i201761804  * गुरप्रीत सिंह                                                          

योग समस्त मनुष्य जाति की एक पुरातन विरासत है। मुनष्य समाज कोई पांच हजार साल से योगाभ्यास करता रहा है। योग के रोग निवारक और उपचारात्मक दोनों फायदे हैं और यह मनुष्य के शरीर और दिमाग दोनों को लाभ पहुंचाता है। वैश्विक स्तर पर भी माना गया है कि बिना किसी नकारात्मक प्रभाव, तनाव या शरीर में किसी तरह केअसंतुलन लाए बगैर योग का सम्यक लाभ लिया जा सकता है।

मैं अपने इस आलेख में, खेल के क्षेत्र में योग से होने वाले तरह-तरह के फायदे पर चर्चा करूंगा। यह भी बताऊंगा कि योग के जरिये किस तरह खिलाड़ियों के प्रदर्शन को वर्तमान से उसके उच्च स्तर पर ले जाया जा सकता है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, चाहे कोई भी खेल हो, उसमें जबर्दस्त ऊर्जा, खेल भावना, एकाग्रता और कड़ी प्रतिबद्धता की जरूरत होती है। इसलिए प्राय: यह माना जाता है कि आक्रामकता खेल में जीत के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक व्यावसायिक विज्ञापन की ख्यात टैग लाइन है, ‘खाओ नींद और पीओ क्रिकेट’ । आशय यह कि हमेशा अपने लक्ष्य की धुन में रहो। लेकिन यहां सवाल है कि क्या इस तरह के भयानक शारीरिक दबाव को लगातार झेला सकता हैऔर क्या यह जीतने के साथ खिलाड़ी को लम्बे समय तक खेलने लायक रखता है? योग के पास इन सब संदेहों और सवालों का समुचित उत्तर है। Yoga1

एक स्वस्थ शरीर और शांत दिमाग जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता का पथ प्रशस्त करता है। इसकी महत्ता को समझ-बूझ कर ही फुटबॉल, रग्बी, गोल्फ और किक्रेट जैसे खेलों के कई अंतरराष्ट्रीय क्लब ने भारत की प्राचीनतम योग पद्धति का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। योग अन्यान्य प्रविधियों से भिन्न एक अत्यंत विशिष्ट पद्धति है, जो किसी तरह का दाब या तनाव दिये बगैर अभ्यास करने वालों को ऊर्जा से लबरेज कर देती है। तरह-तरह के आसनों (मुद्राओं) का सही तरीके से एक निश्चित अवधि तक अभ्यास किया जाए तो शरीर के भिन्न अंगों को बेहतर लचीलापन लाता है और उसमें ताकत भरता है। दरअसल, योग की अधिकतर मुद्राएं गहरी सांस लेने, उसका स्तंभन (रोकने) करने और मांसपेशियों के संकुचन-फैलाव के जरिये शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन भेजने का काम करती हैं। जब कोई खिलाड़ी हजारों दर्शकों की मौजूदगी में खेल रहा होता है या अपने देश के मान-स्वाभिमान के लिए प्रदर्शन कर रहा होता है और लाखों लोगों की अपेक्षाएं उसको बिंधती हैं तो इनसे उसका दिमाग पूरी तरह तनावग्रस्त हो जाता है। ऐसे वक्त किसी भी तरह के परामर्श या सलाह से उसकी चिंता या तनाव दूर नहीं किया जा सकता। लेकिन कुछ खास तरहके योगासन और प्राणायाम के जरिये खिलाड़ी के शरीर में तनाव की बनी पुरानी पद्धतियों को दूर कर सकते हैं, उसके दिमाग को आराम दिला सकते हैं, खेल पर उसको फोकस कर और उसकी एकाग्रता को बढ़ा सकते हैं।

अब बहुत सारे खेल हैं, जो खिलाड़ी में बहुत ताकत की अपेक्षा करते हैं। यही वजह है कि खिलाड़ी अपनी ताकत बढ़ाने और गठीली मांसपेशियों के लिए अनेक तरह के जतन करते हैं, लेकिन इनसे उनका लचीलापन कम हो जाता है। अगर नियमित रूप से योगासन और शरीर के अंगों व मांसपेशियों को मजबूत करने वाले अभ्यासों के साथ-साथ खिलाड़ी काअपना वजन निर्धारित रखने के प्रशिक्षण को जारी रखा जाए तो खेल के दौरान लगने वाली चोटों से बचा जा सकता है। योग के जरिये खिलाड़ी न केवल खेल लायक उचित लचीलापन को पाएगा, बल्कि अपने संतुलन को भी बढ़ा लेगा। इस तरह खिलाड़ी चोट लगने से बेपरवाह होकर अपने शरीर का उपयोग खेल में कई तरीके से कर सकता है।

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ऐसे कुछ निर्धारित आसन हैं, जिनका अगर सही-सही तरीके से लगातार अभ्यास किया जाए तो ये ताकत बढ़ाने और शारीरिक दुबलापन दूर कर समस्त मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। कुछ खास योगासन अविकसित मांसपेशियों के समूहों, जो व्यक्तिगत स्पोटर्स में काम नहीं आते, के रख-रखाव में भी मददगार होते हैं। एक क्रिकेटर के रूप में अपने निजी अनुभवों के आधार पर कह सकता हूं कि क्रिकेट में शरीर की सभी मांसपेशियों का उपयोग नहीं होता है। क्रिकेट में पीछे की मांसपेशियां सबसे अहम होती है और योग के जरिये रीढ़ को खूब लचीला बनाया जा सकता है। संभावित चोटों के विरुद्ध शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है।

 मुझे एक बार एक तैराक की समस्या को जानने का मौका मिला था, जिसका शरीर लचीला होने के बावजूद संतुलन बनाये रखने में विफल था। नियमित योगाभ्यास से उसे बेहतर समन्वय हासिल करने में मदद मिली और चामत्कारिक रूप से उसमें अपेक्षित संतुलन भी आ गया। अगर आपके पास बेहतर संतुलन और समन्वयन है तो इससे आपको अपने शरीर पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। तो खिलाड़ी में यह संतुलन हरेक खेल में जरूरी है-चाहे वह तैराकी हो, गोल्फ की स्विंग हो, क्रिकेट का शॉट या फुटबॉल का दांव। इन खिलाड़ियों में लचीलापन की समस्याएं रहती ही हैं। योग शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों के लचीलापन को बढ़ा कर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बना देता है। यहां मैं फिर तैराक का उदाहरण दूंगा। एक लचीले शरीर वाला तैराक पानी को काटने में सक्षम होगा, इसके नतीजतन वह कम श्रम में ही अपने प्रतिस्पर्धी से आगे बढ़ने में कामयाब हो जाएगा।

जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए पहली और सर्वाधिक जरूरत होती है-आपका शांत दिमाग होना। मैंने 12 साल की अवस्था में ही क्रिकेट खेलना प्रारम्भ कर दिया था, जिसने मुझे अच्छे प्रदर्शन के दबाव में ला दिया था। चूंकि तब भी प्रतिस्पर्धा बहुत थी और आपकी जगह लेने के लिए प्रतीक्षित लोगों की कतार लम्बी थी। तब एक और चीज ने परेशान करना शुरू किया-पराजित होने का डर। सबसे तुर्रा यह कि जब कभी मैं चोटिल होता तो तनाव के मारे मेरा जल्दी ठीक होना ज्यादा मुहाल हो जाता। इसका दुष्परिमाण यह हुआ कि मैदान में मेरा प्रदर्शन प्रभावित होने लगा।मन-मस्तिष्क पर इस कदर तनाव रहता कि वह खेल के मैदान और उसके बाहर भी अपना असर दिखाने लगा। बड़े खेल के आयोजनों की पहले मैं रतजगा रहने लगा। मेरे खेल से अवगत मेरे कोच मुझे धैर्य बंधाते, लेकिन इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार मेरे कोच को लगा कि मुझसे योगाभ्यास कराने का यह सही वक्त है। इसके लिए उन्होंने  एक प्रशिक्षित योगाचार्य से खेल के बाद हफ्ते में तीन दिन शाम को योगाभ्यास के प्रशिक्षण की व्यवस्था की। योगाचार्य जी मुझे आराम देने वाला कुछ आसन कराते थे और ध्यान भी कराते थे। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे कुछ और उपयोगी आसनों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि सुबह में प्राणायाम करना लाभप्रद है। जैसे-जैसे मेरा अभ्यास गहरा होता गया, मुझे अच्छा लगने लगा। मैंने महसूस किया कि मेरे नसें शांत हो गई हैं और जो चीजें पहले मुझे तंग करती थीं, अब वह तुच्छ लगने लगी हैं। अनजाने में ही, मैं मैच के पहले के उस तनाव से छुटकारा पा गया, जो रातों की मेरी नींद उड़ाये रहता था। मुझे मीठी नींद आने लगी क्योंकि जगने पर मुझे हल्का महसूस होता और यह भी किमैं किसी तरह की चुनौतियों से भिड़ने के लिए बिल्कुल तैयार हूं।

इन बदलावों को देखकर मैंने योगाचार्य से जानने लिए अधीर हो उठा कि आखिर यह चमत्कार हुआ कैसे! उन्होंने समझाया कि ध्यान और प्राणायाम से मुझे अपनी चिंताओं को दूर कर रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद मिली तो दूसरी तरफ मेरी प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई। एक माह के नियमित योगाभ्यास के बाद मेरा शरीर खूबलचीला, सुनम्य और स्वस्थ हो गया। मैंने खेल के मैदान में अपना बेहतर प्रदर्शन देने लगा और कालक्रम मेंआत्मविासी होता गया। आज भी मैं योगाभ्यास करता हूं और सभी खेलों के खिलाड़ियों को योग करने की कड़ी सलाह देता हूं।

अंत में, मैं आप सभी से यही कहना चाहूंगा कि किसी भी खेल में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए आपको एक सुनम्यशरीर, एकाग्रता और उन्मुक्त दिमाग की जरूरत है। यह सब योग के जरिये हासिल किया जा सकता है। रोजाना योगाभ्यास न केवल किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन को बढ़ा सकता है, बल्कि यह मानसिक व शारीरिक दोनों लिहाज से उसे एक उम्दा और मजबूत मनुष्य बना सकता है।

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             (लेखक पूर्व रणजी खिलाड़ी हैं और लम्बे समय से टीवी पर क्रिकेट-कमंटेटर रहे हैं।)

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