*विनोद बहल i20175601                    

मोदी सरकार का तीन वर्ष का कार्यकाल इसके ‘सुधार, कार्य प्रदर्शन और बदलाव’ के प्रगतिशील दृष्टिकोण के माध्यम से सभी का विकास सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता के लिए महत्‍वपूर्ण है। इसने अच्छे सुशासन के जरिए पिछले कई वर्षों से लकवाग्रस्‍त नीति का अंत कर दिया है।

पूरी तरह यह एहसास करते हुए कि रियल एस्‍टेट,  आवास और बुनियादी ढांचे के द्वारा किया गया शहरी विकास ही आर्थिक विकास की कुंजी है, एनडीए सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में सुधार करने और दीर्घकालिक टिकाऊ प्रगति करने के दृष्टिकोण से इन तीन प्रमुख क्षेत्रों  पर ध्यान केंद्रित करने के अच्‍छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

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सरकार द्वारा अपने विजन के अनुरूप किए गए अनेक ऐतिहासिक सुधारों और नीतिगत पहलों से अच्‍छे लाभांश प्राप्‍त हुए हैं। इसने उन आलोचकों के दावे खारिज कर दिए हैं, जो यह कह रहे थे कि सरकार के आर्थिक विकास कार्यक्रम काफी हद तक सतही रहे हैं और इनके लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहे हैं। सरकार की शहरी विकास को बढ़ावा देने की इच्‍छा उसके भारी बजट में स्पष्ट रूप से दर्शाई गई थी जिसमें बुनियादी ढांचा विकास के लिए आवंटन को बढ़ाकर 70000 करोड़ रुपये कर दिया गया था और इसके अलावा 4000 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा निधि बनाने तथा आवास और शहरी विकास के लिए भी 22,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।  अगले बजट में सड़कों, राजमार्गों और रेलवे के लिए 2.31 लाख करोड़ रुपये की विशाल राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस साल के बजट में  विशेष रूप से किफायती आवासों के निर्माण को त्‍वरित गति प्रदान करने के लिए  सरकार ने इसे बुनियादी ढांचे का दर्जा देकर एक दूरगामी सुधार किया है।

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यह उल्लेख करना महत्‍वपूर्ण है कि पिछले तीन वर्षों में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 18500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की केंद्रीय सहायता दी गई है, जबकि  यूपीए शासन के 10 वर्षों के दौरान 9850 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की ही सहायता दी गई थी। वास्तव में मई 2014 में पदभार संभालते ही एनडीए सरकार ने आवास निर्माण के लिए विदेशी वित्त पोषण तक  बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के लंबे समय से लंबित मुद्दे के समाधान के लिए अपने सुधार एजेंडे पर जोर दिया। सरकार ने अनिवासी भारतीयों और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर अनावश्यक प्रतिबंधों को दूर किया है। उदार एफडीआई नीति ने बड़े पैमाने पर निधियों के प्रवाह को बढ़ावा देने में मदद की है। संयुक्त राष्ट्र की विश्व निवेश रिपोर्ट 2016 के अनुसार भारत ने रियल एस्टेट में 5.7 बिलियन डॉलर के एफडीआई प्रवाह को आकर्षित किया है और इसके अलावा निजी इक्विटी वित्‍त पोषण में 32 बिलियन डॉलर भी प्राप्त किए। रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (आरईआईटी) सुधारों को लागू करने से इस क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित वित्तपोषण प्राप्‍त होगा।

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भारत में शहरी आवासों के लिए 18.78 मिलियन यूनिटों की भारी कमी की पृष्‍ठभूमि में सरकार ने किफायती और कम लागत वाले आवासों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वर्ष 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ नामक  एक महत्‍वपूर्ण सुधार पहल शुरू की।  शहरी आवास के लिए इस मिशन का उद्देश्‍य क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी, पीपीपी, लाभार्थियों की अगुवाई में निजी आवास निर्माण के लिए सब्सिडी और मलिन बस्तियों  के पुनर्वास के माध्यम से गरीब तबकों के लिए किफायती आवास को प्रोत्‍साहन देना है। इस उद्देश्‍य के लिए घर खरीने वालों और संपत्ति डेवलपर्स के लिए टैक्स में छूट देने के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक हेतु 4000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया था। इसके अलावा आयकर प्रोत्साहन भी प्रदान किए गए थे। सीएसआर के अधीन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और मलिन बस्‍ती पुनर्विकास को शामिल किए जाने से डेवलपर्स सौ प्रतिशत कर कटौती पाने के हकदार बन गए है।

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सरकार ने किफायती आवासों  को और बढ़ावा देने के लिए इसे ऋण सुधारों में  शामिल कर लिया। इसके अलावा ब्याज दरों में 150 से अधिक बीपीएस कटौती लागू  करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने घर खरीदारों के लिए दर  कटौती करके त्‍वरित  संचरण के लिए नई मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्‍ड लैंडिंग रेट (एमसीएलआर) की शुरुआत की। Pmay_Logo

प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमए) के अधीन नई क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) ने मध्यम आय वाले लोगों को लाभ पहुंचाने के दृष्टिकोण से 18 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले और 12 लाख तक का आवास ऋण का लाभ उठाने वाले लोगों को शामिल करने के उद्देश्‍य से ब्याज सब्सिडी के दायरे का और विस्तार कर दिया है।

सभी के लिए आवास के संबंध में मोदी सरकार का सबसे प्रमुख सुधार रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम (आरईआरए) है जो लगभग एक दशक से अधर में लटका था।  आरईआरए (1 मई, 2017 से लागू) संपत्ति उपभोक्ताओं को सशक्त बनाता है और रक्षा भी करता है। यह  जनता के लिए सस्ते आवास बनाने में मदद करेगा। रियल स्‍टेट का निष्पक्ष और पारदर्शी लेनदेन के साथ विनियमन करने के उद्देश्य से यह  निवेशकों के आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देगा। बेनामी लेन-देन निषेध विधेयक विमुद्रीकरण सहित  काले धन के प्रचलन और परिसंचरण को रोकने के उपायों ने न केवल भूमि और  सम्पत्ति की कीमतों पर प्रभाव डाला है, बल्कि निवेश करने की भावना को भी बढ़ावा दिया है।

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बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए केंद्रित  सुधारों के माध्यम से शहरी प्रशासन में बदलाव  लाने के लिए सरकार की रणनीति में एक महत्‍वपूर्ण परिवर्तन आया है। सरकार का  ध्यान अब विगत में खुले और परियोजना आधारित दृष्टिकोण के सापेक्ष  क्षेत्र आधारित विकास के माध्यम से बेहतर संसाधन उपयोग और लक्षित परिणाम प्राप्त करने पर है। इस नए शहरी विकास के दृष्टिकोण के परिणाम समाने आए हैं।  पिछले 3 वर्षों में  शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 18500 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रतिवर्ष दी गई है जबकि यूपीए सरकार के 10 वर्षों के शासन के दौरान एक वर्ष में 9580 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी। समग्र  और टिकाऊ विकास के लिए शहरी बुनियादी ढांचे को गति प्रदान करने की इस रणनीति के एक हिस्‍से के रूप में अमृत (पुनरूद्धार और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन) पीएमएवाई, स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, शहरी विकास और उन्‍नयन   योजना (एचआरआईडीए) और शहरी परिवहन जैसे शुरू किए गए शहरी मिशनों ने काफी प्रगति दर्शाई है।

अमृत योजना के तहत 10000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं को कार्य करने हेतु सौंपा जा चुका है। प्रति व्‍यक्ति के लिए प्रतिदिन पानी की आपूर्ति बढ़ाकर 135 लीटर करने, सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम और गैर – मोटर चालित परिवहन का विस्‍तार करने  के अलावा 500 मिशन शहरों में 2 करोड़ शहरी परिवारों के लिए पेयजल उपलब्‍ध  कराने के लिए 2019-20 तक पूरे मिशन के लिए कुल 77000 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी गई है। स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य 100 शहरों में 13 करोड़ शहरी लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना था जिसमें काफी प्रगति हुई है। 60 मिशन शहरों के लिए कुल 133368 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दे दी गई है। 20 शहरों में लगभग 1600 करोड़ रुपये लागत की 150 परियोजनाएं पूरी होने वाली  हैं और 30000 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाओं पर जून 2017 तक या तो कार्य शुरू हो चुका होगा या उन्‍हें सौंप दिया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन को  32 करोड़ शहरी लोगों के लिए स्वच्छता में सुधार लाने के लिए 62009 करोड़ रुपए की लागत से लागू किया जा चुका है और इसने 4041 शहरों और कस्बों में से 633 शहरों को खुले में शौच से मुक्‍त बनाने में सफलता हासिल की है। बकाया शहरों को भी अक्टूबर 2019 तक ओडीएफ बनाया जाएगा। पहले ही 31 लाख व्यक्तिगत और 1.25 लाख समुदाय शौचालयों का निर्माण हो चुका है और कुल 81015 शहरी वार्डों में से 3995 वार्डों के हर घर से नगरपालिका अपशिष्‍ट के शत-प्रतिशत संग्रह और ढुलाई का लक्ष्य अर्जित किया जा चुका है। शहरी परिवहन मिशन के हिस्से के रूप में 68 किलोमीटर का नया मेट्रो खंड खोला गया है और 41571 करोड़ रुपये की लागत की  143 किलोमीटर लंबी 5 नई मेट्रो परियोजनाओं को अहमदाबाद, नागपुर, लखनऊ, चेन्नई एक्सटेंशन और पुणे में मंजूरी दी गई है। 50 शहरों में मेट्रो बनाने की योजनाएं चल रही हैं।

इन सभी उपलब्धियों के बावजूद मोदी सरकार के सामने केवल यह चुनौती  सुनिश्चित करना ही नहीं है कि अभी तक किए गए सुधार आम आदमी को लाभान्वित करने के लिए जमीनी स्‍तर तक पहुंचे है,  बल्कि सरकार के सामने अपना अधूरा एजेंडा पूरा करने की भी चुनौती है। तात्‍कालिक चुनौती आरएआरए और जीएसटी को सहज रूप से लागू करना है। इतना ही महत्वपूर्ण 2022 तक 50 मिलियन घरों के निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘सभी के लिए आवास’ कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू करने के अलावा व्‍यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने, किराए के मकान और श्रम, स्‍टाम्‍प शुल्‍क और संपत्ति के पंजीकरण के लिए तेजी से मंजूरी देने वाले  एकल खिड़की तंत्र जैसे नए सुधारों को लागू करना है।

 

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*लेखक दिल्‍ली के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं जो प्रमुख दैनिक पत्रों के लिए रियल स्‍टेट और बुनियादी ढांचे संबंधी मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं।   

 

 

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