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण कार्यों जैसे एन मैसी कूलैंट चैनल रीप्‍लेसमेंट (ईएमसीसीआर) और एन मैसी फीडर रीप्‍लेसमेंट (ईएमएफआर) एवं अन्‍य सुरक्षा उन्‍नयन के पूरा होने के बाद परिचालन निर्धारित समय से साढ़े तीन महीने पहले सितंबर 2018 में सुचारू कर दिया गया।

– मार्च 2018 में फास्‍ट ब्रीडर टेस्‍ट रिएक्‍टर (एफबीटीआर) का परिचालन 30 मेगावॉट क्षमता के साथ शुरू किया गया जो उसके इतिहास का एक प्रमुख पड़ाव है। इसके टर्बो जेनेरेटर को ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज्‍ड किया गया है जो 6.1 मेगावॉट बिजली की आपूर्ति करता है।

– एपीएसएआरए(यू) एक नवीनीकृत स्‍वीमिंग पूल टाइप रिएक्‍टर है जिसका परिचालन सितंबर 2018 में ट्रॉम्‍बे में शुरू हो गया। इस रिएक्‍टर को विभिन्‍न तरह के आइसोटोप के उत्‍पादन के लिए डिजाइन किया गया है और यह परमाणु भौतिकविदों, पदार्थ वैज्ञानिकों एवं रिएक्‍टर डिजाइनरों को अत्‍याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराता है। यह प्रौद्योगिकी परमाणु क्षेत्र के नवागंतुकों को साझा की जाती है।

– साइक्‍लोन-30 भारत का सबसे बड़ा चिकित्‍सा साइक्‍लोट्रन है जो 30 एमईवी बीम डिलिवर करता है। यह साइक्‍लोट्रन पूरे पूर्वी भारत की रेडियोआइसोटोप की जरूरतों को पूरा करने में समर्थ है। साथ ही यह पूरे देश के लिए प्‍लैडियम 103 और जरमैनियम 68 की जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम है। इस संयंत्र में पदार्थ विज्ञान एवं परमाणु भौतिकी में अनुसंधान के लिए समर्पित बीम लाइन भी मौजूद है।

– कैंसर के निदान एवं उपचार के लिए 21 रेडियोफार्मास्‍युटिकल्‍स के साथ सस्‍ती एवं प्रभावी दवाओं का विकास और दो रेडियोन्‍यूक्‍लाइड जेनेरेटर विकसित किए गए हैं।

हमारे अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग को बेहतर बनाने की रफ्तार को बरकरार रखते हुए कुछ समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए:

– न्‍यूट्रिनो भौतिकी के क्षेत्र में डीएई ने अमेरिका के फर्मिलैब के साथ अंतर- सरकारी समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। अप्रैल 2018 में अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ एनर्जी के भारत दौरे के दौरान इन समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए।

– ईपीआर प्रौद्योगिकी के छह परमाणु रिएक्‍टर स्‍थापित करने के लिए मार्च 2018 में भारत के एनपीसीआईएल और फ्रांस के ईडीएफ के बीच इंडस्ट्रियल वे फॉरवार्ड एग्रीमेंट पर हस्‍ताक्षर किए गए।

– फरवरी 2018 में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा के डिपार्टमेंट ऑफ नैचुरल रिसोर्सेज के बीच परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और नवाचार पर एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए।

– मार्च 2018 में वियतनाम के वीनाटोम के साथ प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए गए।

                                                                                *******

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: