*जी.श्रीनिवास i20175802

सेवा-केन्द्रित अर्थव्यवस्था की रुपरेखा को नई आकृति प्रदान करने के लिए तैयार युवाओं की बड़ी आबादी के साथ भारत आज अपने जनसांख्यिकीय लाभांशों का आनंद उठाने की स्थिति में है। बिना किसी रुकावट के मानव कारक प्रतिभा सुनिश्चित करने के लिए एक आधुनिक, जीवंत और प्रतिस्पर्धी कार्यबल पूर्व शर्त है, जो विकास की गति को स्थिर बनाए रखने के साथ-साथ उसे आगे बढ़ा सकता है। मोदी सरकार ने वर्ष 2014 के आम चुनावों के बाद जब कार्यभार संभाला, तो सरकार ने कौशल विकास के महत्व एवं प्रासंगिकता को समझते हुए इस क्षेत्र को गति देने और फास्ट ट्रैक पर लाने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय नाम से एक अलग मंत्रालय की स्थापना की।

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राष्ट्रीय कौशल विकास नीति 2009 के एक भाग के रूप में विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने से प्राप्त अनुभव के आधार पर कौशल एवं उद्यमिता परिस्थितितंत्र के बदलाव की पृष्ठभूमि में सरकार ने कौशल विकास एवं उद्यमिता के लिए जुलाई 2015 में नई कौशल विकास नीति की शुरुआत की। इस नीति का मुख्य उद्देश्य आजीवन सीखने की प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति को उसकी क्षमताओं का एहसास कराने में सक्षम बनाकर प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाना है, जहां विश्वसनीय प्रमाणपत्र, क्रेडिट संचय और हस्तांतरण जैसे उपकरणों के माध्यम से दक्षता को हासिल किया जाता है। उद्यमिता ढांचे का मुख्य ज़ोर देशभर में उद्यमशीलता के विकास के लिए आवश्यक कारकों को समन्वित एवं सशक्त करने पर है।

 

जैसे-जैसे कौशल विकास तेज़ी से विकसित हो रहा है, राज्यों ने केन्द्र द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करने के अलावा, अपने खुद के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विभिन्न क्षेत्रों एवं नौकरियों में कौशल विकास को अहम आवश्यकता के तौर पर अपनाया है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, केन्द्र एवं राज्य दोनों स्तरों पर कौशल संबंधी गतिविधियों को क्रियान्वित करने के लिए एक मज़बूत संस्थागत रूपरेखा पेश करता है। राष्ट्रीय कौशल विकास आयोग (एनएसडीसी) द्वारा किए गए क्षेत्र-आधारित अध्ययनों के आधार पर, बड़े, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी व्यावसायिक निकायों के निर्माण को गति प्रदान कर, कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है, जिस पर वर्ष 2022 तक 12.68 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है, जोकि 34 क्षेत्रों में प्रशिक्षण और कौशल विकास सहित मापनीय, लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण पहल, कुशल श्रमिकों की अतिरिक्त कौशल आवश्यकताओं और प्रशिक्षणों ज़रूरतों को अनुदान मुहैया कराने का काम भी करेगा।

 

कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई ठोस कार्यक्रम तैयार किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत, युवाओं को रोज़गार और आजीविका हासिल करने में सक्षम बनाने में मदद करने के लिए संबद्ध प्रशिक्षण सहभागियों/केन्द्रों के ज़रिए एमएसडीई योजना के तहत अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चार वर्ष की अवधि में एक करोड़ से अधिक लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण देने के लिए पीएमकेवीवाई (2016-2020) को 12000 करोड़ रुपये की धनराशि मंज़ूर की गई है। logo

 

अन्य घटकों के अलावा कार्यक्रम के प्रमुख घटक, लघु-अवधि प्रशिक्षण – न्यूनतम 200 घंटों का योग्यता आधारित प्रशिक्षण, प्रशिक्षण पूर्व मान्यता – प्रशिक्षण पूर्व मान्यता – आकलन एवं प्रमाणीकरण, विशेष परियोजनाएं – कोई भी नवीन/सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना, जिसके लिए विशेष आवश्यकताओं एवं राज्य के सहयोग की ज़रूरत है, – ऐसी 25 फीसदी योजनाओं को राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि पीएमकेवीवाई के तहत कौशल प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरीके एवं योजनाएं हैं। पीएमकेवीवाई योजना के अंतर्गत महिला प्रशिक्षुओं को 1000/1500 रुपये प्रति प्रशिक्षु प्रति माह के हिसाब से यात्रा भत्ता मुहैया कराने के साथ-साथ प्रशिक्षण के उपरांत प्रत्येक महिला प्रशिक्षु को दो अथवा तीन माह के लिए 1450 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से प्रशिक्षण उपरांत सहायता राशि मुहैया कराई जाती है। यह सहायता राशि प्रशिक्षु के अधिवास जिले के भीतर या बाहर होने वाली प्लेसमेंट पर आधारित होती है। पीएमकेवीवाई परिस्थितितंत्र के भीतर शिक्षुता प्रशिक्षण के लिए दोहरे कार्यक्रम की अनुमति शुभारंभ के अग्रणी चरण में है।

 

एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत अस्थायी केन्द्रों से स्थायी केन्द्रों के संस्थागत मॉडल की ओर हस्तांतरण की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री कौशल केन्द्रों (पीएमकेके) का शुभारंभ किया गया। पीएमकेके के अंतर्गत, सरकार इच्छुक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए हर जिले में मॉडल कौशल केन्द्र स्थापित करना चाहती है। अब तक, 150 पीएम कौशल केन्द्र कार्यरत हैं। देशभर में कुल 452 प्रधानमंत्री कौशल केन्द्र खोले जाने को अनुमति दी जा चुकी है।Pradhan-Mantri-Kaushal-Kendra

 

21 प्रमुख देशों में विनिर्माण, निर्माण, थोक एवं खुदरा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में रोज़गार के अवसरों को लेकर एनएसडीसी द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन में भारतीय अंतरराष्ट्रीय कौशल केन्द्रों को स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। ये केन्द्र कर्मचारियों को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से विदेशों में बेहतर रोज़गार पाने के लिए तैयार करेंगे, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के दौर में परिस्थितियों का सामना कर रोज़गार पा सकें।

 

कौशल विकास एवं उन्नयन के लिए मंत्रालय के कार्यक्रमों की गुणवत्ता के नतीजों को सुनिश्चित करने के लिए, प्रशिक्षण केन्द्र प्रत्यायन स्थापित करने के लिए भी उपाय जारी हैं। मंत्रालय पहले ही 221 नौकरियों के संबंध में आदर्श सामग्री पाठ्यक्रम जारी कर चुका है। प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए अनिवार्य कार्यक्रम बनाने और विभिन्न नौकरियों के लिए प्रयोगशालाओं से संबंधित मानकीकृत आवश्यकताओं के प्रकाशन के बारे में योजना पर काम चल रहा है ।

 

निर्माण चरण से आगे के कार्यक्रमों के समानांतर, मंत्रालय वास्तविक सुधारों को अपनाने की प्रक्रिया में है, ताकि मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों के दोहराव से बचा जा सके और कौशल विकास के लिए कई अन्य मंत्रालयों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बीच तालमेल बैठाया जा सके। वर्तमान में 22 से अधिक केंद्रीय मंत्रालय विभिन्न कौशल विकास योजनाओं को चला रहे हैं, जिससे मानकीकरण आदि का अभाव है। इसलिए, एमएसडीई ने समान पाठ्यक्रमों की विभिन्न योजनाओं के भुगतान के मानकीकरण के लिए समान लागत मानदंडों को बढ़ावा दिया है। इसी तरह, एमएसडीई ने विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के एकीकरण के तहत प्रशिक्षण निदेशालय (डीजीटी) का देशभर में व्यावसायिक प्रशिक्षणों के लिए स्थानांतरण कर दिया है। यहां तक कि देश भर की पॉलिटेक्निकों को भी इसकी तर्ज पर तैयार करने की योजना है।

 

ध्यान देने वाली बात यह है कि एमएसडीई विभिन्न क्षेत्रों में कुशल लोगों को नौकरी दिलाने के लिए उद्योगों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। गवर्निंग काउंसिल के भाग के रूप में उद्योग नेतृत्व और विभिन्न मंत्रालयों के साथ एक सेक्टर स्किल काउंसिल की स्थापना की गई है। उत्पादन क्षेत्र के बाहर शिक्षुता के दायरे को बढ़ाने के लिए वर्ष 2014 में शिक्षुता अधिनियम, 1951 में ज़रूरी संशोधन किए गए हैं। चूंकि कौशल के अंतर को पाटने की ज़रूरत है, ऐसे में अधिकारी एवं प्रशासन युवाओं को उद्योगों की ज़रूरतो के अनुसार तैयार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि ये लोग भी देश की प्रगति में अहम योगदान दे सकें।

 

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  • पूर्व डिप्टी एडिटर, द हिन्दू समूह। लेखक वर्तमान में स्वतंत्र आर्थिक पत्रकार के तौर पर कार्यरत हैं, और दिल्ली में रहते हैं। लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।
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