i201762016  *बी.के सुशांत

आपाधापी भरे इस युग में जन-सामान्‍य बहुत कुछ हासिल करने की चाह में मानसिक अशांति और शारीरिक व्‍याधियों को आमंत्रण दे रहा है। लेकिन विकास की प्रक्रिया में साझीदार होना वक्‍त  की आवश्‍यकता है पर अंधाधुंध दौड़ना शरीर और मन को देने वाली यंत्रणा है। 21 जून को विश्‍व अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जन-मानस में योग के प्रति जो सकारात्‍मक  भावनाएं उत्‍पन्‍न हो रही है वह वास्‍तव में एक सुखद अनुभव है। भारत भूमि में वर्षों से योग प्रचालित रहा है और आज विश्‍व भी इसे मान्‍यता प्रदान कर रहा है। राजयोग एक ऐसी मानसिक अवस्‍था है जिसे शांत चित्‍त से कोई भी कर सकता है।

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राजयोग अन्तर जगत की ओर एक यात्रा है। यह स्वयं को जानने या यूँ कहें कि पुन: पहचानने की यात्रा है। राजयोग अर्थात्अपनी भागदौड़ भरी जिन्दगी से थोड़ा समय निकालकर शान्ति से बैठकर आत्म निरीक्षण करना। इस तरह के समय निकालने सेहम अपने चेतना के मर्म की ओर लौट आते हैं। इस आधुनिक दुनिया में, हम अपनी जिन्दगी से इतने दूर निकल आये हैं कि हमअपनी सच्ची मन की शान्ति और शक्ति को भूल गये हैं। फिर जब हमारी जड़े कमजोर होने लगती हैं तो हम इधर-उधर के आकर्षणोंमें फँसने लग जाते हैं और यही से हम तनाव महसूस करने लग जाते हैं। आहिस्ते-आहिस्ते ये तनाव हमारी मानसिक, भावनात्मकऔर शारीरिक स्वास्थ्य को असन्तुलित कर हमें बीमारियों में भी जकड़ सकता है।

       राजयोग एक ऐसा योग है जिसे हर कोई कर सकता  हैं। इसे कहीं भी और किसी भी समय किया जा सकता है। राज योग कोआँखे खोलकर किया जाता है इसलिए ये अभ्यास सरल और आसान है।   योग एक ऐसी स्‍थिति है जिसमे हम अपनी रोजमर्रा कीचिन्ताओ से परे जाते है ओर हम अपने आध्यात्मिक सशक्तिकरण का आरंभ करते है। आध्यात्मिक जागृति हमें व्यर्थ औरनकारात्मक भावों से दूर कर अच्छे और सकारात्मक विचार चुनने की शक्ति देता है।  हम परिस्थितियों का जवाब जल्दबाज़ी मे देनेके बजाए सोच समझ के करेंगे ।  हम समरसता में जीने लगते हैं । बेहतर, खुशनुम: और मज़बूत रिश्ते बना ;अपने जीवन मेसकारात्मक परिवर्तन कर पाते हैं।

 योगाभ्यास कैसे किया जाये?

       राजयोग करना वास्तव मे बहुत सरल है, इसलिए इस योग को दूसरे शब्दों में ‘सहज राजयोग’ भी कहा जाता है। परन्तुकभी कभार शुरुआत मे इसकी थोड़ी सी जानकारी की जरूरत पड़ती है। इस अभ्यास के लिए नीचए 5 सरल कदम बताए गये हैं।अभीयास करते करते बहुत जलद ही आपको एन 5 क़दमो की भी आवश्‍यकता नहीं रहेगी – केवल एक है विचार से आप एक शान्तस्थिति में पहुंच जायेंगे।

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  • पहला कदम – विश्रान्ति

  विश्रान्ति अर्थात्अपने तनाव और उलझनों को परे रखते हुए अपने मन और शरीर को शान्त और स्थिर करना

  • दूसरा चरण – एकाग्रता

 विश्रांत होने के बाद वर्त्तमान पे अपना ध्यान केन्द्रित करना।

  • तीसरा चरण – मनन करना

स्वयं की आन्तरिक दुनिया और अपने मूल्यों की गहराई में जाना…

  • चौथा चरण – अनुभूति

 जब मेरी समझ और मेरे अहसासो का मेल होता हैं तो और ही गहरी और सार्थक वास्तविकता की अनुभूति होती है

  • पांचवा चरण – योगाभ्यास

 एक ही संकल्प में एकाग्र रहके अपने मूल अस्तित्व को याद करते हुए सुस्वस्थ स्थिति को पुन: जागृत करना।

राजयोग के बारे में और जानिए ये क्या है? इसे क्यों, कैसे, कहाँ और कब किया जाये और किस प्रकार के लोग इसका अभ्यास करसकते हैं।

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योगाभ्यास कहाँ कर सकते है ?

      जीवन पहले से ही विविधताओं से भरा हुआ है, बहुत सारी गतिविधियाँ और जिम्मेदारियाँ होती हैं। ऐसे में हम राजयोगअभ्यास के लिए समय कैसे निकाल सकते हैं? यही तो राजयोग की सुन्दरता है कि इसे कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है।

घर में

      राजयोग अभ्यास के लिए खास रूम अथवा जगह की आवश्यकता नहीं है। कोई भी एकान्त और शान्त स्थान याआरामदायक कुर्सी भी चल सकती है। अपनी आन्तरिक गहराई को समझने के लिए लगातार और नियमित समय निश्चित करें।कुछ ही समय में आपको ऐसी जगह मिलेगी जिसकी तरफ आप आकर्षित होने लगेंगे जहाँ पर आपने अपनी शान्ति की स्थिति सेऔर आत्म चिन्तन के अभ्यास से शान्ति का वातावरण बनाया होगा। ऐसी नियुक्त जगह पर आप जब ओर जितनी बार बी जानाचाहे तो जा सकते है ।

आपके कार्य स्थल पर

      जहां भी आप कामकाज करते है, यदि आप थोड़ा सा असामान्य/ रचनात्म‍क तरीके से सोचेंगे तो ज़रूर आप को अपना  मैडिटेशन कहा और कैसे करना है, उस के लिए कोई अच्छा सुझाव निकलेगा।

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